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गुरुवार, 25 अगस्त 2011

भारत में भ्रष्टाचार रहित शहरी जीवन की कल्पना की जा सकती है !

-राजेश प्रियदर्शी-
भारत का मध्यम वर्ग उस मछली की तरह है जो पानी के गंदा होने की शिकायत करते-करते उसके बिना रहने की बात करने लगा है. भारत में भ्रष्टाचार रहित शहरी जीवन की कल्पना करने पर लगता है कि मानो व्यवस्था ही ख़त्म हो जाएगी.
भ्रष्टाचार के बिना जीवन बहुत कठिन होता है. अपनी बारी का इंतज़ार करना पड़ता है, पूरे टैक्स भरने पड़ते हैं, बिना पढ़े-लिखे पीएचडी नहीं मिलती, सिफ़ारिश नहीं चलती, सबसे तकलीफ़देह बात ये कि जेब में पैसे होने के बावजूद हर चीज़ नहीं ख़रीदी जा सकती...
भ्रष्टाचार करोड़ों लोगों की रगों में बह रहा है, भारत में सबसे ज़्यादा लोगों को रोज़गार देने वाला उद्यम भारतीय रेल या कोल इंडिया नहीं है बल्कि ईश्वर की तरह सर्वव्यापी भ्रष्टाचार है.
अन्ना सही हैं या ग़लत इस बहस को एक तरफ़ रखकर सोचना चाहिए कि अगर अन्ना का आंदोलन सफल हो गया तो उन्हें ही सबसे बड़ा झटका लगेगा जो लोग सबसे बुलंद आवाज़ में नारे लगा रहे हैं और ट्विट कर रहे हैं.
इस आंदोलन के समर्थन में बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं जो राजनीतिक भ्रष्टाचार से तंग आ चुके हैं और उन्हें लगता है कि जन-लोकपाल बिल से सिर्फ़ नेताओं की कमाई बंद होगी, उनका जीवन यूँ ही चलता रहेगा.
जैसे मिलावट करने वाले दान भी करते हैं, पाप करने वाले गंगा नहाते हैं, उसी तरह बहुत से लोग भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ मोमबत्तियाँ जला रहे हैं, इससे मन को शांति मिलती है, ग्लानि मोम की तरह पिघलकर बह जाती है.
अन्ना हज़ारे को इस बात श्रेय ज़रूर मिलना चाहिए कि उन्होंने भ्रष्टाचार को बहस का इतना बड़ा मुद्दा बना दिया है, हो सकता है कि यह एक बड़े आंदोलन की शुरूआत हो लेकिन अभी तो भावुक नारेबाज़ी, गज़ब की मासूमियत और हास्यास्पद ढोंग ही दिखाई दे रहा है.
नेताओं का भ्रष्टाचार ग्लोबल वर्ल्ड में शर्मिंदगी का कारण बनता है, बिना लाइसेंस के कार चलाने पर पुलिसवाला पाँच सौ रुपए ऐंठ लेता है, ये दोनों बुरी बातें हैं, ये बंद होना चाहिए, क्या मध्यम वर्ग में सिर्फ़ मोमबत्ती जलाने वाले सज्जन लोग हैं जो दोनों तरफ़ से पिस रहे हैं?
भ्रष्ट तरीक़े अपनाकर पैसा या रसूख हासिल करने वाले लोगों के प्रति सम्मान का भाव जब तक ख़त्म नहीं होगा भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ असली लड़ाई शुरू नहीं होगी.

