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मंगलवार, 23 अगस्त 2011

हिरण्य पर्वत पर ही तथागत ने किया था अंतिम वर्षावास

दिलीप कुमार गुप्ता
नालंदा : उदंतपुरी, जिसे आज लोग बिहारशरीफ के नाम से जानते हैं। यहां स्थित बड़ी पहाड़ी नाम से परिचित हिरण्य पर्वत का समृद्ध इतिहास रहा है। भगवान बुद्ध ने अपना अंतिम वर्षावास इसी पर्वत पर किया था। लेकिन इस पहाड़ी पर बुद्ध से जुड़ी कोई भी स्मृति नहीं है। उत्सुकता से लबरेज बौद्ध भिक्षु यहां आते तो हैं लेकिन पहाड़ी पर मंदिर व मस्जिद के दर्शन कर लौट जाते हैं। पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए पहाड़ी पर पार्क, जिम, अतिथिशाला, यात्री शेड, पहुंच पथ एवं सीढि़यों का निर्माण हाल के वर्षो में कराया गया है। इतिहास के जानकार योगेन्द्र मिश्र एवं गदाधर प्रसाद अम्बष्ट के अनुसार भगवान बुद्ध के अंतिम वर्षावास का स्थान बिहारशरीफ की पहाड़ी ही थी। चीनी यात्री फाह्यान और ह्वेनसांग के यात्रा वृतांत में लिखा है कि राजगीर और गंगा के मध्य निर्जन पहाड़ी पर बुद्ध ने सन् 487-488 ई.पूर्व वर्षावास किया था। यह पहाड़ी उदंतपुरी नगर में अवस्थित थी। जिसे लोग पाश्‌र्र्ववती पहाड़ी कहते हैं। ह्वेनसांग ने यहां की अवलोकितेश्वर बुद्ध की चन्दन निर्मित छोटी व अत्यंत सुन्दर प्रतिमा का वर्णन किया है। इस प्रतिमा का लंका के राजा ने स्वप्न में दर्शन किया था और पता लगाते हुए यहां आ पहुंचा। उसने प्रतिमा की षोडसोप नामक चार पूजा भी की थी, जिसका ह्वेनसांग ने विस्तृत विवरण दिया है। पहाड़ी पर साम्ये विहार बना था, जहां बुद्ध ने वर्षावास किया था। इतिहास के जानकार बताते हैं कि राजगीर से पैदल चलकर भगवान बुद्ध उदंतपुरी (बिहारशरीफ) पहुंचे थे। 743 ईश्वी में तिब्बत के राजा खि-श्रान-डिड-प्सन के निमंत्रण पर बौद्ध पंडित शांति रक्षित इसी 'साम्ये विहार' का माडल तिब्बत ले गये थे। तिब्बत में 749 ई. में 'साम्ये विहार' का निर्माण पूर्ण हुआ। इसी विहार के माध्यम से तिब्बत में अवलोकितेश्वर स्वरूप की पूजा प्रारम्भ हुई और तिब्बत बौद्ध धर्म प्रधान देश के रूप में जाना जाने लगा। इस तरह तिब्बत को उसका राजधर्म देने का गौरव उदंतपुरी (बिहारशरीफ) को प्राप्त है।
बताते चलें कि 750 ई. में उदंतपुरी पर बख्तियार खिलजी ने कब्जा किया तो हिरण्य पर्वत पर बने बौद्ध विहार को ध्वस्त कर दिया। इसके बाद 1353 ई. में शासक मल्लिक इब्राहिम बयां की मृत्यु हुई तो उसे पहाड़ी पर दफनाया गया और भव्य मकबरे का निर्माण कराया गया, जो आज भी विद्यमान है।
बुद्ध सर्किट से जल्द जुडे़गी बड़ी पहाड़ीः डीएम
जिलाधिकारी संजय कुमार अग्रवाल ने बताया कि बड़ी पहाड़ी को जल्द ही बुद्ध सर्किट से जोड़ने का प्रयास किया जायेगा। इसके लिए लिखा-पढ़ी शुरू कर दी गयी है। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए प्रशासन सरकार की मदद से भगवान बुद्ध से जुडे़ गुमनाम स्थलों की खोज करा रहा है। राजगीर प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री ने कई दिशा-निर्देश दिये थे। उसी के आलोक में दो शोध संस्थानों को भगवान बुद्ध से जुडे़ स्थलों की जानकारी इकट्ठा करने की जिम्मेदारी दी गयी थी। हिरण्य पर्वत बड़ी पहाड़ी पर भगवान बुद्ध के अंतिम वर्षावास किये जाने का विवरण चीनी यात्री ह्वेनसांग व फाहियान के यात्रा वृतांत में मिला है। उसी के मद्देनजर पर्यटकों के लिहाज से हिरण्य पर्वत को विकसित किया गया है।

