मेरे दोस्तों की तो काफी लम्बी लिस्ट है, लेकिन मैं आज एक खास दोस्त के बारे में बताऊंगा जिसे मैं इस दिन बहुत मिस करता हूँ। बात १९९३-९३ की है। उस समय मैं थर्ड क्लास में गाव के सबसे अच्छे स्कूल बाल विकाश विद्यालय में पड़ता था। मेरे क्लास में लड़का - लड़की तो बहुत पढते थे। लेकिन उसमे मेरी एक खास दोस्त थी जिसका नाम था, "तन्मीर जहाँ " बड़ा अच्छा नाम था। वो गावं के थाने के बड़ा बाबु की बेटी थी। उसके नाम से ही लग रहा होगा की कोई सहजादी होगी। और सही में वो सहजादी ही थी सिर्फ देखने में ही नहीं बल्कि बात करने और सभी मामले में। दोनों साथ में खेलते कूदते थे लेकिन अचानक एक दिन पता चला की उसके पापा जी का ट्रान्सफर हो गया और वो जाने लगी, तभी तो संचार क्रांति नहीं था और न ही मेरे घर में फ़ोन था। और वो जहाँ जा रही थी उसका नंबर भी नहीं था। बस ४ साल की दोस्ती मैं हमेशा याद करता हूँ। और उसे खोजने की कोशिस करता हूँ। फसेबूक की आबादी भी इतनी बढ गयी है इसीलिए सोचा शायद वो इस पर हो इसीलिए किसी को मालूम हो उसके बारे में तो जरुर बताएं । "हैप्पी फ्रेंडशिप डे तन्नु"
@सन्नी शरद
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मंगलवार, 2 अगस्त 2011
फ्रेंडशिप डे मनाइये जरा संभलकर
@सन्नी शरद
हर साल भारत में फ्रेंडशिप डे (यानि कि सिर्फ और सिर्फ दोस्ती का दिन) मानाने की एक नई परम्परा का आगाज हुआ है। अब ये कहाँ तक सही है और कहाँ तक गलत है, ये बहस का मुद्दा हो सकता है। हर कोई इसे अपने अंदाज में देखता है और इसके रंग में मगन हो जाता है। कोई इसे अच्छा कहता है तो कोई लाठी और डंडा लेकर इसका विरोध करता है।
आज के इस गला काट प्रतियोगिता के युग में दोस्ती का ये जो नया संस्करण हुआ है मुझे तो बड़ा भाता है। इस प्रतियोगितावादी जिंदगी में तिल और तंडुल के चक्कर में आज हम सभी पिसते चले जा रहे हैं और अपनों से दूर चले जा रहे हैं। रात को देर तक जागना और सुबह होते ही बॉस का फ़ोन आना और बिना नहाये ऑफिस भागना। बस आज हमारी जिंदगी यहीं तक सीमीत हो गयी है। तनाव, ब्लड प्रेसर बढ रहा है। सुबह का नास्ता दोपहर को और दोपहर का रात को भी करने की भी फुर्सत नहीं मिल रही है. ज्यादातर लोग ६० से पहले ही जिंदगी से रिटाएर हो जा रहे हैं। ऐसी जिंदगी में यदि लोग दो पल खुशी का मना ले तो इसमें क्या हर्ज़ है।
शाहरुख़ खान ने एक फिल्म में कहा है की एक लड़का और लड़की कभी दोस्त हो ही नहीं सकते हैं. और अब लोग भी कहते हैं फ्रेंडशिप का मतलब अब वल्गर हो गया है। ये अब सिर्फ लडको और लड़कियों में ही जयादा होता है। लेकिन ये गलत बात है। आज भी अपने आप में आधी दुनिया को समाने वाला फेसबुक इस बात का गवाह है की दोस्तों के मन में दोस्ती अभी जिन्दा है. फेसबुक पर कई ऐसी बात पड़ने को मिलेगी जिसमे कोई अपनी जिंदगी में कुछ हांसिल करके अपने बचपन के दोस्त को खोज रहा है।
दिल ढूंढता है फिर वही फुरसत के एक पल....
