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बुधवार, 14 नवंबर 2012

माफ कीजियेगा झारखंड के सीएम अर्जुन मुंडा साहब !


जब रोम जल रहा था तो नीरो संग उसके साथी भी बंशी बजा रहा थे। लेकिन माफ कीजियेगा झारखंड के सीएम अर्जुन मुंडा जी, मैं नीरो के साथी की श्रेणी में खड़ा नहीं हो सकता। सुना है कि आप हैलीकॉप्टर हादसे के बाद प्रायः विस्तर पर पड़े रहते हैं और कभी-कभार व्हील चेयर या बैशाखी के सहारे आवासीय परिसर में ही कुछ घुम-फिर भी लेते हैं। आपके खबरिया समाचार पत्रों और चैनलों से ज्ञात होता है कि आप राज्य की शासन व्यवस्था की बागडोर वखूबी संभाल रहे हैं। जाहिर भी है कि प्रायः शारीरिक रुप से चोटिल आदमी मानसिक रुप से घायल थोड़े होता है।
ऐसे मैं भी एक हादसे का शिकार हो चुका हूं। फर्क इतना है कि आप 10-15 फुट की ऊंचाई से हेलीकॉप्टर से रांची हवाई अड्डा पर गिरे और मैं वर्ष 1994 में  पटना के अगमकुआं गंगा सेतु पुल से  एक टेम्पो के साथ 60 फीट लुढ़का। उस हादसे में  बेचारे 3 लोग भगवान के प्यारे हो गये और मेरी  भी लगभग हड्डी-पसली एक हो गई थी। आपको पायलट की बुद्धिमानी ने बचाया तो मुझे सड़क किनारे लगे एक शीशम के पेड़ ने गोद लेकर।  श्रीराम की देन से सब सही सलामत बच गये। ईश्वर सबों को लंबी उमर दे। खास कर आपको..ताकि आप झारखंड के लिये वे सब कर सकें,जो मन-मस्तिष्क में सोच रखा है।
वेशक, आपमें और मुझमें ऐसे तो आस्मां-जमीं का फर्क है। कहां राजा भोज और कहां गंगुआ….। कहां आप एक सीएम और कहां मैं एक आम नागरिक।  लेकिन उस हादसे के बाद से मैंने भी वही निर्णय लिया था, जो आपने लिया है। आपने खुद कहा है कि हैलिकॉप्टर हादसे के बाद जो नव जीवन मिला है, वह दूसरों की सेवा के लिये है। अब आपके मन में दूसरों की सेवा की भावना के क्या मायने हैं, ये आप जानें या राम जानें। ऐसे आपने अपने सरकारी आवास परिसर में रामभक्त हनुमान जी की मूर्ति स्थापना कर संकेत तो दे ही दिया है। मेरा तो मकसद बिल्कुल साफ है..कुव्यवस्था के खिलाफ खुली जंग। अंजाम चाहे कुछ भी हो। मुझे जब कोई भय सताता है तो हनुमान जी से पहले पटना के अगमकुंआ के उस शीशम के पेड़ को याद कर लेता हूं। सब डर-भय छू मंतर हो जाता है। 
खैर, छोड़िये इन बातों को। भगवान सबका भला करे।   दुःख की बात तो यह है कि आप उधर विस्तर पर पड़े थे और इधर एक बिल्डर से अखबार के फ्रेंचाईजी बने साहब ने एक साथ  तीन थानों की पुलिस के हाथों मुझे एक अदना पत्रकार से 15 लाख का रंगदार बनवा कर जेल भिजवा दिया।   उस साहेब को मेरे वेबसाइट www.raznama.com के एक समाचार पर आपत्ति थी। यह बात मुझे जेल जाने के थोड़ी देर पहले आपके सरकारी आवास के ठीक वगल में स्थित गोंदा थाना में बताया गया। मुझ पर  लिखित आरोप लगाया गया है कि मैंने कई बार उस बिल्डर साहेब के अंग्रेजी अखबार के दफ्तर में जाकर 15 लाख की रंगदारी मांगी और यह भी धमकी दिया कि 15 लाख नहीं मिलने पर उस करोड़पति साहेब को एक हत्या के मामले में फंसा दूंगा। उसमें मेरे फेसबुक एकांउट की भी चर्चा की गई। 
शायद आपको यह बात बताने की जरुरत नहीं है कि सच क्या है? मुझे जहां तक जानकारी है , उस आलोक में आप सब कुछ जानते हैं। मुझे तो यहां तक बताया जा रहा है कि मेरे खिलाफ जो भी कार्रवाई की गई है,वो आपके सरकारी निवास (सीएम हाउस) के इशारे पर की गई थी बल्कि आपके निर्देश पर ही की गई थी। अगर आपको या किसी को समाचार की सत्यता पर संदेह था तो उसकी अलग प्रक्रिया थी। समाचार के तथ्यो या स्रोतों की पड़ताल करवाई जा सकती थी। समाचार प्रसारित होने के कई दिनों बाद उक्त तरह के आरोप लगा कर हड़बड़ी में जेल भेजने की मंशा अभी तक मैं समझ नहीं पाया हूं। नीचे से उपर तक के सभी पुलिस अधिकारी यही बताते हैं कि उन्होंने उपर के आदेश का पालन किया है। 
अब जहां तक सूचना एवं जनसंपर्क विभाग, झारखंड सरकार और उसके अधिकारियों द्वारा कॉरपोरेट या छद्म मीडिया हाउसों की सांठ-गांठ का सबाल है तो इसमें बहुत बड़ी गड़बड़ झाला है। करोड़ो रुपये का दुरुपयोग-घोटाला की गई है और अभी भी जारी है। आप इसकी जांच करवा कर देख लें । सब आयने की तरह साफ हो जायेगा। आप झारखंड जैसे प्रदेश के सीएम हैं। मुझ जैसा कोई आपसे जबरिया जांच थोड़े करवा सकता है। हां, एक बात तो तय है कि यदि आप इसकी फौरिक जांच-कार्रवाई नहीं करवाई तो भविष्य में इसके छींटे आप पर पड़ने निश्चित है। ये व्यूरोक्रेट्स और कॉरपोरेट्स क्या बला है। आज सत्ता आपके हाथ में है तो ये लोग आपके चारो ओर दिख रहे हैं। कल सत्ता किसी दुसरे के हाथ में जायेगी तो  ये लोग किसी और के चारो ओर खड़े हो जायेगें।
.………………….मुकेश भारतीय 

