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शनिवार, 6 अगस्त 2011

विदेशी लहर है भारत पहुंची “बेशर्मी मोर्चा”

स्‍लट वॉक यानि बेशर्मी मोर्चा। क्‍या आपको पता है कि स्‍लट वॉक का असल मतलब क्‍या होता है और इसका जन्‍म कहां हुआ। अगर नहीं तो हम आपको बताते हैं। स्लट वॉक यानी बेशर्मी मोर्चा की नींव कनाडा के टोरंटो शहर में उस समय पड़ी, जब दुष्कर्म की बढ़ती घटनाओं के लिए एक पुलिस अधिकारी ने भड़काऊ कपड़ों को प्रमुख कारण बताया। अधिकारी ने महिलाओं को संयमित परिधान पहनने की सलाह दी थी।
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दिल्ली से लखनऊ पहुंचा "बेशर्मी मोर्चा" :किया भौंडा प्रदर्शन

महिलाओं से छेड़छाड़ की बढ़ती वारदातों, बलात्‍कार, यौन शोषण और छिटाकशी की घटनाओं को रोकने के लिये दिल्‍ली में पहली बार स्‍लट वॉक यानी कि बेशर्मी मोर्चा निकाला गया। दिल्‍ली के बाद अब इस मार्च ने उत्‍तर प्रदेश की तरफ रुख किया है।आगामी दिनों में राजधानी लखनऊ में यह मोर्चा निकाला जायेगा...... आगे पढ़े

विदेश लहर है भारत पहुंची “बेशर्मी मोर्चा”

स्‍लट वॉक यानि बेशर्मी मोर्चा । क्‍या आपको पता है कि स्‍लट वॉक का असल मतलब क्‍या होता है और इसका जन्‍म कहां हुआ। अगर नहीं तो हम आपको बताते हैं। स्लट वॉक यानी बेशर्मी मोर्चा की नींव कनाडा के टोरंटो शहर में उस समय पड़ी, जब दुष्कर्म की बढ़ती घटनाओं के लिए एक पुलिस अधिकारी ने भड़काऊ कपड़ों को प्रमुख कारण बताया। अधिकारी ने महिलाओं को संयमित परिधान पहनने की सलाह दी थी।
अधिकारी के बयान से नाराज लगभग तीन हजार महिलाओं ने 3 अप्रैल 2011 को टोरंटो की सड़कों पर अर्धनग्न होकर विरोध मार्च (स्लट वाक) निकाला था। महिलाओं के इस विरोध प्रदर्शन को दुनियाभर से समर्थन मिला और अमेरिका, यूरोप और आस्ट्रेलिया होते हुए विरोध की यह लहर दिल्ली आ पहुंची। दिल्ली में इसके आयोजन का जिम्मा संभाला दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्राओं ने। ऐसे में अब देखना यह है कि दिल्‍ली के बाद अब यूपी में स्‍लट वॉक कितना सफल होता है।

दिल्ली से लखनऊ पहुंचा "बेशर्मी मोर्चा" :किया भौंडा प्रदर्शन

महिलाओं से छेड़छाड़ की बढ़ती वारदातों, बलात्‍कार, यौन शोषण और छिटाकशी की घटनाओं को रोकने के लिये दिल्‍ली में पहली बार स्‍लट वॉक यानी कि बेशर्मी मोर्चा निकाला गया। दिल्‍ली के बाद अब इस मार्च ने उत्‍तर प्रदेश की तरफ रुख किया है। जी हां आगामी कुछ दिनों में प्रदेश की राजधानी लखनऊ में यह मोर्चा निकाला जायेगा। आपको बता दें कि यह मोर्चा उस आजादी को हासिल करने के लिये निकाला जा रहा है जो महिलाओं को पहनने-ओढ़ने पर रोक लगाता है। यह मोर्चा पुरुषों के उस संकीर्ण मानसिकता के खिलाफ निकाला जा रहा है जो महिलाओं को उनके ही खिलाफ हो रहे अपराध के लिए जिम्मेदार ठहराता है।