दिवंगत के परिजन से मिले नीतीश,ली ग्रमीणों की सुध

हमारे संवाददाता
नालंदाः मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सोमवार को अस्थावां प्रखंड के अकबरपुर गांव पहुंचकर दिवंगत सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश प्रसाद के चित्र पर माल्यार्पण किया। इस दौरान वे दिवंगत के परिजनों से मिलकर दुख बांटे। दिवंगत के विकलांग पुत्र नागेश्वर प्रसाद उर्फ नागो से भेंट की। पुत्र वधू कंचन सिन्हा से भी क्षेत्र एवं परिवार का हाल-चाल लिया। उनके साथ जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी थे। सीएम ने गांव में करीब 25 मिनट बिताया। ग्रामीणों ने वर्षो से बिजली और सड़क बदहाल रहने की शिकायत की। मुख्यमंत्री ने बिजली समस्या को लेकर विद्युत बोर्ड के अध्यक्ष को मोबाइल पर वहीं से तलब करते हुए बलवापर (अस्थावां) स्थित विद्युत सब केन्द्र को व्यवस्थित कर इससे जुडे़ गांवों में बिजली पहुंचाने का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री पहले से अस्थावां क्षेत्र की जनभावना से अवगत दिखे। यही कारण है कि उन्होंने वहीं पर मौजूद विधायक डा. जितेन्द्र कुमार पर चुटकी लेते हुए उन्हें जनता के प्रति कर्तव्य का बोध कराया। इस मौके पर सत्तापक्ष के मुख्य सचेतक श्रवण कुमार, इसलामपुर विधायक राजीव रंजन, जदयू के वरिष्ठ नेता असगर शमीम, प्रदेश महासचिव डा. विपिन कुमार यादव, जिलाध्यक्ष सियाशरण ठाकुर, प्रवक्ता संजय कांत सिन्हा, महिला प्रकोष्ठ के अध्यक्ष अनीता सिंह, अति पिछड़ा प्रकोष्ठ के अध्यक्ष विपिन चन्द्रवंशी, रमेश कुमार नीरज, कौशलेन्द्र उर्फ छोटे मुखिया, प्रो. अशोक सिंह, अजीत कुमार, मुखिया शंभू शरण, उप मेयर नदीम जफर उर्फ गुलरेज, वरुण सिंह, चन्द्रकिरण, युवाध्यक्ष उपेन्द्र कुमार विभूति, अमरेन्द्र मुन्ना, आफताब आलम, जदयू के वरिष्ठ नेता प्रमोद नारायण सिंह, उप प्रमुख गिरिश चन्द्र सिंह, जिप सदस्य कंचन माला, बाबर मलिक, डा. वीरेश कुमार, पंकज कुमार, मुन्ना सिद्धिकी, वरुण सिंह उपस्थित थे।

