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मंगलवार, 9 अगस्त 2011

झारखंडी पत्रकारिता के बाबा की निगरानी के बाद भी दैनिक सन्मार्ग की ये हालत!

हाल ही में राज्य सूचना आयुक्त के पद से सेवा निवृत हुए वरिष्ठ पत्रकार बैजनाथ मिश्र झारखंड की पत्रकारिता के बाबा कहे जाते हैं।उनकी मांग का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने अपनी सेवानिवृति के दूसरे दिन ही रांची से प्रकाशित दैनिक सन्मार्ग के प्रधान संपादक बन गए।लोगों को उनसे काफी उम्मीदें थी,लेकिन अखबार की हालत सुधरने के बजाय और बिगड़ती जा रही है।इसका एक ताजा बानगी आप देख सकते हैं कि संपादकीय पेज पर प्रसुन्न वाजपेयी जी के शीर्ष आलेख का शीर्षक क्या है।ऐसी गलतियां अखबार के सभी पृष्ठों पर नित्य दिन बहुतयात देखने को मिल रहे हैं।
इस अखबार के संपादक हैं..पत्रकारिता से कोसों दूर प्रेम उर्फ प्रेमशंकरण,जो पेशे से बिल्डर व्यवसायी हैं।इस अखबार में एक बात और काबिलेगौर दिख रही है कि प्रिंट लाइन में संपादक के बजाय प्रधान संपादक महोदय पीआरबी अधिनियम के तहत खबरों के चयन के जिम्मेवार बताये गए हैं।

सोमवार, 1 अगस्त 2011

कम से कम कॉल तो कर लो पत्रकारिता के निकम्मों !!

हर जगह रिज्यूम  देकर आ गया, लेकिन कहीं से कोई सुगबुगाहट नहीं है। रिज्यूम में साफ-साफ लिखा है कि मैं न्यूज़ रूम साफ्टवेयर पर काम करना अच्छी तरह से जानता हूँ। स्क्रिप्टिंग भी काफी अच्छी कर लेता हूँ।  साथ-साथ हर वो काम करना जानता हूँ,जो कि एक न्यूज़ चैनल की प्रोडक्शन टीम में होता है। फिर भी किसी अंधे को दिखता क्यों नहीं कि जिसने भी अपना रिज्यूम दिया है और उसमें लिखा क्या है। किसी के अन्दर ईमानदारी नाम की कोई चीज़ नहीं है। सब जानते है कि किस को कब और कैसे काम पर रखना है। मेरे पास लगभग हर चीज़ है पर फिर भी किसी जगह से कॉल क्यों नहीं आती है ! कारण है कि मेरे पास मीडिया में काम करने के लिए सबसे जरूरी क्वालिटी सिफारिश नही है।
कई ऐसे लोग हैं, जिनको ढंग से हिंदी टाइपिंग भी नहीं आती है और वह शहर के नामी गिरामी चैनलों में काफी अच्छी जगहों पर काम कर रहे हैं। उनमें से कुछ  नाम तो ऐसे है जिन्हें कुछ भी नहीं आता और जब भी मुझसे मिलते है तो कुछ ना  कुछ पूछते ही हैं। अब ऐसे लोग कैसे बहाल हो गये, किसी के पास है इस बात का जवाब ! जवाब हर वो इंसान जानता है जो इस क्षेत्र से जुड़ा हुआ है।
अगर मेरे पास किसी की सिफारिश नहीं है, किसी की पैरवी नहीं है तो इसमे मेरा क्या दोष है! मैं जानता हूं कि मै किस काम को ज्यादा अच्छे से कर सकता हूँ। मेरा कहने का सिर्फ इतना ही मकसद है कि जो अपना रिज्यूम कहीं जमा करते हैं तो उनलोगों को चाहिये कि जो उसने लिखा है वो सही है या नहीं,उसकी जाँच तो कर लें। पर कोई ये ज़हमत उठाना नहीं चाहता,क्योंकि उनके रिज्यूम पर किसी का रेफरेंस नहीं लिखा होता है।
इस बात का उदाहरण है पटना का एक बहुत बड़ा अख़बार, जोकि अपने आप को सबसे बड़ा अख़बार बताता है। उसमें परीक्षा आयोजित कि गई थी। मैं और मेरे कुछ मित्र परीक्षा देने के लिए बड़े मन से तैयारी कर के गये थे। परीक्षा शुरू हुई। अचानक हमने सुना कि जो लोग वहाँ बैठे थे। निरीक्षण करने के लिए उनमें वो महोदया भी बैठी थी, जो कि वहाँ की एचआर थीं और उनकी देखरेख में हीं चयन की सारी प्रक्रिया सम्पन्न होनी थी। ख़ुद वह बोल रही थी कि “क्या बेकार में परीक्षा का आयोजन किया है जबकि पहले से ही सारी सीटें बुक हो चुकी हैं”।
इस बात से क्या पता चलता है यही कि जहां भी जाओ वहां प्रत्यक्ष रूप से तो नहीं, पर परोक्ष रूप से नो वैकेंसी  की तख्ती अन्दर से लगी रहती है। यदि किसी बाहर के आदमी को रखना हीं नहीं है तो साफ-साफ क्यों नहीं एक तख्ती पर लिख कर टांग देते कि यहां केवल सिफारिश वालों को ही रखा जाता है।
शिकायत है कि अगर आप के यहाँ कोई अपना रिज्यूम जमा करता है तो कम से कम उसको बुलाकर यह तो जांच कर लो कि वह जो दावे कर रहा है,उसमें कितनी सच्चाई है। यदि उसके बाद लगे कि वह किसी काम का नहीं है तो उसे बाहर का रास्ता दिखा दो । कम से कम कॉल तो करो।