हर साल भारत में फ्रेंडशिप डे (यानि कि सिर्फ और सिर्फ दोस्ती का दिन) मानाने की एक नई परम्परा का आगाज हुआ है। अब ये कहाँ तक सही है और कहाँ तक गलत है, ये बहस का मुद्दा हो सकता है। हर कोई इसे अपने अंदाज में देखता है और इसके रंग में मगन हो जाता है। कोई इसे अच्छा कहता है तो कोई लाठी और डंडा लेकर इसका विरोध करता है।
आज के इस गला काट प्रतियोगिता के युग में दोस्ती का ये जो नया संस्करण हुआ है मुझे तो बड़ा भाता है। इस प्रतियोगितावादी जिंदगी में तिल और तंडुल के चक्कर में आज हम सभी पिसते चले जा रहे हैं और अपनों से दूर चले जा रहे हैं। रात को देर तक जागना और सुबह होते ही बॉस का फ़ोन आना और बिना नहाये ऑफिस भागना। बस आज हमारी जिंदगी यहीं तक सीमीत हो गयी है। तनाव, ब्लड प्रेसर बढ रहा है। सुबह का नास्ता दोपहर को और दोपहर का रात को भी करने की भी फुर्सत नहीं मिल रही है. ज्यादातर लोग ६० से पहले ही जिंदगी से रिटाएर हो जा रहे हैं। ऐसी जिंदगी में यदि लोग दो पल खुशी का मना ले तो इसमें क्या हर्ज़ है।
शाहरुख़ खान ने एक फिल्म में कहा है की एक लड़का और लड़की कभी दोस्त हो ही नहीं सकते हैं. और अब लोग भी कहते हैं फ्रेंडशिप का मतलब अब वल्गर हो गया है। ये अब सिर्फ लडको और लड़कियों में ही जयादा होता है। लेकिन ये गलत बात है। आज भी अपने आप में आधी दुनिया को समाने वाला फेसबुक इस बात का गवाह है की दोस्तों के मन में दोस्ती अभी जिन्दा है. फेसबुक पर कई ऐसी बात पड़ने को मिलेगी जिसमे कोई अपनी जिंदगी में कुछ हांसिल करके अपने बचपन के दोस्त को खोज रहा है। दोस्त कोई भी किसी का हो सकता है। यहाँ तक आज एक पिता जी भी अपने बेटे के साथ दोस्त जैसा वैव्हार रखते हैं। ताकि उनका बेटा क्या कर रहा है ये उन्हें पता चल सके।
मेरी नज़र में फ्रेंडशिप डे मनाने के फायदे:
मेरी नज़र में फ्रेंडशिप डे मनाने के फायदे:
· दोस्त को समय देने का एकलौता पर्व।
· दोस्तों को याद करने का अच्छा मौका।
· दोस्तों के साथ समय बिताने का अच्छा बहाना।
· उन दोस्तों को भी याद करने का अच्छा मौका जिनसे छोटी - मोटी बात पर जगडा हुआ हो।
· इसमें दोस्त अपने दोस्त को कार्ड और फूल देते हैं, ऐसे में ऐसे में कार्ड और फूल वाले को
रोजगार मिलता है।
· किसी कैंटीन या ढाबे में गए तो उस दुकान वाले को फायदा।
· भूले बिछड़े दोस्तों को याद करने और उन्हें खोजने का अच्छा मौका।
· ऑफिस से छुट्टी लेने का एक अच्छा बहाना।
· इसी बहाने कई और नए दोस्त बन जाती हैं।
· सभी ढाबे और पार्क वाले का बल्ले बल्ले।
फ्रेंडशिप डे मनाने की हानियाँ:
· अपनी संस्कृति को भूलते जाना और पश्चिमी संस्कृति को अपनाना।
· इम्पोर्टेड गिफ्ट दोस्तों को देना। न की देश में गरीबों द्वारा बनाया गया गिफ्ट देना।