रविवार, 21 अगस्त 2011

नवादाः नवोदय विद्यालय से रैगिंग को लेकर असम के 15 छात्र फरार

-दिलीप कुमार गुप्ता-
 जवाहर नवोदय विद्यालय रेवार, पकरीबरावां में पढ़ाई कर रहे करीमगंज (आसाम) के 15 छात्र शनिवार की भोर में फरार हो गये। बाद में सभी छात्रों को शेखपुरा में गया-झाझा ट्रेन से बरामद किया गया। भागने वाले छात्रों की शिकायत थी कि विद्यालय में रैंगिंग व अपमान का सामना करना पड़ रहा था। वैसे विद्यालय प्राचार्य पीएस मिश्रा ने छात्रों के आरोपों को खारिज किया है। बताया जाता है कि सुबह करीब 4 बजे 15 छात्र विद्यालय करी चहारदीवारी फांद कर फरार हो गये। सभी वहां से पकरीबरावां बाजार पहुंचे। जहां से सुरक्षित वाहन से नवादा स्टेशन पहुंचे। स्टेशन से गया-झाझा ट्रेन पर सवार होकर सभी किउल जा रहे थे। रास्ते में शेखपुरा स्टेशन पर ट्रेन से छात्रों को उतारा गया। इस बाबत विद्यालय प्राचार्य श्रीमिश्रा ने बताया कि सुबह 5.45 पीटी के दौरान छात्रों के फरार होने की खबर मिली। भागने वाले छात्रों में जाफर शरीफ, समीर उद्दीन, मिर्नाको धर, एफसकले बारा, अब्बू ताहिर, रोलायन स्वीटिंग सहित सभी 9वें वर्ग के 15 छात्र शामिल थे। उन्होंने बताया कि माइग्रेशन के तहत आसाम से कुल 25 छात्र-छात्राएं पढ़ाई के लिये यहां आये थे। जिसमें 8 छात्राएं थी। घटना की जानकारी मिलते ही छह शिक्षकों को खोजबीन के लिये नवादा, शेखपुरा, जमुई के रेलवे स्टेशन पर लगाया। इसके साथ ही अन्य नवोदय विद्यालय को भी इसकी सूचना दी गयी। आखिरकार जवाहर नवोदय विद्यालय शेखपुरा के प्राचार्य जीएस तोमर ने सभी छात्रों को झाझा-गया पैसेंजर ट्रेन से शेखपुरा स्टेशन पर बरामद किया। इधर घटना की जानकारी मिलने पर अंचलाधिकारी जयराम प्रसाद सिंह, थानाध्यक्ष धनेश्वर पासवान सुबह 11 बजे विद्यालय पहुंचे और मामले की जांच की। विद्यालय में बचे आसाम के छात्र-छात्राओं से पूछताछ करने पर पता चला कि सीनियर छात्रों द्वारा रैगिंग करवाने, छात्राओं के साथ आपत्तिजनक टिप्पणी करने, शिक्षकों से शिकायत करने पर डांट लगाने से क्षुब्ध हो छात्र भागे। मीनू के अनुसार भोजन नहीं मिलने की शिकायत भी छात्रों ने की। कई छात्र-छात्राओं ने नाम नहीं छापने की शर्त पर अपनी समस्याओं को बताते हुए कहा कि प्राय: मात्र आलू की सब्जी मिलती है। मीट-मछली तो मिलती ही नहीं है। छात्रा तमन्ना बेगम, रूमाना प्रवीण, प्रियंका दत्ता, सोन्नैगंक, सुनीता धोबी, रूपन दास आदि ने अंचलाधिकारी से अपने गृह राज्य भेजने का आग्रह की है।