रविवार, 31 जुलाई 2011

जी हां,ये हैं भारतीय मीडिया के खेवनहार या खिचड़ी परिवार

मीडिया दो तबके के ही लोगों के लिए है। एक तो आर्थिक रुप से बहुत कमजोर…और दूसरा जो आर्थिक तौर पर मजबूत है और तीसरा तबका जो मध्यवर्गीय है, जो मीडिया में तो आ जाता है, लेकिन अपने को भंवर में फंसा महसूस करता है
इसका राज है...
अरुंधती रॉय, प्रणय रॉय (नेहरु डायनेस्टी टीवी- NDTV) की भांजी हैं।
-प्रणय रॉय “काउंसिल ऑन फ़ॉरेन रिलेशन्स” के इंटरनेशनल सलाहकार बोर्ड के सदस्य हैं।
-इसी बोर्ड के एक अन्य सदस्य हैं मुकेश अम्बानी।
-प्रणय रॉय की पत्नी हैं राधिका रॉय।
-राधिका रॉय, वृन्दा करात की बहन हैं।
-वृन्दा करात, प्रकाश करात (CPI) की पत्नी हैं।
-प्रकाश करात चेन्नै के “डिबेटिंग क्लब” के सदस्य थे।
-एन राम, पी चिदम्बरम और मैथिली शिवरामन भी इस ग्रुप के सदस्य थे।
-इस ग्रुप ने एक पत्रिका शुरु की थी “रैडिकल रीव्यू”।
-CPI(M) के एक वरिष्ठ नेता सीताराम येचुरी की पत्नी हैं सीमा चिश्ती।
-सीमा चिश्ती इंडियन एक्सप्रेस की “रेजिडेण्ट एडीटर” हैं।
-बरखा दत्त NDTV में काम करती हैं।
-बरखा दत्त की माँ हैं श्रीमती प्रभा दत्त।
-प्रभा दत्त हिन्दुस्तान टाइम्स की मुख्य रिपोर्टर थीं।
-राजदीप सरदेसाई पहले NDTV में थे, अब CNN-IBN के हैं
-राजदीप सरदेसाई की पत्नी हैं सागरिका घोष।
-सागरिका घोष के पिता हैं दूरदर्शन के पूर्व महानिदेशक भास्कर घोष।
-सागरिका घोष की आंटी रूमा पॉल हैं।
-रूमा पॉल उच्चतम न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश हैं।
-सागरिका घोष की दूसरी आंटी अरुंधती घोष हैं।
-अरुंधती घोष संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थाई प्रतिनिधि हैं।
-CNN-IBN का “ग्लोबल बिजनेस नेटवर्क” (GBN) से व्यावसायिक समझौता है।
-GBN टर्नर इंटरनेशनल और नेटवर्क-18 की एक कम्पनी है।
-NDTV भारत का एकमात्र चैनल है को “अधिकृत रूप से” पाकिस्तान में दिखाया जाता है।
-दिलीप डिसूज़ा PIPFD (Pakistan-India Peoples’ Forum for Peace and Democracy) के सदस्य हैं।
-दिलीप डिसूज़ा के पिता हैं जोसेफ़ बेन डिसूज़ा।
-जोसेफ़ बेन डिसूज़ा महाराष्ट्र सरकार के पूर्व सचिव रह चुके हैं।
-तीस्ता सीतलवाड़ भी PIPFD की सदस्य हैं।
-तीस्ता सीतलवाड़ के पति हैं जावेद आनन्द।
-जावेद आनन्द एक कम्पनी सबरंग कम्युनिकेशन और एक संस्था “मुस्लिम फ़ॉर सेकुलर डेमोक्रेसी” चलाते हैं।
-इस संस्था के प्रवक्ता हैं जावेद अख्तर।
-जावेद अख्तर की पत्नी हैं शबाना आज़मी।
-करण थापर ITV के मालिक हैं।
-ITV बीबीसी के लिये कार्यक्रमों का भी निर्माण करती है।
-करण थापर के पिता थे जनरल प्राणनाथ थापर (1962 का चीन युद्ध इन्हीं के नेतृत्व में हारा गया था)।
-करण थापर मरहूम बेनज़ीर भुट्टो और ज़रदारी के बहुत अच्छे मित्र रहे हैं।
-करण थापर के मामा की शादी नयनतारा सहगल से हुई है।
-नयनतारा सहगल, विजयलक्ष्मी पंडित की बेटी हैं।
-विजयलक्ष्मी पंडित, जवाहरलाल नेहरू की बहन हैं।
-मेधा पाटकर नर्मदा बचाओ आन्दोलन की मुख्य प्रवक्ता और कार्यकर्ता हैं।
-नबाआं को मदद मिलती है पैट्रिक मेकुल्ली से जो कि “इंटरनेशनल रिवर्स नेटवर्क (IRN)” संगठन में हैं।
-अंगना चटर्जी IRN की बोर्ड सदस्या हैं।
-अंगना चटर्जी PROXSA (Progressive South Asian Exchange Network) की भी सदस्या हैं।
-PROXSA संस्था, FOIL (Friends of Indian Leftist) से पैसा पाती है।
-अंगना चटर्जी के पति हैं रिचर्ड शेपायरो।
-FOIL के सह-संस्थापक हैं अमेरिकी वामपंथी बिजू मैथ्यू।
-राहुल बोस (अभिनेता) खालिद अंसारी के रिश्ते में हैं।
-खालिद अंसारी “मिड-डे” पब्लिकेशन के अध्यक्ष हैं।
-खालिद अंसारी एमसी मीडिया लिमिटेड के भी अध्यक्ष हैं।
-खालिद अंसारी, अब्दुल हमीद अंसारी के पिता हैं।
-अब्दुल हमीद अंसारी कांग्रेसी हैं।
-एवेंजेलिस्ट ईसाई और हिन्दुओं के खास आलोचक जॉन दयाल मिड-डे के दिल्ली संस्करण के प्रभारी हैं।
-नरसिम्हन राम (एन राम) दक्षिण के प्रसिद्ध अखबार “द हिन्दू” के मुख्य सम्पादक हैं।
-एन राम की पहली पत्नी का नाम है सूसन।
-सूसन एक आयरिश हैं जो भारत में ऑक्सफ़ोर्ड पब्लिकेशन की इंचार्ज हैं।
-विद्या राम, एन राम की पुत्री हैं, वे भी एक पत्रकार हैं।
-एन राम की हालिया पत्नी मरियम हैं।
-त्रिचूर में आयोजित कैथोलिक बिशपों की एक मीटिंग में एन राम, जेनिफ़र अरुल और केएम रॉय ने भाग लिया है।
-जेनिफ़र अरुल, NDTV की दक्षिण भारत की प्रभारी हैं।
-जबकि केएम रॉय “द हिन्दू” के संवाददाता हैं।
-केएम रॉय “मंगलम” पब्लिकेशन के सम्पादक मंडल सदस्य भी हैं।
-मंगलम ग्रुप पब्लिकेशन एमसी वर्गीज़ ने शुरु किया है।
-केएम रॉय को “ऑल इंडिया कैथोलिक यूनियन लाइफ़टाइम अवार्ड” से सम्मानित किया गया है।
-“ऑल इंडिया कैथोलिक यूनियन” के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं जॉन दयाल।
-जॉन दयाल “ऑल इंडिया क्रिश्चियन काउंसिल”(AICC) के सचिव भी हैं।
-AICC के अध्यक्ष हैं डॉ जोसेफ़ डिसूज़ा।
-जोसेफ़ डिसूज़ा ने “दलित फ़्रीडम नेटवर्क” की स्थापना की है।
-दलित फ़्रीडम नेटवर्क की सहयोगी संस्था है “ऑपरेशन मोबिलाइज़ेशन इंडिया” (OM India)।
-OM India के दक्षिण भारत प्रभारी हैं कुमार स्वामी।
-कुमार स्वामी कर्नाटक राज्य के मानवाधिकार आयोग के सदस्य भी हैं।
-OM India के उत्तर भारत प्रभारी हैं मोजेस परमार।
-OM India का लक्ष्य दुनिया के उन हिस्सों में चर्च को मजबूत करना है, जहाँ वे अब तक नहीं पहुँचे हैं।
-OMCC दलित फ़्रीडम नेटवर्क (DFN) के साथ काम करती है।
-DFN के सलाहकार मण्डल में विलियम आर्मस्ट्रांग शामिल हैं।
-विलियम आर्मस्ट्रांग, कोलोरेडो (अमेरिका) के पूर्व सीनेटर हैं और वर्तमान में कोलोरेडो क्रिश्चियन यूनिवर्सिटी के प्रेसीडेण्ट हैं। यह यूनिवर्सिटी विश्व भर में ईसा के प्रचार हेतु मुख्य रणनीतिकारों में शुमार की जाती है।
-DFN के सलाहकार मंडल में उदित राज भी शामिल हैं।
-उदित राज के जोसेफ़ पिट्स के अच्छे मित्र भी हैं।
-जोसेफ़ पिट्स ने ही नरेन्द्र मोदी को वीज़ा न देने के लिये कोंडोलीज़ा राइस से कहा था।
-जोसेफ़ पिट्स “कश्मीर फ़ोरम” के संस्थापक भी हैं।
-उदित राज भारत सरकार के नेशनल इंटीग्रेशन काउंसिल (राष्ट्रीय एकता परिषद) के सदस्य भी हैं।
-उदित राज कश्मीर पर बनी एक अन्तर्राष्ट्रीय समिति के सदस्य भी हैं।
-सुहासिनी हैदर, सुब्रह्मण्यम स्वामी की पुत्री हैं।
-सुहासिनी हैदर, सलमान हैदर की पुत्रवधू हैं।
-सलमान हैदर, भारत के पूर्व विदेश सचिव रह चुके हैं, चीन में राजदूत भी रह चुके हैं।