शुक्रवार, 20 जुलाई 2012

झारखंड सरकार के संरक्षण में अमेरिका से चल रही है फर्जी 'आपका सीएम.कॉम' वेबसाइट


झारखंड में कायदा-कानून नाम की कोई चीज नहीं बची है। हालत यह है कि सत्ताशीर्ष पर बैठे लोग ही इसकी धज्जियां उड़ा रहे हैं। जहां एक ओर भाजपानीत अर्जुन मुंडा सरकार के संचालन समिति के अध्यक्ष एवं झामुमो सुप्रीमों शिबू सोरेन नगड़ी में रांची हाई कोर्ट के फैसले के विरुद्ध जाकर अधिग्रहित जमीन पर ग्रामीणों से हल चलाने का फरमान जारी कर डालते हैं , वहीं करोड़ों रुपये के सरकारी खर्च व दुरुपयोग के साथ ही सरकारी संरक्षण में श्री अर्जुन मुंडा का www.aapkacm.com  का फर्जी संचालन जारी है।
इस मुद्दे को राजनामा.कॉम ने सप्रमाण करीब चार माह पहले ही “ अर्जुन मुंडा सरकारी खजाने से उड़ा रहे हैं करोड़ो रुपये !   http://raznama.com/?p=9088  ”   शीर्षक से उजागर किया था , लेकिन न तो किसी संबंधित आला अधिकारी के कानों में जूं रेगीं और न ही खुद मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने ही सुध ली।
झारखंड सरकार के सूचना एवं जन संपर्क विभाग द्वारा इस वेबसाइट को लेकर  समाचार पत्र-पत्रिकाओं, न्यूज चैनलों, एफएम रेडियो आदि से लेकर अन्य संचार माध्यमों पर करोड़ो रुपये प्रचार-प्रसार में लुटाने के बाद आम लोगों को कितना लाभ पहुंचा है…. यह अलग जांच का विषय है। फिलहाल सनसनीखेज तथ्य यह है कि पूर्णतः सरकारी नियंत्रण में चलाये जा रहे www.aapkacm.com  का अधिकारिक निबंधन-स्वामित्व न तो सरकार के किसी महकमे के पास है, न मुख्यमंत्री के पास है और न ही श्री अर्जुन मुंडा के पास। 
सबसे गैरकानूनी पहलु तो यह है कि  www.aapkacm.com का संचालन whois identity के अनुसार किसी  Kishore Patel नाम के व्यक्ति के द्वारा  8807 , ,Juneberry Rd, Lewis Center, Ohio 43035 , United States से हो रहा है। इस वेबसाइट का Administrative Contact: Patel, Kishore  @hotmail.com, 8807 Juneberry Rd, Lewis Center, Ohio 43035, United States, (614) 859-5677, Technical Contact: Patel, Kishore  @hotmail.com, 8807 Juneberry Rd,  Lewis Center, Ohio 43035, United States, (614) 859-5677,  Domain servers in listed order: NS47.DOMAINCONTROL.COM, NS48.DOMAINCONTROL.COM बताया गया है।
उल्लेखनीय है कि भारत सरकार की गाइड लाइन में साफ़ अंकित है की कोई भी सरकारी वेबसाइट gov.in में होनी चाहिए। मतलब डॉट कॉम का प्रयोग सरकारी वेबसाइट में नहीं किया जा सकता है…. क्यूंकि कॉम का मतलब होता है  कॉमर्शियल। और जिस तरह से झारखंड सरकार के मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा के नाम सेwww.aapkacm.com  बतौर कॉमर्शियल चलाया जा रहा है उसमें गोपनीयता की भी कोई गारंटी नहीं है। ………….. मुकेश भारतीय