देखिए गांधी जी का चम्पारणः जहां है मजबूत तंत्र में लोक मजबूर

-समदर्शी प्रियम-
चम्पारण के किसानों का दु:ख एवं शोषण समाप्त करने के लिए पूज्य बापू ने शिक्षा के प्रसार पर बल दिया . उन्होंने १३ नवम्बर १९१७ को बडहरवा लखन सेन ,२० नवम्बर १९१७ को भीतिहरवा और १७ जनवरी १९१८ को मधुवन मे अनौपचारिक विद्यालयों की स्थापना की .शिक्षा के स्वरुप पर गांधी जी का चिन्तन लगातार चलता रहा . उन्होंने नयी तालिम के रुप में शिक्षा सिद्धांत को सूत्रबद्ध किया . उनकी पहल पर डाक्टर जाकिर हुसेन कि अध्यक्षता में नयी तालिम पर आधारित बुनियादी शिक्षा का पाठयक्रम तैयार हुआ . परन्तु खेद की बात यह है कि जो बुनियादि विद्यालय परतंत्र भारत चला रहा था , उन्हें स्वतंत्र भारत नही चला सका . विद्यालय के भवन ध्वस्त हो गये . पाठयक्रम निरस्त कर दिये गये . अध्यापक सेवा मुक्त होते गये . और इस तरह स्वतंत्र भारत में नयी तालीम की कब्र खोद दी गयी .  आज अंग्रेजी पढाई का तेजी से प्रसार हो रहा है . मैकाले शिक्षा पद्धति का संजाल फ़ैल गया है . आजादी के बाद हम तेजी से अपनी जडों से दूर होते गये और अंग्रेजों का छोडा चाटने में मग्न हो गये . अंग्रेजों की पुरानी शिक्षा को बरकरार रखते हुए भारत निरक्षरता को दूर नही कर सका , प्राथमिक शिक्षा सबों को प्राप्त नही हो सकी .
दोहरी शिक्षा प्रणाली के अन्तर्गत निजी विद्यालयों के फ़लने-फ़ूलने और सार्वजनिक शिक्षा प्रणाली के खस्ताहाल होते जाने के कारण एक खास वर्ग में शिक्षा का विकास हुआ , भले हीं आम जनता मे साक्षरता दर बढा लेकिन शिक्षा का स्तर गिरता गया . हमारे संविधान ने देश की जनता को शिक्षा का अधिकार कानून दिया है . ऐसा नही कि शिक्षा का अधिकार देश की जनता के लिये नया है . बल्कि भारत के संविधान के अनेक अनुच्छेदों में यह अन्तर्निहित है . इस कानून की विशेषता है कि हर बच्ची या बच्चा को शिक्षा सत्र में अपने पडोस के किसी भी स्कूल में प्रवेश लेने का अधिकार होगा . फ़िर चाहे वह पडोसी स्कूल सरकारी हो या प्राइवेट . इसके अनुसार २५ प्रतिशत गरीब पिछडे और विकलांग बच्चों को निजी-पडोसी स्कूल में दाखिला देना होगा . इसकी एक और खूबी है कि हर बच्चे को गुणवत्ता के मानदण्डों के अनुरुप शिक्षा उपलब्ध कराना है . इस प्रकार इस कानून को समान शिक्षा की दिशा में एक पहल कहा जा सकता है . 
लेकिन प्रश्न यह है कि क्या नागरिकों को अपने तमाम मौलिक अधिकार मिल सके ? कितनी समानता मिली  शोषण और अन्याय के विरुद्ध? और न्याय का रास्ता कितना आसान हुआ एवं कितनी धर्मनिरपेक्षता मिली इस देश को आजादी के बाद से आज तक ? एक भी ऐसा अधिकार नही जो साठ साल के सविंधान से सरकार ने जनता को पूरी तरह दे दिया हो . क्या कारण है कि आज भी देश का पढा लिखा , मजदूर किसान ,कानून का इज्जत करने वाला नागरिक पुलिस से डरता है , पटवारी से डरता है , दफ्तरों से डरता है , नेता मंत्री तक से डरता है . देश का गरीब और दलित समाज सरकार और उसके कानून का सबसे बडा भूक्तभोगी है . सारी योजनाऍ उनके नाम पर बनती है . पर कुछ हीं बूँदे उनके होठों पर टपकती हैं . सारा रस दूसरे पी जाते हैं . एक अधिकारी से दूसरे और एक न्यायालय से दूसरे न्यायालय तक भटकना ही जैसे उनका अधिकार रह गया है . ऐसे में शिक्षा के कानून का बुरा हश्र न हो यह डर बना हुआ क्योंकि तंत्र आज भी मजबूत है और लोक अभी भी मजबूर .