-रामोजी ग्रुप के मुखिया हैं रामोजी राव।
-रामोजी राव “ईनाडु” (सर्वाधिक खपत वाला तेलुगू अखबार) के संस्थापक हैं।
-रामोजी राव ईटीवी के भी मालिक हैं।
-रामोजी राव चन्द्रबाबू नायडू के परम मित्रों में से हैं।
-डेक्कन क्रॉनिकल के चेयरमैन हैं टी वेंकटरमन रेड्डी।
-रेड्डी साहब कांग्रेस के पूर्व राज्यसभा सदस्य हैं।
-एमजे अकबर डेक्कन क्रॉनिकल और एशियन एज के सम्पादक हैं।
-एमजे अकबर कांग्रेस सांसद भी रह चुके हैं।
-एमजे अकबर की पत्नी हैं मल्लिका जोसेफ़।
-मल्लिका जोसेफ़, टाइम्स ऑफ़ इंडिया में कार्यरत हैं।
-वाय सेमुअल राजशेखर रेड्डी आंध्र-प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं।
-सेमुअल रेड्डी के पिता राजा रेड्डी ने पुलिवेन्दुला में एक डिग्री कालेज व एक पोलीटेक्नीक कालेज की स्थापना की।
-सेमुअल रेड्डी ने कहा है कि आंध्रा लोयोला कॉलेज में पढ़ाई के दौरान वे इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने उक्त दोनों कॉलेज लोयोला समूह को दान में दे दिये।
-सेमुअल रेड्डी की बेटी हैं शर्मिला।
-शर्मिला की शादी हुई है “अनिल कुमार” से। अनिल कुमार भी एक धर्म-परिवर्तित ईसाई हैं जिन्होंने “अनिल वर्ल्ड एवेंजेलिज़्म” नामक संस्था शुरु की और वे एक सक्रिय एवेंजेलिस्ट (कट्टर ईसाई धर्म प्रचारक) हैं।
-सेमुअल रेड्डी के पुत्र जगन रेड्डी युवा कांग्रेस नेता हैं।
-जगन रेड्डी “जगति पब्लिकेशन प्रा. लि.” के चेयरमैन हैं।
-भूमना करुणाकरा रेड्डी, सेमुअल रेड्डी की करीबी हैं।
-करुणाकरा रेड्डी, तिरुमला तिरुपति देवस्थानम की चेयरमैन हैं।
-चन्द्रबाबू नायडू ने आरोप लगाया था कि “लैंको समूह” को जगति पब्लिकेशन्स में निवेश करने हेतु दबाव डाला गया था।
-लैंको कम्पनी समूह, एल श्रीधर का है।
-एल श्रीधर, एल राजगोपाल के भाई हैं।
-एल राजगोपाल, पी उपेन्द्र के दामाद हैं।
-पी उपेन्द्र केन्द्र में कांग्रेस के मंत्री रह चुके हैं।
-सन टीवी चैनल समूह के मालिक हैं कलानिधि मारन
-कलानिधि मारन एक तमिल दैनिक “दिनाकरन” के भी मालिक हैं।
-कलानिधि के भाई हैं दयानिधि मारन।
-दयानिधि मारन केन्द्र में संचार मंत्री थे।
-पत्रकार एन राम की भतीजी की शादी दयानिधि मारन से हुई है।
-दयानिधि और कलानिधि मारन के पिता थे मुरासोली मारन।
-मुरासोली मारन के चाचा हैं एम करुणानिधि (तमिलनाडु के मुख्यमंत्री)।
-करुणानिधि ने “कैलाग्नार टीवी” का उदघाटन किया।
-कैलाग्नार टीवी के मालिक हैं एम के अझागिरी।
-एम के अझागिरी, करुणानिधि के पुत्र हैं।
-करुणानिधि के एक और पुत्र हैं एम के स्टालिन।
-स्टालिन का नामकरण रूस के नेता के नाम पर किया गया।
-कनिमोझि, करुणानिधि की पुत्री हैं, और केन्द्र में राज्यमंत्री हैं।
-कनिमोझी, “द हिन्दू” अखबार में सह-सम्पादक भी हैं।
-कनिमोझी के दूसरे पति जी अरविन्दन सिंगापुर के एक जाने-माने व्यक्ति हैं।
-स्टार विजय एक तमिल चैनल है।
-विजय टीवी को स्टार टीवी ने खरीद लिया है।
-स्टार टीवी के मालिक हैं रूपर्ट मर्डोक।
-Act Now for Harmony and Democracy (अनहद) की संस्थापक और ट्रस्टी हैं शबनम हाशमी।
-शबनम हाशमी, गौहर रज़ा की पत्नी हैं।
-“अनहद” के एक और संस्थापक हैं के एम पणिक्कर।
-के एम पणिक्कर एक मार्क्सवादी इतिहासकार हैं, जो कई साल तक ICHR में काबिज रहे।
-पणिक्कर को पद्मभूषण भी मिला।
-हर्ष मन्दर भी “अनहद” के संस्थापक हैं।
-हर्ष मन्दर एक मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं।
-हर्ष मन्दर, अजीत जोगी के खास मित्र हैं।
-अजीत जोगी, सोनिया गाँधी के खास हैं क्योंकि वे ईसाई हैं और इन्हीं की अगुआई में छत्तीसगढ़ में जोर-शोर से धर्म-परिवर्तन करवाया गया और बाद में दिलीपसिंह जूदेव ने परिवर्तित आदिवासियों की हिन्दू धर्म में वापसी करवाई।
-कमला भसीन भी “अनहद” की संस्थापक सदस्य हैं।
-फ़िल्मकार सईद अख्तर मिर्ज़ा “अनहद” के ट्रस्टी हैं।
-मलयालम दैनिक “मातृभूमि” के मालिक हैं एमपी वीरेन्द्रकुमार
-वीरेन्द्रकुमार जद(से) के सांसद हैं (केरल से)
-केरल में देवेगौड़ा की पार्टी लेफ़्ट फ़्रण्ट की साझीदार है।
-शशि थरूर पूर्व राजनैयिक हैं।
-चन्द्रन थरूर, शशि थरूर के पिता हैं, जो कोलकाता की आनन्दबाज़ार पत्रिका में संवाददाता थे।
-चन्द्रन थरूर ने 1959 में द स्टेट्समैन की अध्यक्षता की।
-शशि थरूर के दो जुड़वाँ लड़के ईशान और कनिष्क हैं, ईशान हांगकांग में “टाइम्स” पत्रिका के लिये काम करते हैं।
-कनिष्क लन्दन में “ओपन डेमोक्रेसी” नामक संस्था के लिये काम करते हैं।
-शशि थरूर की बहन शोभा थरूर की बेटी रागिनी (अमेरिकी पत्रिका) “इंडिया करंट्स” की सम्पादक हैं।
-परमेश्वर थरूर, शशि थरूर के चाचा हैं और वे “रीडर्स डाइजेस्ट” के भारत संस्करण के संस्थापक सदस्य हैं।
-शोभना भरतिया हिन्दुस्तान टाइम्स समूह की अध्यक्ष हैं।
-शोभना भरतिया केके बिरला की पुत्री और जीड़ी बिरला की पोती हैं
-शोभना राज्यसभा की सदस्या भी हैं जिन्हें सोनिया ने नामांकित किया था।
-शोभना को 2005 में पद्मश्री भी मिल चुकी है।
-शोभना भरतिया सिंधिया परिवार की भी नज़दीकी मित्र हैं।
-करण थापर भी हिन्दुस्तान टाइम्स में कालम लिखते हैं।
-न्यूज़ 24 की चेयरमेन है अनुराधा प्रसाद
-अनुराधा प्रसाद कांग्रेस नेता (और अब मंत्री बने) राजीव शुक्ला की पत्नी है
-राजीव शुक्ला राजनीति में आने से पहले  हिंदी में झोला छाप पत्रकार थे
-राजीव शुक्ला ने राहुल गाँधी और सोनिया गाँधी को मीडिया में किसी भी तरह लाने के लिए पत्रकारिता के सारे मूल्यों और सिद्धान्तों को ताक पर रख दिया था
-उसके इनाम में राहुल गाँधी ने उन्हें राज्य सभा का सदस्य और BCCI का वाइस प्रेसिडेंट ऐर मंत्री बना दिया
-कुछ दिन पहले राहुल गाँधी के काफिले से एक आदमी घायल हो गया था
-राहुल गाँधी ने 100 नंबर पर कॉल करके अम्बुलेंस बुला लिया
-न्यूज़ 24 ने इसे “राहुल गाँधी की महानता ” के तौर पर दो दिन तक दिखाया
-प्रभु चावला पहले इंडिया टुडे ग्रुप में थे
-प्रभु चावला के बेटे के नाम है अंकुर चावला
-अंकुर चावला दिल्ली में सत्ता न जाना माना दलाल है
-नीरा राडिया टेप में प्रभु चावला का भी नाम आया
-प्रभु चावला के कारण सोनिया गांधी इंडिया टुडे से नाराज़ थी
-नाराजगी की वजह थी जैन कमीशन की रिपोर्ट लीक होना, जिसके कारण कांग्रेस समर्थित सरकार गिर गई थी
-प्रभु चावला के कार्यक्रम सीधी-बात में यूपीए सरकार का एक भी कांग्रेसी मंत्री नहीं आया
-टुडे ग्रुप को कांग्रेस और सरकार के विज्ञापन मिलने भी बंद हो गए थे
-इंडिया टुडे ने प्रभु चावला की जगह एमजे अकबर को रख लिया है
-अभी प्रभु चावला ETV में है

