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गुरुवार, 25 अगस्त 2011

देश की असफल महिला सोनिया गांधी को फोर्ब्स पत्रिका ने दुनिया का ताकतवर बताया !

-मुकेश भारतीय-
क्या कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी दुनिया की ताकतवर महिलाओं में एक हैं! बहुतेरे इससे सहमत हो सकते हैं,लेकिन मैं नहीं। खासकर देश में आज जिस तरह के माहौल दिख रही है,उस आलोक में तो बिल्कुल नहीं। लोकपाल हो या जन लोकपाल,इसके सारे पहलु हमारे भारतीय संविधान की मूल भावनाओं से जुड़े़ हैं और सत्ता मद में चूर नेताओं ने इसकी दुर्गति कर डाली है। कांग्रेस की बागडोर संभालने के बाद सोनिया राज में लोकतंत्र के सभी खंभो को ऐसी की तैसी कर डाली है।आज भारतीय जनमानस के एक बड़े वर्ग में भारी असंतोष है।इसके मद्देनजर सोनिया गांधी एक असफल, कमजोर व महात्वाकांक्षी महिला से इतर कुछ नजर नहीं आती है।
ऐसे में दुनिया की 100 सबसे ताकतवर महिलाओं की सूची फोर्ब्स पत्रिका ने जारी की है।सोनिया इस सूची में सातवें नंबर पर हैं। पहले और दूसरे स्थान पर क्रमश: जर्मनी की चांसलर ऎंजला मार्केल तथा अमेरिकी विदेशी मंत्री हिलेरी क्लिंटन हैं। सोनिया गांधी इस सूची में अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की पत्नी मिशेल ओबामा से आगे हैं। इस सूची में पेप्सीको की प्रमुख भारतीय-अमेरिकी इंदिरा नूयी चौथे स्थान पर हैं। तीसरे स्थान पर ब्राजील की पहली महिला राष्ट्रपति बनी दिलमा रोउसेफ हैं। फोर्ब्स ने सोनिया के बारे में लिखा है कि सोनिया गांधी की उच्च आर्थिक वृद्धि के लिये तारीफ की जाती है। साथ ही पत्रिका ने उन्हें कला पारखी भी बताया है।

कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी के होश ठिकाने, अन्ना से बोले सॉरी

कांग्रेस कई नेताओं का कोई सानी नहीं है। उसमें तो कई ऐसे हैं,जो अपनी तमीज और तहजीब तक भूल गए हैं। दिग्विजय सिंह के बाद मनीष तिवारी का दिमागी संतुलन कुछ ठीक नहीं लग रहा था,लेकिन अब लगता है कि धीरे धीरे उनका होश ठिकाने आ रहा है।
 अन्ना हजारे को भगोडा और भ्रष्टाचारी कहने वाले कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने आज अन्ना हजारे से माफी मांग ली है। गौरतलब है कि मनीष तिवारी ने 14 अगस्त को अन्ना के अनशन से पहले उन पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी।
कांग्रेस प्रवक्ता ने एक प्रेस कांफ्रेस में अन्ना हजारे के बारे में टिप्प्णी करते हुए अन्ना को भ्रष्ट कहा था और तुम जैसे अभद्र भाषा का प्रयोग किया था, लेकिन इसके बाद इस मुद्दे पर विपक्षी पार्टी बीजेपी ने सदन में मनीष तिवारी को आडे हाथों लिया। जब मनीष द्वारा अन्ना पर लगाए गए सारे आरोप निराधार साबित हुए तो मनीष तिवारी गायब हो गए। पूरे 10 दिनों के बाद आज मनीष तिवारी सामने आए और उन्होनें अन्ना हजारे से अपनी भाषा और आरोपों के लिए माफी मांगी और अन्ना से अनशन तोडने की अपील भी की है ।