शुक्रवार, 19 अगस्त 2011

नालंदा जिले में नहीं थम रहा खाद्यान्न घोटाले का दौर

84 हजार क्विंटल खाद्यान्न डीलरों के पास रह गये बाकी
बिहारशरीफ (नालंदा) : जिले में खाद्यान्न घोटाले से जुड़े मामलों के उजागर होने का जो सिलसिला पिछले दिनों शुरू हुआ था, वह थमने का नाम नहीं ले रहा है. इसी कड़ी में एक और बड़ा मामला प्रकाश में आया है. हाल में मनरेगा की विशेष ऑडिट के दौरान यह तथ्य उभर कर आया कि संपूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना के तहत मजदूरी के रूप में वितरण के लिए दिये गये 84 हजार क्विंटल अनाज डीलरों के पास ही बाकी रह गये. इस अनाज की वसूली के लिए न ही सरकारी स्तर पर कोई प्रयास किया गया और न ही डीलरों ने इसे वापस लौटाया.
ऑडिट रिपोर्ट के बाद नींद से जागी सरकार के निर्देश पर जिला प्रशासन खाद्यान्न की कीमत एकमुश्त जमा कराने के लिए बकायेदार 245 डीलरों को बकाया अनाज की कीमत 1370 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से एक सप्ताह के अंदर जमा कराने का आदेश दिया. जिले के कुल 303 में से 245 डीलरों के पास अवशेष खाद्यान्न बाकी है. इनमें से 57 डीलरों के पास चार लाख रुपये से अधिक के बकाया का आकलन किया गया है.
वर्ष 2002-03 से 2006-07 के बीच संपूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना के तहत मजदूरों के बीच मजदूरी के एवज खाद्यान्न देने के लिए डीलरों को उक्त अनाज उपलब्ध कराया गया था. 2006-07 में इस योजना को बदल कर राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना कर दिया गया तथा अनाज की जगह पूरी मजदूरी नगद भुगतान करने का प्रावधान किया गया. इसके बाद से डीलरों के पास अवशेष खाद्यान्न बाकी रह गये.
हाइकोर्ट ने दी डीलरों को राहत खाद्यान्न की कीमत डीलरों से सख्ती से वसूलने तथा नोटिस में दी गयी अवधि तक राशि नहीं जमा करानेवालों पर प्राथमिकी दर्ज कराने के प्रशासन के मंसूबे पर हाइकोर्ट ने पानी फेर दिया.
हाइकोर्ट ने कई डीलरों की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के बाद आदेश दिया कि डीलरों से दो माह में 1000 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से बकाया खाद्यान्न की कुल कीमत का 20 फीसदी राशि जमा कराया जाये. इसके बाद नये सिरे से हाइकोर्ट के आदेश के अनुसार डीलरों को नोटिस भेजे जा रहे हैं।
-दिलीप कुमार गुप्ता

नवादा के डीएम दरबार में छात्राओं के साथ छेड़छाड़ का मामला गूंजा


नवादा जिला सभाकक्ष में गुरुवार को दरबार लगा डीएम डा. सफीना एएन ने लोगों की समस्याएं सुनी। कुल 120 मामले आये। जिसमें से कई का निष्पादन मौके पर किया गया, शेष को संबंधित अधिकारियों को जांच कर निष्पादित करने का निर्देश दिया गया। कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय, पकरीबरावां के संचालक मो. शमशेर आलम व उनके पुत्र मो.इमरान द्वारा विद्यालय के छात्राओं के साथ घृणित कार्य करने के प्रयास करने की शिकायत पर डीएम गंभीर हो गयी। उन्होंने जिला कल्याण पदाधिकारी को अविलंब जांच के आदेश दिये। पकरीबरावां के मोनू, पप्पू कुमार, जितेन्द्र कुमार, रामनरेश प्रसाद, प्रवीण कुमार आदि यह शिकायत लेकर डीएम के दरबार में पहुंचे थे। रोह प्रखंड के बघौर मध्य विद्यालय के शिक्षक रामअवतार सिंह के पुत्र अरविन्द कुमार ने अनुकम्पा के आधार पर नौकरी की मांग की। मेसकौर प्रखंड के पाण्डेय बिगहा के आलीम खां ने 9 अंक रहने के बावजूद इंदिरा आवास नहीं मिलने की शिकायत की। सिरदला खरांट के रामबालक प्रसाद ने तिलैया-कोडरमा रेलवे लाईन निर्माण के लिये अधिग्रहित भूमि का मुआवजा नहीं मिलने की शिकायत की। वारिसलीगंज नगर पंचायत के डा. सुरेश प्रसाद सिंह ने एपीएल व बीपीएल में नाम जोड़ने, वारिसलीगंज प्रखंड के सिमरी बिगहा के नन्द किशोर चौधरी ने दाखिल खारिज न होने, नरहट प्रखंड के उत्क्रमित मध्य विद्यालय वाजीतपुर के जयंत कुमार ने पांच वर्षो से मानदेय भुगतान नहीं होने की शिकायत की। मौके पर जनशिकायत पदाधिकारी अबू नसर, हरिनंदन प्रसाद, शिक्षा उपाधीक्षक शंभू प्रसाद, डा. उमेश चंद्रा आदि उपस्थित थे।
 -दिलीप कुमार गुप्ता