!!!!क्यों बिक रहा है इंदौर के दैनिक नवभारत अखबार !!!

नवभारत इन्‍दौर नीलाम होगा 17 .50 करोड मे ? प्रदेश मे पिछले दिनो कई अखबार वालो के यहॉ छापे पड चुके है ?देश के कई नामचीन अखबार वालो पर 2जी स्‍पेक्‍ट्रम मे उगॅली उठ रही है ?अभी कुछ दिनो पहले दुनिया के सबसे बडे टेबलाइड अखबार के बन्‍द होने की खबर सूर्खियो मे रही , देश के कई अखबार वाले 2 जी स्‍पेक्‍टृम घोटाले मे लिप्‍तता के चलते अपनी साख गवौ बैठे वही मध्‍यप्रदेश मे कई अखबार वालो के यहॉ किसी ना किसी ''आरोप'' मे छापे पडे ,और अब इन्‍दौर मे देश के सबसे पुराने मे से एक और आजादी के आन्‍दोलन मे भी महती भुमिका निभाने वाले अखबार ''नवभारत'' की जमीन की नीलामी की जाने वाली है ।वैसे तो आम आदमी के मन में भी कई अखबार वालो की छवि अब एक बिजनेसमेन की सी ही बनने लगी है और कभी -कभी तो इन्‍हे भी सत्‍ता के दलालो जैसे अलंकरणो से नवाजा जाता है ,पेड न्‍यूज पर राष्‍टृव्‍यापी बहस हो चुकी है और अब नीलाम होती अखबार वालो की सम्‍पत्ति से आम आदमी  को अखबार वालो के बारे मे सोचने का नया न‍जरिया मिल जावेगा ।ज्ञात हो की नवभारत ग्रुप एक वक्‍त देश के नम्‍बर एक अखबार की श्रेणी का ग्रुप रह चुका है और आज भी उसके अन्‍य संस्‍करण काफी अच्‍छी'' इमेज ''बनाए हुए है ।वजह चाहे कुछ भी रही हो पर बैक आफ महाराष्‍ट्र का तकरीबन सोलह करोड रूपये का लोन ना चुकाने के कारण बैंक द्वारा दिनॉंक 2 सितम्‍बर 2011 को नवभारत इन्‍दौर की जमीन को बोली लगवाकर नीलाम कर दिया जावेगा ।और दुख के साथ कहना पड रहा है कि देश के आम ना‍गरिक को एक और नया नजरिया अखबार वालो को देखने को मिल जावेगा ।