शनिवार, 20 अगस्त 2011

बाबा रामदेव ने हरिद्वार में खाई भ्रष्टाचार के खात्मे को गंगा की कसम

योगगुरु बाबा रामदेव ने भ्रष्टाचार और कालेधन के खिलाफ हजारों युवा योग प्रशिक्षकों को हरकी पैड़ी पर गंगा जल लेकर भ्रष्टाचार, कालेधन और राष्ट्ररक्षा के लिए आत्मोसर्ग करने का संकल्प भी दिलाया। इस दौरान एक वाहन पर लगातार हवन-यज्ञ चलता रहा। पतंजलि योगपीठ की साध्वी रमा आदि ने हवन में पूर्णाहुति दी। भ्रष्टाचार के खात्मे के लिए पूरे रास्ते वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ हवन में पूर्णाहुति दी जाती रही।
ये सभी पूरे रास्ते तिरंगे को हाथों में लिए और भ्रष्टाचार विरोधी और भारत माता की जय के जोरदार नारे लगा रहे थे। शुक्रवार की दोपहर बाबा रामदेव के नेतृत्व में रैली पुलजटवाड़ा से शुरू हुई रैली जैसे-जैसे आगे बढ़ती गई, रैली विशाल स्वरूप लेती गई। रैली में बाबा समर्थक पैदल तो चल ही रहे थे, साथ में कई बाईक, कार, ट्रैक्टर, बस और ट्रक पर भी सवार थे। इन सभी ने अपने हाथों में तख्तियों व बैनरों पर अंकित भ्रष्टाचार विरोधी नारेबाजी के पोस्टर ले रखे थे। रैली के बीचोंबीच में खुले वाहन में वाहन पर बाबा रामदेव, आचार्य बालकृष्ण समेत अन्य सवार थे।
रैली विभिन्न जगहों से होते हुए देर शाम हरकी पैड़ी पहुंची। हरकी पैड़ी में बाबा ने रैली में मौजूद सभी को भ्रष्टाचार के खात्मे के लिए राष्ट्ररक्षा का संकल्प दिलाया। उन्होंने हरकी पैड़ी पर सभी को दोनों हाथों में गंगा जल लेकर भ्रष्टाचार के खात्मे का संकल्प दिलाया। बाद में रैली में विभिन्न प्रान्तों से आए योग प्रशिक्षकों ने कलशों में भी गंगाजल लिया। ये कार्यकर्ता अपने-अपने क्षेत्रों में जाकर अन्य लोगों को भ्रष्टाचार के खात्मे और कालेधन के खिलाफ जागरूक करने और राष्ट्ररक्षा का संकल्प दिलायेंगे।

शुक्रवार, 19 अगस्त 2011

टीम अन्ना की ईमानदारी का गज़ब खुलासा !