पटना जंक्शन पर विक्रमशिला एक्सप्रेस से असलहे का जखीरा बरामद, एक गिरफ्तार


पटना जंक्शन पर आरपीएफ ने बुधवार को हथियारों की खेप लेकर आये एक तस्कर को गिरफ्तार करने में सफलता पाई है। भागलपुर से नई दिल्ली जा रही विक्रमशिला एक्सप्रेस की जनरल बोगी से उतरे एक युवक को संदेह के आधार पर रोक जब तलाशी ली गयी तो अधिकारी चौंक गये। उसके पास मौजूद थैले में 7.65 बोर की 14 विदेशी पिस्टल एवं 28 मैगजीन मिली। हथियार के जखीरे के साथ हरी लाल पासवान को गिरफ्तार कर लिया गया। उसकी निशानदेही पर मुंगेर के ही रहने वाले अब्दुल्ला की तलाश की जा रही है।
आरपीएफ की सीआईबी टीम के इंस्पेक्टर संजय सिंह ने बताया कि पूर्व मध्य रेल के मुख्य सुरक्षा आयुक्त राजाराम के निर्देश पर स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर ट्रेनों पर नजर रखने के लिये विशेष टीम बनाई गई थी। इसी क्रम में आज विक्रमशिला ट्रेन से उतरे हरिलाल पासवान को भारी थैले के साथ पीछे की ओर से निकलते देखा गया। थैले में एक छोटे बैग में दो फाइलों में हथियार रखा था। इसके साथ ही मोबाइल एवं पहचान पत्र के साथ ही साढ़े चार सौ रुपये नकद भी बरामद किये गये। पूछताछ में उसने बताया कि वह मुंगेर के बनौदा गांव का रहने वाला है। उसके ही गांव के अब्दुल्ला ने उसे यह हथियार देते हुये पटना जंक्शन तक पहुंचाने को कहा था। पुलिस ने जब अब्दुल्ला के मोबाइल नंबर पर संपर्क करने की कोशिश की तो वह बंद मिला। अब्दुल्ला हथियारों की तस्करी करता है। इसके पहले भी हरीलाल से वह पांच पिस्तौल मंगवा चुका है। बदले में उसे पांच सौ रुपये दिये जाते थे। श्री सिंह ने बताया कि अब्दुल्ला के गांव पर भी छापेमारी की जा रही है। राजधानी के फुलवारीशरीफ एवं सब्जीबाग के साथ ही करबिगहिया में भी छापेमारी की गयी। परंतु देर रात तक अब्दुल्ला का पता नहीं चल सका। इंस्पेक्टर श्री सिंह की मानें तो सभी पिस्तौल पर मेड इन यूएसए लिखा है।

भ्रष्टाचार के खिलाफ अन्नामय हुआ नालन्दा



बिहारशरीफः गांधीवादी अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार के मुहिम को पहले से जनसमर्थन मिल रहा था। जब अन्ना की गिरफ्तारी की खबर फैली तो नालंदा में आंदोलन की शुरुआत हो गयी। सिविल सोसायटी ने श्रम कल्याण केन्द्र के मैदान में धरना दिया। इस कार्यक्रम में काफी संख्या में बुद्धिजीवी, युवा, बच्चों ने भाग लिया। शाम में सिविल सोसायटी के लोगों ने हरदेव चौक पर कैंडिल जलाकर विरोध दर्ज किया। इस कार्यक्रम में आई.एम.ए. के अध्यक्ष सियाशरण प्रसाद, डा. अरविंद कुमार, डा. अश्रि्वनी कुमार, डा. अशोक कुमार, सुनील कुमार, रणजीत सिंह, जगलाल चौधरी, प्रो. रामकृष्ण परमहंस, परमेश्वर महतो, महेन्द्र कुमार विकल, अरुण सैनी के अलावा कई लोग उपस्थित थे। नालंदा जिला जदयू के कार्यकर्ताओं ने विरोध मार्चा निकालकर जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। इस मार्च में प्रदेश जदयू के महासचिव डा. विपिन कुमार यादव, प्रो. अशोक कुमार सिंह, जदयू के उपाध्यक्ष सह प्रवक्ता संजय कांत सिन्हा, डिप्टी मेयर नदीम जफर उर्फ गुलरेज, नगर अध्यक्ष बाबर मलिक, रियाजुल हक, अति पिछड़ा प्रकोष्ठ के विपिन चन्द्रवंशी, ओम प्रकाश चौटाला, भागीरथ चन्द्रवंशी, प्रदुमन कुमार के अलावा कई लोग मौजूद थे। माले ने स्थानीय हास्पिटल मोड़ पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का पुतला फूंका। इस मौके पर माले नेता पवन शर्मा, सुरेन्द्र राम, मकसुदन शर्मा, उमेश पासवान, पाल बिहारी लाल, अनिल पटेल, मनमोहन, राज किशोर शर्मा, सिंहासन देवी एवं किशोर कुमार उपस्थित थे। छात्र जदयू ने अन्ना हजारे के गिरफ्तारी के विरोध में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का देवी सराय चौक पर पुतला फूंका। इस मौके पर उपाध्यक्ष जयंत कुमार, अविनाश कुमार, रोहित कुमार के अलावा कई लोग उपस्थित थे। जदयू के उपाध्यक्ष संजय कुशवाहा, चैम्बर आफ कामर्स के अनिल अकेला, बीड़ी मजदूर कल्याण संघर्ष समिति मोर्चा के मो. जाहिद ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए अन्ना की गिरफ्तारी का विरोध किया है। पातंजलि योग समिति के सदस्यों ने विरोध प्रदर्शन करने का दावा करते हुए एक ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा है।