!!! कानून की कौन सी किताब पढ़ी है दिल्ली हाई कोर्ट के इस जज ने !!!

दिल्ली हाई कोर्ट ने अपने एक फैसले में कहा है कि रिश्ते में भाई-बहन लगने वाले हिंदू युवक-युवती ईसाई धर्म अपनाकर आपस में शादी कर सकते हैं।
अदालत ने यह फैसला देते हुए एक रिटायर्ड जज की याचिका खारिज कर दी। रिटायर्ड जज ने अपने मैजिस्ट्रेट बेटे के खिलाफ याचिका दायर की थी, जिसने धर्म बदलने के बाद अपने मामा की बेटी से शादी कर ली थी।
जस्टिस सुरेश कैत ने शादी की वैधता को कायम रखते हुए कहा, 'प्रतिवादियों (दंपती) का धर्म परिवर्तन भारतीय ईसाई विवाह अधिनियम की धारा तीन के तहत उचित है। इसलिए इनकी शादी ऐसे संबंध के तहत नहीं आती, जो हिंदू विवाह अधिनियम के तहत प्रतिबंधित है।'
अपने बेटे के खिलाफ मामला दर्ज कराने पर पिता को फटकार लगाते हुए अदालत ने कहा, 'इस तरह की सोच नई पीढ़ी की व्यापक सोच को खत्म करती है और कई बार इसका नतीजा झूठी शान के लिए की जाने वाली हत्याओं के रूप में दिखता है।'
अदालत ने याचिकाकर्ता ओ पी गोगने पर 'विचार न करने योग्य मामला' दर्ज करने पर 10,000 रुपए का जुर्माना भी लगाया। (नभाटा)

शुक्रवार, 29 जुलाई 2011

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने भेजा था गैंगरेप के मामले में को राहुल गांधी नोटिस


जंतर मंतर पर अनशन की इजाजत नहीं, अन्ना जाएंगे सुप्रीम कोर्ट

जन लोकपाल बिल के लिए संघर्ष कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे जंतर मंजर पर अनशन की इजाजत नहीं देने गुस्साए हुए हैं। उन्होंने कहा कि अगर उन्हें जंतर मंतर पर धरना देने से रोका गया, तो वह सुप्रीम कोर्ट जाएंगे। इसे उन्होंने मौलिक अधिकार का हनन करार दिया है।

गौरतलब है कि दिल्ली पुलिस ने एक अगस्त से संसद का मॉनसून सत्र शुरू होने का हवाला देकर जंतर-मंतर सहित नई दिल्ली क्षेत्र में कहीं भी धरना-अनशन की इजाजत देने से इनकार कर दिया है। पुलिस ने क्षेत्र में धारा 144 के तहत निषेधाज्ञा लागू करने की घोषणा की है। दिल्ली पुलिस की ओर से लिखी चिट्ठी में अन्ना को अनशन के लिए नई दिल्ली के बाहर का क्षेत्र चुनने की सलाह दी है और इस बातचीत करने के लिए उन्होंने बुलाया है। अन्ना, कैबिनेट द्वारा मंजूर किए गए लोकपाल बिल के प्रारूप से नाराज हैं और इसके चलते उन्होंने एक बार फिर 16 अगस्त से अनशन शुरू करने का ऎलान किया है। इस प्रारूप को कैबिनेट ने गुरूवार को मंजूरी दी थी।

मंगलवार, 26 जुलाई 2011

मुंडा सरकार ने झारखंड के पत्रकारों के बीच बांटी रेवड़ियां

30 में 26 चहेतों को दिया 50-50 हजार रु. के मीडिया फेलोशिप 

झारखंड सरकार ने 26 पत्रकारों को 50-50 हजार रुपये की मीडिया फेलोशिप की घोषणा कर दी है। मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने संवाददाता सम्मेलन में चयनित पत्रकारों की सूची जारी की। जनहित के मुद्दों पर शोध आधारित प्रकाशनों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से विभाग के द्वारा शोध एवं अन्वेषण की योजना प्रारम्भ की गयी है। इसके लिए विभागीय समिति गठित कर अखबारों में विज्ञापन देकर प्रविष्टियाँ आमंत्रित की गई थी। गठित विभागीय समिति ने कुल 26 आवेदकों का चयन फेलोशिप प्रदान करने हेतु किया है। प्रत्येक फेलोशिप हेतु पचास हजार रुपये की राशि प्रदान की जानी है। बकौल चयन समिति के सदस्य डॉ.विष्णु राजगढिया,चयन समिति के पास कुल 30 आवेदन ही प्राप्त हुए थे।