सतीश चन्द्र मिश्र 
रामलीला मैदान में अभी-अभी खत्म हुई प्रेस कांफ्रेंस में अरविन्द केजरीवाल और प्रशांत भूषण ने साफ़ और स्पष्ट जवाब देते हुए लोकपाल बिल के दायरे में NGO को भी शामिल किये जाने की मांग को सिरे से खारिज कर दिया है. विशेषकर जो NGO सरकार से पैसा नहीं लेते हैं उनको किसी भी कीमत में शामिल नहीं करने का एलान भी किया. ग्राम प्रधान से लेकर देश के प्रधान तक सभी को लोकपाल बिल के दायरे में लाने की जबरदस्ती और जिद्द पर अड़ी अन्ना टीम (India Against Corruption) NGO को इस दायरे में लाने के खिलाफ शायद इसलिए है, क्योंकि अरविन्द केजरीवाल, मनीष सिसोदिया,किरण बेदी, संदीप पाण्डेय ,अखिल गोगोई और खुद अन्ना हजारे भी केवल NGO ही चलाते हैं. अग्निवेश भी 3-4 NGO चलाने का ही धंधा करता है. और इन सबके NGO को देश कि जनता की गरीबी के नाम पर करोड़ो रुपये का चंदा विदेशों से ही मिलता है.इन दिनों पूरे देश को ईमानदारी और पारदर्शिता का पाठ पढ़ा रही ये टीम अब लोकपाल बिल के दायरे में खुद आने से क्यों डर/भाग रही है.भाई वाह…!!! क्या गज़ब की ईमानदारी है…!!!
इन दिनों अन्ना टीम की भक्ति में डूबी भीड़ के पास इस सवाल का कोई जवाब है क्या…..?????
जहां तक सवाल है सरकार से सहायता प्राप्त और नहीं प्राप्त NGO का तो मई बताना चाहूंगा कि….
भारत सरकार के Ministry of Home Affairs के Foreigners Division की FCRA Wing के दस्तावेजों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2008-09 तक देश में कार्यरत ऐसे NGO’s की संख्या 20088 थी, जिन्हें विदेशी सहायता प्राप्त करने की अनुमति भारत सरकार द्वारा प्रदान की जा चुकी थी.इन्हीं दस्तावेजों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2006-07, 2007-08, 2008-09 के दौरान इन NGO’s को विदेशी सहायता के रुप में 31473.56 करोड़ रुपये प्राप्त हुये. इसके अतिरिक्त देश में लगभग 33 लाख NGO’s कार्यरत है.इनमें से अधिकांश NGO भ्रष्ट राजनेताओं, भ्रष्ट नौकरशाहों, भ्रष्ट सरकारी अधिकारियों, भ्रष्ट सरकारी कर्मचारियों के परिजनों,परिचितों और उनके दलालों के है. केन्द्र सरकार के विभिन्न विभागों के अतिरिक्त देश के सभी राज्यों की सरकारों द्वारा जन कल्याण हेतु इन NGO’s को आर्थिक मदद दी जाती है.एक अनुमान के अनुसार इन NGO’s को प्रतिवर्ष न्यूनतम लगभग 50,000.00 करोड़ रुपये  देशी विदेशी सहायता के रुप में प्राप्त होते हैं. इसका सीधा मतलब यह है की पिछले एक दशक में इन NGO’s को 5-6 लाख करोड़ की आर्थिक मदद मिली. ताज्जुब की बात यह है की इतनी बड़ी रकम कब.? कहा.? कैसे.? और किस पर.? खर्च कर दी गई.  इसकी कोई जानकारी उस जनता को नहीं दी जाती जिसके कल्याण के लिये, जिसके उत्थान के लिये विदेशी संस्थानों और देश की सरकारों द्वारा इन NGO’s को आर्थिक मदद दी जाती है. इसका विवरण केवल भ्रष्ट NGO संचालकों, भ्रष्ट नेताओ, भ्रष्ट सरकारी अधिकारियों, भ्रष्ट बाबुओं, की जेबों तक सिमट कर रह जाता है. भौतिक रूप से इस रकम का इस्तेमाल कहीं नज़र नहीं आता. NGO’s को मिलने वाली इतनी बड़ी सहायता राशि की प्राप्ति एवं उसके उपयोग की प्रक्रिया बिल्कुल भी पारदर्शी नही है. देश के गरीबों, मजबूरों, मजदूरों, शोषितों, दलितों, अनाथ बच्चो के उत्थान के नाम पर विदेशी संस्थानों और  देश में केन्द्र एवं राज्य सरकारों के विभिन्न सरकारी विभागों से जनता की गाढ़ी कमाई के  दसियों हज़ार करोड़ रुपये प्रतिवर्ष लूट लेने वाले NGO’s की कोई जवाबदेही तय नहीं है. उनके द्वारा जनता के नाम पर जनता की गाढ़ी कमाई के भयंकर दुरुपयोग की चौकसी एवं जांच पड़ताल तथा उन्हें कठोर दंड दिए जाने का कोई विशेष प्रावधान नहीं है. लोकपाल बिल कमेटी में शामिल सिविल सोसायटी के उन सदस्यों ने जो खुद को सबसे बड़ा ईमानदार कहते हैं और जो स्वयम तथा उनके साथ देशभर में (India Against Corruption) की मुहिम चलाने वाले उनके अधिकांश साथी सहयोगी NGO’s भी चलाते है लेकिन उन्होंने आजतक जनता के नाम पर जनता की गाढ़ी कमाई के  दसियों हज़ार करोड़ रुपये प्रतिवर्ष लूट लेने वाले NGO’s के खिलाफ आश्चार्यजनक रूप से एक शब्द नहीं बोला है, NGO’s को लोकपाल बिल के दायरे में लाने की बात तक नहीं की है.
इसलिए यह आवश्यक है की NGO’s को विदेशी संस्थानों और देश में केन्द्र एवं राज्य सरकारों के विभिन्न सरकारी विभागों से मिलने वाली आर्थिक सहायता को प्रस्तावित लोकपाल बिल  के दायरे में लाया जाए.

रविवार, 14 अगस्त 2011

मानव भ्रष्टाचार के नाम पर राजनीति कब तक !!

सभी चाहते हैं कि समाजिक जीवन भ्रष्टाचार-मुक्त हो.....किन्तु मात्र कानून बन जाने से किसी समस्या का समाधान नहीं होता। समाधान तभी होता है जब देश के नागरिकों का चारित्रिक स्तर ऊंचा होता है और कानूनों को लागू करने वालों की नीयत साफ होती है। प्रश्न उठता है कि लोकपाल के आने से शासन और प्रशासन में काबिज़ लोगों का क्या एकदम से हृदय परिवर्तित हो जायगा? भ्रष्टाचारी तत्काल सदाचारी हो जाएंगे? रातो-रात समाज अनुशासन में ढल जाएगा? ऐसा सोचना एक भारी भूल होगी। सदियों से मानव भ्रष्टाचार के नाम पर राजनीति करता चला आ रहा है। राजनीति पुरानी होती है, महिमा मंडित होती है और नए-नए रूपों में प्रगट होती है। मानव ने भ्रष्टाचार के तमाम झंखाड़ रोपे हैं। उनकी जड़ें उखाड़ी नहीं हैं। सदाचारी बनाए जाने का काम जितना आसान बच्चों पर होता है उतना बूढ़े तोतों पर नहीं होता है। भ्रष्टाचार की सफाई एक सतत चलने वाली प्रक्रिया है। कोई व्यक्ति अपने घर में एक महीने तक झाड़ू न लगाए फिर देखे घर कैसा लगता है? देश तो बहुत बड़ी चीज़ है

