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सोमवार, 8 अगस्त 2011

राजीव गांधी पर टिप्पणी के बाद बवाल, 72 गिरफ्तारः कांग्रेसी गए कोर्ट

कश्मीर पर शीन जैसी फिल्म बनाने वाले डायरेक्टर अशोक पंडित की कश्मीरी पंडितों के मसले पर पूर्व प्रधानमंत्री राजवी गांधी पर की गई एक टिप्पणी पर बवाल मच गया है। पंडित ने  कश्मीर पंडितों की दुर्दशा के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराते हुए राजीव की हत्या जैसी त्रासदी को कथित तौर पर कश्मीरी पंडितों की मां-बहनों की हाय का हश्न बताया। 

इस बयान को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इंदौर के देवी अहिल्याबाई हवाई अड्डे पर पंडित के खिलाफ जमकर नारेबाजी की तथा उनके खिलाफ मामला दर्ज करने की मांग की। पंडित मुम्बई लौटने के लिए हवाई अड्डे पहुंचे थे। इस दौरान कांग्रेस और पुलिस ने धक्का-मुक्की हुई तथा हाथापाई की स्थिति बन गई। इसके अलावा कांग्रेस विधायकों और कार्यकर्ताओं ने तुकोगंज थाने का घेराव किया। पुलिस विरोध कर रहे तीन कांग्रेस समेत 72 पार्टी कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया है।

उधर,पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी पर अपमानजनक टिप्पणी को लेकर कांग्रेस ने फिल्म डायरेक्टर अशोक पंडित के खिलाफ सोमवार को कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। शहर कांग्रेस इकाई के अध्यक्ष प्रमोद टंडन और पार्टी के स्थानीय नेता रघुनंदन सिंह परमार ने पंडित के खिलाफ चीफ जुडिशल मजिस्ट्रेट कपिल मेहता की अदालत में शिकायत याचिका दायर की है, जिसेप्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट ओपी बोहरा की अदालत में स्थानांतरित कर दिया गया है।

बाबरी मस्जिद-रामजन्मभूमि विवादः इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका मंजूर

सर्वोच्च न्यायालय ने बाबरी मस्जिद-रामजन्मभूमि मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के विवादित स्थल को तीन हिस्सों में बांटे जाने के फैसले के खिलाफ सोमवार को अखिल भारतीय श्री राम जन्मभूमि पुनरुद्धार समिति की एक याचिका स्वीकार कर लीहै।
सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति आफताब आलम और न्यायमूर्ति आर.एम. लोढ़ा
की पीठ ने याचिका को स्वीकार कर उसे मुख्य मामले से सम्बद्ध कर दिया.
सुन्नी वक्फ बोर्ड ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि राम जन्मभूमि
पुनरुद्धार समिति, अयोध्या विवाद पर आए इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ के 30 सितम्बर, 2010 के फैसले से पहले मामले में कोई पक्ष नहीं था.
वक्फ बोर्ड के वकील अनूप चौधरी ने अदालत से कहा कि समिति एक अन्य मामले में
उच्च न्यायालय गया था, जिसे खारिज कर दिया गया था. अब वह एक ऐसे मामले में याचिका दायर नहीं कर सकता है, जिसमें वह उच्च न्यायालय में पक्ष नहीं है.
न्यायालय ने कहा कि सुन्नी वक्फ बोर्ड की आपत्ति बरकरार रहेगी और सुनवाई के दौरान इस पर विचार किया जाएगा.

ज्ञात हो कि उच्च न्यायालय के फैसले में पिछले वर्ष विवादित स्थल को तीन
दावेदारों के बीच तीन हिस्सों में बांटने का निर्देश दिया गया था. सर्वोच्च न्यायालय ने नौ मई, 2011 को इस फैसले को 'विचित्र और चकित' करने वाला बताते हुए उसे स्थगित कर दिया था.
इस फैसले में केंद्रीय गुम्बद का निचला हिस्सा राम लला को
, राम चबूतरा और सीता रसोई निर्मोही अखाड़ा को और शेष हिस्सा सुन्नी वक्फ बोर्ड को दिए जाने का आदेश दिया गया था.