चयन समिति में डा॰ रमेश शरण (स्नातकोत्तर अर्थशास्त्र विभाग, रांची विश्वविद्यालय), श्री चंदन मिश्र (ब्यूरो प्रमुख, दैनिक हिन्दुस्तान), डा॰ विष्णु राजगढि़या (ब्यूरो चीफ, नई दुनिया), श्री विजय पाठक (स्थानीय सम्पादक, प्रभात खबर), श्री सुमन श्रीवास्तव (ब्यूरो प्रमुख, दी टेलीग्राफ), श्री अरविन्द मनोज कुमार सिंह (सहायक क्षेत्रीय निदेशक, इग्नू), श्री राजीव लोचन बख्शी (संयुक्त सचिव, सूचना एवं जन-सम्पर्क विभाग) तथा श्रीमती स्नेहलता एक्का (उप निदेशक, सूचना एवं जन-सम्पर्क विभाग) शामिल है।
मीडिया फेलोशिप हेतु चयनित पत्रकार एवं उनका शोध-विषय-
1. अनुपमा कुमारी- पंचायती राज और महिला सशक्तिकरण
2. आलोका- झारखण्ड में मनरेगा का महत्व
3. अनंत - हजारीबाग में लतिका का सामाजिक संघर्ष
4. योगेश्वर राम - पंचायत व्यवस्था में ग्राम सभा की भूमिका
5. आशिषी कुमार सिन्हा - बिरहोर समुदाय की पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली
6. ओमप्रकाश पाठक - ग्रामीण क्षेत्रों की स्वास्थ्य अधिसंरचना
7. रूपक कुमार - झारखंड में जैव-विविधता और जीविकापार्जन
8. सुरेन्द्र लाल सोरेन - कचड़ा चुननेवाले बच्चों के बेहत्तर भविष्य की संभावन
9. सर्वजीत - झारखंड में सूचना का अधिकार
10. प्रशांत जयवर्द्धन - वन प्रबंधन और पारंपरिक नियम
11. नदीम अख्तर - झारखण्ड राज्य में कृषि में तकनीक का इस्तेमाल
12. महेश्वर सिंह छोटु - आदिम जनजाति पहाडि़या कल आज और काल
13. नौशाद आलम - झारखण्ड में समुदायिक वन प्रबंधन की प्रासंगिकता
14. संजय श्रीवास्तव - झारखण्ड के विकास में संसदीय राजनीति का योगदान
15. शैली खत्री - राँची में बच्चों के विकास की स्थिति ।
16. प्रशांत झा - तसर सिल्क उद्योग और इससे जुड़े लोगों की स्थिति
17. कुमार संजय - बच्चों के भोजन और पोषण का अधिकार
18. विकास कुमार सिन्हा - झारखण्ड के पर्यटन स्थलों की स्थिति व विकास।
19. तनवी झा - झारखंड में समुदाय आधरित स्वास्थ्य सेवा
20. अमित कुमार झा - नेशनल गेम्स आयोजन से झारखण्ड में खेल प्रतिभाओं का उदय।
21. चन्दो श्री ठाकुर - राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना का सामुदायिक परिदृश्य
22. संजय कृष्ण - ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर महिला पलायन का असर
23. सलाउद्दीन- हजारीबाग में एड्स का विस्तार एवं नियंत्रण
24. शैलेश कुमार सिंह - स्वर्णिम झारखंड में नक्सलवाद का अंत
25. पंकज त्रिपाठी - राज्य में बिजली की स्थिति, समस्या और समाधान।
26. शक्तिधर पांडेय - लोक स्वास्थ्य और आंगनबाड़ी सेवाओं के सुदृढ़ीकरण में समुदाय की भूमिका।
बहरहाल, समिति द्वारा अनुसंशित जिन उम्मीदवारों को सरकार ने फेलोशिप प्रदान करने की घोषणा की है,उनका गहन अवलोकन करने पर यह साफ जाहिर होता है कि मुंडा सरकार ने झारखंड की पत्रकारिता के एक खास वर्ग के चहेतों के बीच मात्र रेवड़ियां बांटने का कार्य की है। वाकई में जिन पत्रकारों को इसका लाभ मिलनी चाहिए,उसे नहीं मिलने की परंपरा कायम रखते हुये पारदर्शिता नहीं बरती गई है। और यदि इसकी न्यायपूर्ण जांच की जाए तो सबकी कलई खुलनी तय है। चयन समिति में कई ऐसे लोग हैं,जिनसे पारदर्शिता की उम्मीद कदापि नहीं की जा सकती। वरिष्ठ पत्रकार रजत कुमार गुप्ता का कहना है कि इनके चयन का आधार सार्वजनिक होना चाहिए।

सोमवार, 25 जुलाई 2011

झारखंडी मीडिया ने तो शहीदों की परिभाषा ही बदल दी

यह कतरन है रांची से प्रकाशित राष्ट्रीय समाचार पत्र दैनिक हिन्दुस्तान की। कमोवेश यही आलम यहां से प्रकाशित सभी समाचार पत्रों में प्रमुखता से छापी गयी है।इस कहानी के मूल जनक हैं झाविमो सुप्रीमों बाबूलाल मरांडी।जब अलग राज्य गठन के बाद यहां भाजपा की सरकार बनी तो वे उसके मुखिया (प्रथम मुख्यमंत्री) बनाये गये।बिहार में लालू जी तो झारखंड में मरांडी जी।
जब मरांडी जी को लगा कि उनकी कमजोर पड़ रही है,राज्य में डोमिसाइल नीति लागू करने की चर्चा छेड़ दी।फिर क्या था...समूचा झारखंड इसकी आग में धू-धू कर जलने लगा। जिधर देखो तनाव ही तनाव। कथित मूलवासी और बाहरी के बीच हिंसा ही हिंसा।इस हिंसा में दोनों गुटों के कई लोग मारे गए और उसे छुटभैये नेताओं ने शहीद बना दिया।
मैं ऐसे नेताओं की ज्यादा बात नहीं करता।यहां पर मीडिया की बात करना चाहूंगा।जिसने भी गुटीय हिंसा में मारे गये लोगों को एक दशक से शहीद होने की पूंगी हर साल बजाते आ रहा है।क्या वे लोग वाकई शहीदों की श्रेणी में आते हैं..जिनकी टीस आज भी असहनीय है। 





शनिवार, 23 जुलाई 2011

सोनिया गांधी के खिलाफ जांच कार्रवाई क्यों नहीं?