· लडको द्वारा लड़की का इस दिन का गलत फायदा उठाना।
· लड़की के लिए आज का दिन बुरा क्यूंकि घरवाले घर से निकलने नहीं देते हैं।
निष्कर्ष: दोस्ती के लगभग सभी पहलु को मैंने आज के परिदृश को देखते हुए दर्शाया है। वैसे मुझे ये अच्छा लगता है क्यूंकि इस पर्व में सभी दोस्त एक जगह मिल कर मस्ती करते हैं। और अपना हाले दिल एक दुसरे से बायाँ करते हैं।
बुधवार, 27 जुलाई 2011
बाबा रामदेव पर आया राखी सावंत का दिल, शादी की ईच्छा जताई
अपने तौर तरीकों से हमेशा चर्चा में बनी रहने वाली प्रसिद्ध टीवी और सिने अभिनेत्री राखी सावंत ने कहा है कि अगर योग गुरु बाबा रामदेव उनसे शादी करने की हामी भरते हैं तो वे उनके साथ सात फेरे लेने को तैयार हैं।
राखी ने कहा कि पहले वे राहुल गांधी के साथ विवाह करना चाहती थीं, लेकिन बाद में उन्हें समझ में आ गया कि राहुल की मां सोनिया गांधी के सामने उनकी दाल नहीं गलेगी। अब राहुल से मोहभंग हो गया है और उनका दिल बाबा रामेदव पर आ गया है। वे बाबा के साथ सात जन्मों के अटूट बंधन में बंधने के मूड में हैं।
राखी सावंत ने कहा कि उन्होंने एक टीवी चैनल से आग्रह किया है कि उन्हें और बाबा रामदेव को लेकर एक रियलिटी शो तैयार किया जाए, जिसमें उनका स्वंयवर रचा जाए और केवल बाबा रामदेव ही इस स्वयंवर में हिस्सा लें।(भाषा)
शुक्रवार, 8 जनवरी 2010
कानून से उपर है संत आशाराम बापू ?
इन दिनो संत आशाराम बापू सुर्खियो मे है.उन कारणो मे मै नही जाना चाहता हूँ.लेकिन गौर से पढिये एक अखबार मे प्रकाशित इस समाचार को.इसे पढने के बाद आप खुद महसूस करेगे कि क्या एक संत को इस तरह का अहंकारी विचारधारा पालनी चाहिये? खासकर भारत जैसे विश्व के सबसे बडे लोकतांत्रिक देश मे उन्हें कानून से उपर माननी चाहिये.क्या उन्हें गिरफ्तार करने पर सरकार तक गिर जायेगी.गुरुवार, 7 जनवरी 2010
राजनीति मे सब अपना है रे भाई!
झारखंड राज्य के मुख्यमंत्री शिबू सोरेन कुर्सी पर बैठते ही अपने तेवर काफी बदल लिये है. हर कोई उन्हें दोस्त नज़र आता है.गौर से देखिये गुरूजी और उनके साथ खडे जदयू विधायक गोपालक्रिष्ण पातर उर्फ राजा पीटर को विधानसभा मे 25 वनाम 45 की बहुमत हासिल करने के बाद विजयी मुद्रा मे. राजा पीटर वही युवा शख्स है जिसने तमाड विधानसभा उपचुनाव मे वतौर निर्दलीय तात्कालीन मुख्यमंत्री शिबू सोरेन को करीव 20 हजार मतो के अंतर चुनाव हराया था और श्री सोरेन को मुख्यमंत्री के पद से हटना पडा था. दोनो के साथ होने के सवाल पर गुरूजी ने बडे दार्शनिक अन्दाज मे कहा कि "राजनीति मे सब चलता है रे भाई."सोमवार, 28 दिसंबर 2009
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