शनिवार, 13 अगस्त 2011

अन्ना को अब भ्रष्ट केन्द्र सरकार की बलि चाहिए

अन्‍ना हजारे ने प्रस्‍तावित अनशन के मद्देनजर देश के लोगों का आह्वान करते हुए कहा है कि देश कुर्बानी मांग रहा है. अन्‍ना ने केंद्र सरकार को ललकारते हुए कहा भ्रष्‍ट सरकार की बलि ली जाएगी.
अन्‍ना हजारे ने कहा कि देश में जनतंत्र की हत्‍या की जा रही है. उन्‍होंने कहा कि उन्‍हें मौत का डर नहीं है, अनशन तो होकर ही रहेगा. उन्‍होंने कहा कि आज करोड़ों अन्‍ना देश में सुधार लाने और भ्रष्‍टाचार को उखाड़ फेंकने के लिए तैयार हैं.
दिल्‍ली पुलिस की शर्तों के मद्देनजर अन्‍ना हजारे ने स्‍पष्‍ट किया कि जयप्रकाश पार्क में ही अनशन होगा. उन्‍होंने कहा कि समस्‍याओं का हल तीन दिन बाद निकलेगा.अन्‍ना हजार ने फिर दोहराया कि उनकी टीम के साथ धोखा हुआ है. उन्‍होंने स्‍पष्‍ट किया कि अगर उन्‍हें गिरफ्तार किया गया, तो वे छूटने के बाद बार-बार अनशन पर बैठेंगे.
टीम अन्‍ना के सदस्‍य शांति भूषण ने कहा कि वे केंद्र सरकार की तानाशाही के आगे नहीं झुकेंगे. उन्‍होंने कहा कि देश में संवैधानिक अधिकारों का हनन हो रहा है.
किरण बेदी ने कहा कि दिल्‍ली पुलिस की शर्तों के पीछे कोई और है. अनशन के लिए जैसी शर्तें दिल्‍ली पुलिस रख रही है, वैसी शर्तें कोई भी प्रोफेशनल पुलिस नहीं रखती है. उन्‍होंने यह भी जोड़ा कि ऐसी शर्तें वही पुलिस रख सकती है, जो आजाद न हो. बहरहाल, देश की जनता अन्‍ना हजारे के अनशन की ओर टकटकी लगाए देख रही है.

मंगलवार, 9 अगस्त 2011

मेरी आर्मी सर्विस और संगठन के रिकार्ड खंगाल रही है सरकारः अन्ना हजारे

 गांधीवादी विचारक अन्ना हजारे ने कहा है कि सरकार उन्हें  बदनाम करने एवं भ्रष्टाचार विरोधी अभियान को धूमिल करने के लिए मेरे बारे में जानकारियां जुटा रही है। उनके आर्मी के सर्विस रिकॉर्ड को खंगाला जा रहा है। कुछ लोगों को गांव भेजकर उनके संगठन को टटोला जा रहा है।
15 साल तक सेना में रहे अन्ना ने कहा कि उन्हें दिल्ली पुलिस ने अब तक अनशन की अनुमति नहीं दी है। वे लाठी, गोली खाने को भी तैयार है,लेकिन अपनी ओर से किसी पर हाथ नहीं उठाएंगे।
यदि उन्हें अनुमति नहीं दी गई और जेल में डाल दिया तो वे वहां रहकर भी अनशन करेंगे। भ्रष्टाचार विरोधी अभियान को यूं ही खत्म नहीं होने देंगे। 

 उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार की वजह से महंगाई और मुद्रास्फीति बढ़ रही है। भ्रष्टाचार को भले ही हम पूरी तरह खत्म नहीं कर सकते। लेकिन 80 से 10 प्रतिशत तक दबा सकते हैं। जन लोकपाल बिल की वकालत करते हुए अन्ना ने कहा कि भ्रष्टाचार के दोषी अधिकारी को उम्रकैद जैसी कड़ी सजा का प्रावधान हो। इसके साथ ही यदि संभव हो तो फांसी पर लटका दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के दोषी व्यक्ति की संपत्ति जब्त करने का प्रावधान होना चाहिए। अन्ना ने कहा कि कार्यालयों के बाहर उसके सामाजिक दायित्वों को बोर्ड पर लिखा जाना चाहिए।
यह भी बोले हजारे
जो सरकार में है, उनकी मंशा भ्रष्टाचार मुक्त भारत बनाने की नहीं है।
हम समानांतर सरकार नहीं बनाना चाहते बल्कि सिर्फ स्वायत्त जन लोकपाल मांग रहे हैं।
सभी कार्यालयों को लोकपाल के दायरे में लाया जाना चाहिए।
जब आयकर अधिकारी प्रधानमंत्री सहित किसी के खिलाफ भी जांच कर सकता है तो लोकपाल क्यों नहीं।
जब सांसद संसद में सवाल पूछने के पैसे लेते हैं तो इस देश को हो क्या रहा है।
सीबीआई पर सरकारी नियंत्रण है। इसी वजह से उतने अफसरों और मंत्रियों को जेल नहीं हुई, जितनी होनी थी।



500 कार सवारों के साथ अन्ना ने किया “आजादी की दूसरी लड़ाई” का शंखनाद

भ्रष्टाचार के खिलाफ देशभर में मुहिम छेड़ने वाले समाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने मंगलवार को मुम्बई में 500 कारों पर सवार करीब 2,000 लोगों के साथ अपनी रैली की शुरुआत की।
मुम्बई के मशहूर डब्बावालों के अलावा स्कूलों के सैकड़ों छात्रों ने इस
रैली में हिस्सा लिया। अन्ना हजारे की रैली सेंट्रल मुम्बई के दादर से होकर दक्षिण में आजाद मैदान तक निकाली गई। इंडिया अगेंस्ट करप्शन के एक अधिकारी ने बताया कि रात में अन्ना हजारे के नेतृत्व में एक मशाल जूलूस भी निकाला जाएगा।
मजबूत जनलोकपाल विधेयक की मांग को लेकर रैली में शामिल लोगों ने जमकर
नारेबाजी की। रैली में शामिल लोगों ने अन्ना हजारे को पूरा समर्थन दिया। अन्ना हजारे सरकार के लोकपाल विधेयक के मसौदे को लेकर अपनी नाखुशी जाहिर कर चुके हैं।

शनिवार, 6 अगस्त 2011

जंतर-मंतर के बजाय अब रामलीला मैदान में होगी "अन्ना की लीला"

देश की नजरें 16 अगस्त पर.......
लोकपाल विधेयक के सरकारी मसौदे के खिलाफ आगामी 16 अगस्त से जंतर-मंतर पर आमरण अनशन करने की घोषणा कर चुके वरिष्ठ सामाजिक कायकर्ता अन्ना हजारे अपना अनशन रामलीला मैदान में कर सकते हैं।
जन लोकपाल विधेयक का समर्थन करने वाले गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) परिवर्तन की सदस्य अस्वथी मुरलीधरन ने कहा, "हजारे 16 अगस्त से जंतर-मंतर
के बजाय रामलीला मैदान पर आमरण अनशन पर बैठेंगे। हमें पहले ही दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) से अनापत्ति प्रमाणपत्र मिल चुका है।" उन्होंने कहा कि इस स्थान पर अनशन करने की अनुमति दिल्ली पुलिस भी देने वाली है।

पांच राष्ट्रीय भ्रम और उनकी वास्तविकताएं

योग गुरु बाबा रामदेव के अनुसार पांच राष्ट्रीय भ्रम और उनकी वास्तविकताएं हैं। वेशक आज उसकी गहराइयों को भी समझने के प्रयास किए जाने चाहिए।
1. भारत एक गरीब देश है!
2. भारत मे लगभग 5 फीसदी लोग ही टैक्स भरते हैं!
3. सब लोग बेईमान हैं!
4. भ्रष्टाचार नही मिट सकता, भ्रष्टाचारी ही देश पर शासन करेंगें!
5. विदेशी पूंजी निवेश के बिना देश मे विकास एवं रोजगार सम्भव ही नहीं
! .....आगे पढ़े