भारतीय मीडिया खामोश क्यों ?
कांग्रेस पार्टी और खुद सोनिया गांधी अपनी पृष्ठभूमि के बारे में जो बताते हैं , वो तीन झूठों पर टिका हुआ है। पहला ये है कि उनका असली नाम अंतोनिया है न की सोनिया। ये बात इटली के राजदूत ने नई दिल्ली में 27 अप्रैल 1973 को लिखे अपने एक पत्र में जाहिर की थी। ये पत्र उन्होंने गृह मंत्रालय को लिखा था , जिसे कभी सार्वजनिक नहीं किया गया। सोनिया का असली नाम अंतोनिया ही है , जो उनके जन्म प्रमाण पत्र के अनुसार एकदम सही है। सोनिया ने इसी तरह अपने पिता का नाम स्टेफनो मैनो बताया था। वो दूसरे वल्र्ड वार के समय रूस में युद्ध बंदी थे। स्टेफनो नाजी आर्मी के वालिंटियर सदस्य थे। बहुत ढेर सारे इतालवी फासिस्टों ने ऐसा ही किया था। सोनिया दरअसल इतालवी नहीं बल्कि रूसी नाम है। सोनिया के पिता रूसी जेलों में दो साल बिताने के बाद रूस समर्थक हो गये थे। अमेरिकी सेनाओं ने इटली में सभी फासिस्टों की संपत्ति को तहस-नहस कर दिया था। सोनिया ओरबासानो में पैदा नहीं हुईं , जैसा की उनके बायोडाटा में दावा किया गया है। इस बायोडाटा को उन्होंने संसद में सासंद बनने के समय पर पेश किया था , सही बात ये है कि उनका जन्म लुसियाना में हुआ। शायद वह इस जगह को इसलिए छिपाने की कोशिश करती हैं ताकि उनके पिता के नाजी और मुसोलिनी संपर्कों का पता नहीं चल पाये और साथ ही ये भी उनके परिवार के संपर्क इटली के भूमिगत हो चुके नाजी फासिस्टों से युद्ध समाप्त होने तक बने रहे। लुसियाना नाजी फासिस्ट नेटवर्क का मुख्यालय था , ये इटली-स्विस सीमा पर था। इस मायने हीन झूठ का और कोई मतलब नहीं हो सकता। तीसरा सोनिया गांधी ने हाईस्कूल से आगे की पढ़ाई कभी की ही नहीं , लेकिन रायबरेली से चुनाव लड़ने के दौरान उन्होंने अपने चुनाव नामांकन पत्र में उन्होंने ये झूठा हलफनामा दायर किया कि वो अंग्रेजी में कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से डिप्लोमाधारी हैं। ये हलफनामा उन्होंने 2004 के लोकसभा चुनावों के दौरान रायबरेली में रिटर्निंग ऑफिसर के सम्मुख पेश किया था। इससे पहले 1989 में लोकसभा में अपने बायोग्राफिकल में भी उन्होंने अपने हस्ताक्षर के साथ यही बात लोकसभा के सचिवालय के सम्मुख भी पेश की थी , जो की गलत दावा था। बाद में लोकसभा स्पीकर को लिखे पत्र में उन्होंने इसे मानते हुए इसे टाइपिंग की गलती बताया। सही बात ये है कि श्रीमती सोनिया गांधी ने कभी किसी कालेज में पढाई की ही नहीं। वह पढ़ाई के लिए गिवानो के कैथोलिक नन्स द्वारा संचालित स्कूल मारिया आसीलेट्रिस गईं , जो उनके कस्बे ओरबासानों से 15 किलोमीटर दूर था। उन दिनों गरीबी के चलते इटली की लड़कियां इन मिशनरीज में जाती थीं और फिर किशोरवय में ब्रिटेन ताकि वहां वो कोई छोटी-मोटी नौकरी कर सकें। मैनो उन दिनों गरीब थे। सोनिया के पिता और माता की हैसियत बेहद मामूली थी और अब वो दो बिलियन पाउंड की अथाह संपत्ति के मालिक हैं। इस तरह सोनिया ने लोकसभा और हलफनामे के जरिए गलत जानकारी देकर आपराधिक काम किया है , जिसके तहत न केवल उन पर अपराध का मुकदमा चलाया जा सकता है बल्कि वो सांसद की सदस्यता से भी वंचित की जा सकती हैं। ये सुप्रीम कोर्ट की उस फैसले की भावना का भी उल्लंघन है कि सभी उम्मीदवारों को हलफनामे के जरिए अपनी सही पढ़ाई-लिखाई से संबंधित योग्यता को पेश करना जरूरी है। इस तरह ये सोनिया गांधी के तीन झूठ हैं , जो उन्होंने छिपाने की कोशिश की। कहीं ऐसा तो नहीं कि कतिपय कारणों से भारतीयों को बेवकूफ बनाने के लिए उन्होंने ये सब किया। इन सबके पीछे उनके उद्देश्य कुछ अलग थे। अब हमें उनके बारे में और कुछ भी जानने की जरूरत है ।
सोनिया गांधी ने इतनी इंग्लिश सीख ली थी कि वो कैम्ब्रिज टाउन के यूनिवर्सिटी रेस्टोरेंट में वैट्रेस बन गईं। वो राजीव गांधी से पहली बार तब मिलीं जब वो 1965 में रेस्टोरेंट में आये। राजीव यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट थे , लेकिन वो लंबे समय तक अपने पढ़ाई के साथ तालमेल नहीं बिठा पाये इसलिए उन्हें 1966 में लंदन भेज दिया गया , जहां उनका दाखिला इंपीरियल कालेज ऑफ इंजीनियरिंग में हुआ। सोनिया भी लंदन चली आईं। मेरी सूचना के अनुसार उन्हें लाहौर के एक व्यवसायी सलमान तासिर के आउटफिट में नौकरी मिल गई। तासीर की एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट कंपनी का मुख्यालय दुबई में था लेकिन वो अपना ज्यादा समय लंदन में बिताते थे। आईएसआई से जुडे होने के लिए उनकी ये प्रोफाइल जरूरी थी। स्वाभावित तौर पर सोनिया इस नौकरी से इतना पैसा कमा लेती थीं कि राजीव को लोन फंड कर सकें। राजीव मां इंदिरा गांधी द्वारा भारत से भेजे गये पैसों से कहीं ज्यादा पैसे खर्च देते थे। इंदिरा ने राजीव की इस आदत पर मेरे सामने भी 1965 में तब मेरे सामने भी गुस्सा जाहिर किया था जब मैं हार्वर्ड में इकोनामिक्स का प्रोफेसर था। श्रीमती इंदिरा गांधी ने मुझे ब्रेंनेडिस यूनिवर्सिटी के गेस्ट हाउस में , जहां वो ठहरी थीं , व्यक्तिगत तौर पर चाय के लिए आमंत्रित किया। पीएन लेखी द्वारा दिल्ली हाईकोर्ट में पेश किये गये राजीव के छोटे भाई संजय को लिखे गये पत्र में साफ तौर पर संकेत दिया गया है कि वह वित्तीय तौर पर सोनिया के काफी कर्जदार हो चुके थे और उन्होंने संजय से अनुरोध किया था , जो उन दिनों खुद ब्रिटेन में थे और खासा पैसा उड़ा रहे थे और कर्ज में डूबे हुए थे। उन दिनों सोनिया के मित्रों में केवल राजीव गांधी ही नहीं थे बल्कि माधवराव सिंधिया भी थे। सिंधिया और एक स्टीगलर नाम का जर्मन युवक भी सोनिया के अच्छे मित्रों में थे। माधवराव की सोनिया से दोस्ती राजीव की सोनिया से शादी के बाद भी जारी रही। 1972 में माधवराव आईआईटी दिल्ली के मुख्य गेट के पास एक एक्सीडेंट के शिकार हुए और उसमें उन्हें बुरी तरह चोटें आईं , ये रात दो बजे की बात है , उसी समय आईआईटी का एक छात्र बाहर था। उसने उन्हें कार से निकाल कर ऑटोरिक्शा में बिठाया और साथ में घायल सोनिया को श्रीमती इंदिरा गांधी के आवास पर भेजा जबकि माधवराव सिंधिया का पैर टूट चुका था और उन्हें इलाज की दरकार थी। दिल्ली पुलिस ने उन्हें हॉस्पिटल तक पहुंचाया। दिल्ली पुलिस वहां तब पहुंची जब सोनिया वहां से जा चुकी थीं। बाद के सालों में माधवराव सिंधिया व्यक्तिगत तौर पर सोनिया के बड़े आलोचक बन गये थे और उन्होंने अपने कुछ नजदीकी मित्रों से अपनी आशंकाओं के बारे में भी बताया था। कितना दुर्भाग्य है कि वो 2001 में एक विमान हादसे में मारे गये। मणिशंकर अय्यर और शीला दीक्षित भी उसी विमान से जाने वाले थे लेकिन उन्हें आखिरी क्षणों में फ्लाइट से न जाने को कहा गया। वो हालात भी विवादों से भरे हैं जब राजीव ने ओरबासानो के चर्च में सोनिया से शादी की थी , लेकिन ये प्राइवेट मसला है , इसका जिक्र करना ठीक नहीं होगा। इंदिरा गांधी शुरू में इस विवाह के सख्त खिलाफ थीं , उसके कुछ कारण भी थे जो उन्हें बताये जा चुके थे। वो इस शादी को हिन्दू रीतिरिवाजों से दिल्ली में पंजीकृत कराने की सहमति तब दी जब सोवियत समर्थक टी एन कौल ने इसके लिए उन्हें कंविंस किया , उन्होंने इंदिरा जी से कहा था कि ये शादी भारत-सोवियत दोस्ती के वृहद इंटरेस्ट में बेहतर कदम साबित हो सकती है। कौल ने भी तभी ऐसा किया जब सोवियत संघ ने उनसे ऐसा करने को कहा।