रविवार, 14 अगस्त 2011

कांग्रेस के चौतरफे हमले में घिर रहे हैं अन्ना


लोकपाल बिल को लेकर 16 अगस्त से अनशन की तैयारी कर रहे अन्ना हजारे पर कांग्रेस ने चौतरफा हमला बोल दिया है। सिब्ब्ल और प्रणब मुखर्जी ने इसे असंवैधानिक करार दिया।
कपिल सिब्बल ने कहा कि अन्ना हजारे का प्रदर्शन पूरी तरह से असंवैधानिक व संसद का अपमान है। उन्होंने कहा कि विरोध के अधिकार का मतलब अपनी पसंद की जगह पर विरोध करने का अधिकार नहीं है।
उधर, केंद्रीय मंत्री प्रणव मुखर्जी ने आरोप लगाया कि वह संविधान और संसद को चुनौती दे रहे हैं और यह कदम स्वीकार्य नहीं है। मुखर्जी ने कहा कि जहां तक संविधान का सवाल है तो कानून बनाने का काम सरकार का है ना कि किसी तीसरी शक्ति का। कोई भी इस बात के लिए मजबूर नहीं कर सकता कि कानून उसकी इच्छा के अनुसार बने। यह फैसला करने का काम संसद का है।
कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता मनीष तिवारी ने भी हजारे के आंदोलन करने के नैतिक अधिकार पर निशाना साधते हुए गांधीवादी कार्यकर्ता से न्यायमूर्ति पीबी सावंत आयोग द्वारा उनके तथा उनके ट्रस्ट के खिलाफ पाये गये गंभीर निष्कर्षों पर स्पष्टीकरण मांगा है।
अन्ना हजारे ने 16 अगस्त को शुरू होने वाले अपने अनशन के लिए दिल्ली पुलिस द्वारा लगाई शर्तों पर प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप का आग्रह किया था, जिससे किनारा करते हुए पीएम ने उन्हें दिल्ली पुलिस के पास जाने को कहा।
मुखर्जी ने कहा कि अन्ना हजारे जो कर रहे हैं वह संसद की संवैधानिक सत्ता को चुनौती देने जैसा है जोकि स्वीकार्य नहीं है। अपने प्रस्तावित अनशन पर लगाई पाबंदी को लेकर हजारे के विरोध के संबंध में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि हमने अन्ना हजारे को एक जगह मुहैया कराई है। वह इसे पसंद या नापसंद कर सकते हैं। लेकिन तथ्य यह है कि कुछ जगहें हैं जहां हम लोगों को जमा होने की इजाजत नहीं देते जैसे राइटर्स बिल्डिंग और विधानसभा जहां धारा 144 लागू है।

सोमवार, 8 अगस्त 2011

राजीव गांधी पर टिप्पणी के बाद बवाल, 72 गिरफ्तारः कांग्रेसी गए कोर्ट

कश्मीर पर शीन जैसी फिल्म बनाने वाले डायरेक्टर अशोक पंडित की कश्मीरी पंडितों के मसले पर पूर्व प्रधानमंत्री राजवी गांधी पर की गई एक टिप्पणी पर बवाल मच गया है। पंडित ने  कश्मीर पंडितों की दुर्दशा के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराते हुए राजीव की हत्या जैसी त्रासदी को कथित तौर पर कश्मीरी पंडितों की मां-बहनों की हाय का हश्न बताया। 

इस बयान को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इंदौर के देवी अहिल्याबाई हवाई अड्डे पर पंडित के खिलाफ जमकर नारेबाजी की तथा उनके खिलाफ मामला दर्ज करने की मांग की। पंडित मुम्बई लौटने के लिए हवाई अड्डे पहुंचे थे। इस दौरान कांग्रेस और पुलिस ने धक्का-मुक्की हुई तथा हाथापाई की स्थिति बन गई। इसके अलावा कांग्रेस विधायकों और कार्यकर्ताओं ने तुकोगंज थाने का घेराव किया। पुलिस विरोध कर रहे तीन कांग्रेस समेत 72 पार्टी कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया है।

उधर,पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी पर अपमानजनक टिप्पणी को लेकर कांग्रेस ने फिल्म डायरेक्टर अशोक पंडित के खिलाफ सोमवार को कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। शहर कांग्रेस इकाई के अध्यक्ष प्रमोद टंडन और पार्टी के स्थानीय नेता रघुनंदन सिंह परमार ने पंडित के खिलाफ चीफ जुडिशल मजिस्ट्रेट कपिल मेहता की अदालत में शिकायत याचिका दायर की है, जिसेप्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट ओपी बोहरा की अदालत में स्थानांतरित कर दिया गया है।

देश को कहां ले जाएगी अन्ना और संसद का टकराव

जनलोकपाल के लिए आंदोलन कर रहे गांधीवादी अन्ना हजारे को दिल्ली पुलिस ने भले ही 16 अगस्त से जंतर-मंतर पर अनशन की इजाजत नहीं दी है, पर इस जगह हर साल 2000 से भी ज्‍यादा धरना-प्रदर्शन होते हैं और इनमें तीन से पांच  लाख तक लोग शामिल होते हैं। यह आंकड़ा दिल्‍ली पुलिस द्वारा ही दिया गया है। सरकार ने अन्‍ना के अनशन को लेकर चिंता जताई है।सरकार की ओर से संसद में पेश लोकपाल बिल का विरोध करने पर संवैधानिक व्‍यवस्‍था चरमराने की चिंता है। उन्‍होंने कहा, ‘संसद पर प्रश्‍नचिन्‍ह लगाना अपने आप पर प्रश्‍नचिन्‍ह लगाने जैसा है।
पुलिस ने अन्‍ना को यह कहते हुए जंतर मंतर पर 16 अगस्‍त से अनशन शुरू करने की इजाजत नहीं दी कि इससे कानून-व्‍यवस्‍था बिगड़ जाएगी। पर 16 अगस्‍त से पहले ही जंतर मंतर अन्‍ना के रंग में रंग गया। रविवार की शाम हजारों लोग जनलोकपाल व अन्ना के समर्थन के नारे लिखी तख्तियां लिए, गांधी टोपी पहने, तिरंगे लहराते हुए जमा हुए और सरकारी लोकपाल बिल के विरोध में नारे लगाए। अप्रैल में हुए अन्ना आंदोलन के बाद यह पहला मौका था जब जंतर-मंतर पर इतनी भीड़ जमा हुई। हालांकि पुलिस ने अन्ना समर्थकों को जंतर-मंतर से इंडिया गेट के बीच कैंडल मार्च निकालने से रोक दिया।
भीड़ का रुख देखकर मंच
संभाल रहे अन्ना के सहयोगी अरविंद केजरीवाल व मनीष सिसौदिया ने भी सरकार के साथ आर-पार की लड़ाई का एलान कर दिया। उनका कहना था कि यदि जनता ने यह मौका खो दिया तो उन्हें दोबारा यह मौका नहीं मिलेगा। अगर आंदोलन नहीं हुआ तो सरकार जनविरोधी बिल जनता पर थोप देगी। हजारे पक्ष के वक्ताओं ने कहा कि यदि दिल्ली पुलिस ने उन्हें शहर में कहीं भी अनशन व प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी तो वे गिरफ्तारियां देकर जेल में ही अनशन करेंगे और देशवासियों से एक हफ्ते के भारत बंद की अपील करेंगे। 
अन्ना समर्थकों ने जंतर-मंतर
पर लोकपाल बिल की प्रतियां जलाईं और उसके बाद मोमबत्तियां जलाकर इंडिया गेट की ओर चलने लगे लेकिन समर्थकों की भारी तादाद को मौजूद पुलिस व केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल ने वहीं रोक दिया। इस बात पर कुछ देर के लिए पुलिस व हजारे पक्ष के बीच झड़प भी हुई।

रविवार, 7 अगस्त 2011

शीला को लेकर कांग्रेस बेफिक्र, समूचे दिल्ली में भाजपा का व्यापक प्रदर्शन

कैग रिपोर्ट पर शीला के इस्तीफे की मांग कर रही बीजेपी सड़कों पर उतर आई है। दिल्ली के 70 विधानसभा क्षेत्रों में बीजेपी का प्रदर्शन शुरू हो चुका है। विकास मार्ग पर धरना प्रदर्शन किया जा रहा है।
गौरतलब है कि सीएजी ने राष्ट्रमंडल खेलों में हुए घोटाले में शीला दीक्षित सरकार पर उंगली उठाई है। कांग्रेस का तर्क है कि शीला दीक्षित ने इतना बड़ा अपराध नहीं किया कि उन्हें पद से हटाया जाए। इसके विरोध में और शीला के इस्तीफे की मांग पर बीजेपी को ये तर्क गले नहीं उतर रहा है। मालूम हो कि सीएजी की रिपोर्ट में मुख्यमंत्री शीला दीक्षित पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। विदेशी लाइटों, साइनबोर्ड और पेड़-पौधों की आड़ में 100 करोड़ रुपए से ज्यादा फिजूलखर्च कर दिए गए हैं। कांग्रेस की नजर में शीला सरकार ने कोई गुनाह नहीं किया।
गौरतलब है कि सीएजी की रिपोर्ट पर कांग्रेस कोर ग्रुप की बैठक हुई। इस बैठक में प्रधानमंत्री समेत कांग्रेस के सभी बड़े नेता मौजूद थे। इसी बैठक में ये तय हुआ कि शीला दीक्षित पर फिलहाल अभी कोई कार्रवाई नहीं होगी।

बुधवार, 3 अगस्त 2011

राहुल गांधी के बायोडाटा में धर्म और राष्ट्रीयता का जिक्र क्यों नहीं !

भारत का एक आम नागरिक किसी भी सरकारी गैर सरकारी क्षेत्र में जब अपना परिचय प्रस्तुत करता है या उससे कहीं मांगा जाता है तो उसमें जाति,वर्ग,धर्म और राष्ट्रीयता अंकित करना अनिवार्य होता है। ऐसे में गौर से देखिए, कांग्रेस के युवराज और घोषित भावी प्रधानमंत्री राहुल गांधी के इस सरकारी प्रोफाइल को....इसमें इन सब की कहीं कोई जिक्र नहीं है!!