जागरण प्रकाशन हुआ विदेशी गुलाम

खबर है कि जागरण प्रकाशन लिमिटेड (जेपीएल) की होल्डिंग कंपनी जागरण मीडिया नेटवर्क इनवेस्‍टमेंट प्राइवेट लिमिटेड में मारिशस की प्राइवेट इक्विटी फर्म ब्‍लैकस्‍टोन जीपीवी कैपिटल पार्टनर्स ने 225 करोड़ रुपये का निवेश किया है.जेपीएल ने बांम्‍बे स्‍टॉक एक्‍सचेंज को इसकी सूचना दे दी है. ब्‍लैक स्‍टोन ने जेपीएल को पैसे स्‍थानांतरित कर दिए हैं. कंपनी के अनुसार ये सीधा विदेशी निवेश है, इसके लिए फॉरेन इंवेस्‍टमेंट बोर्ड से जून महीने में ही इसकी अनुमति मिल गई थी.
जागरण मीडिया नेटवर्क इंवेस्‍टमेंट प्राइवेट लिमिटेड (जेएमएनआईपीएल) पिछले सप्‍ताह जागरण प्रकाशन लिमिटेड में 59.46 प्रतिशत इक्विटी शेयर के साथ होल्डिंग कंपनी बन गई है.

रविवार, 14 मार्च 2010

बताईये: दोनों में कौन है क्रिकेटर युसूफ पठान?

एक खबर-चित्र है झारखण्ड की राजधानी राँची से प्रकाशित दैनिक सन्मार्ग की प्रथम पेज प्रकाशित तो दूसरा खबर-चित्र है दैनिक हिन्दुस्तान के खेल पेज पर प्रकाशित.गौर से देखिये बताईये कि दरअसल क्रिकेटर युसूफ पठान की तस्वीर कौन है?

शनिवार, 9 जनवरी 2010

"मुख्यमंत्री शिबू सोरेन जी,ये आपके गांव के छोकडा लोग क्या कर रहा है? जरा बताईये न?

गुरूजी का साफ कहना है कि झारखंड मे नक्सलवाद कोई समस्या नही है. इसे बडी समस्या बनाया गया है. इसमे शामिल सब गांव का छोकडा लोग है.मीडिया मे बात का बतंगड बनाया जा रहा है.बकौल मुख्यमंत्री शिबू सोरेन किसी के घर मे किसी ने जान मार दी,उसके बदले की कार्रवाई मे हिंसा कर बैठता है. इसी का नाम उग्रवाद दे दिया गया है.
वेशक इस तरह की स्पष्ट सोच के पीछे गुरूजी के ईरादे कुछ भी रहे हो.लेकिन जिस तरह की उग्रवाद की बात कर रहे है,झारखंड जैसे राज्य मे उस्की ताजा स्थिति कुछ अलग ही तस्वीर लिये हुये है.यदि वे आज भी अपने जवानी काल के उग्रवादी अनुभव का आंकलन समेटे समाधान ढूंढ रहे है तो उनकी यह बहुत बड़ी गलतफहमी है.पुलिस--प्रशासन का मनोबल तोडने वाला है.क्योंकि आज का उग्रवादी उनके जैसा तीर--धनुष लिये हुये लुक्का--छिपी का खेल नही खेल रहा है अपितु ए.के.47, आरडीएक्स,डाईनामाईट सहित अत्याधुनिक सेटेलाईट उपकरणो से लैस है और समुचे शासन--तंत्र पर भारी पड रहा है. गुरूजी को यह भी नही भूलना चाहिये कि स्कूलो,सामुदायिक भवनो,रेल स्टेशनो--पटरियो को उडाना और राज्य के विकास कार्यो से जुडे सरकारी गैर सरकारी कर्मियो तो दूर राजनीतिक दलो से भारी भरकम "लेवी" वसूलना आखिर क्या है? ऐसे मे गुरूजी सरीखे प्रांत के मुखिया की इस तरह मानसिकता फिलहाल एक तरह से उग्रवादियो के सामने संवैधानिक संस्थाओ द्वारा घुटने टिकवाने की मानी जा रही है और खुद के उग्रवादी अनुभवो के सहारे उग्रवाद की ताजा स्थिति का आंकलन और उसका समाधान ढूंढना एक गलतफहमी है भी. यदि विश्वास न हो तो देखिये आज के एक ही अखबार के दो प्रमुख समाचार. सुदूर गांव से लेकर राजधानी रांची स्थित विधानसभा भवन का हाल.