 -दिलीप कुमार गुप्ता

रविवार, 7 अगस्त 2011

कृषि मंत्री ने किया जैविक गांव सोहडीह का दौरा

कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह बिहारशरीफ प्रखण्ड के जैविक गांव सोहडीह पहुंचे और वहां जिला बागवानी मिशन के अनुदान से बन रहे प्याज भंडारण केन्द्र व किसानों के लिए बने चौपाल को देखा। मंत्री किसानों से उनके द्वारा की जा रही जैविक विधि से गोभी की खेती के बारे में जानकारी ली। उन्होंने वर्मी बेड में तैयार किये जा रहे वर्मी कम्पोस्ट के बारे में जानकारी जिला कृषि पदाधिकारी सुदामा महतो एवं जिला उद्यान पदा. देव नारायण महतो से ली। मंत्री नरेन्द्र सिंह ने कहा कि जैविक खेती वक्त की मांग है। रसायन से कई नई-नई बीमारियां सामने आ रही हैं। उन्होंने अपने बचपन के बारे में कहा कि पहले जब खेतों में गोबर की खाद डाली जाती थी तब कभी नहीं गैस, डाइबिटीज व हर्ट अटैक जैसी बीमारियों के बारे में सुनने को मिलता था। सभी बीमारियों की जननी रसायन का अधिकाय खेतों में प्रयोग से हुआ है। इस मौके पर उनके साथ कृषि निदेशक व अन्य पदाधिकारी मौजूद थे। (दिलीप कुमार गुप्ता)

 

बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिलाने की य़ाचिका खारिज

दिलीप कुमार गुप्ता

पटना हाईकोर्ट ने सांसद राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह की उस याचिका में आदेश पारित करने से मना कर दिया, जिसमें बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिलाने का आग्रह किया गया था। अदालत ने जनहित याचिका को निष्पादित करते हुए कहा कि राज्य सरकार स्वयं इस मसले पर पहल कर रही है। अत: इसमें अदालत का हस्तक्षेप मुनासिब नहीं होगा। वैसे भी अदालत की अपनी सीमाएं हैं।

न्यायाधीश एस.के कटरियार एवं न्यायाधीश ए.अमानुल्लाह की खंडपीठ ने बुधवार को इस मामले पर सुनवाई की। सांसद का पक्ष रखते हुए वरीय अधिवक्ता बसंत कुमार चौधरी ने कहा कि वे हाईकोर्ट से यह नहीं चाहते हैं कि 'विशेष राज्य का दर्जा' दिलवा देने का आर्डर दिया जाए ,बल्कि यह चाहते हैं कि इस मामले पर केन्द्र सरकार को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए ताकि आम लोगों को जानकारी हो सके कि 'विशेष राज्य का दर्जा' का हौवा तो नहीं उड़ाया जा रहा है। याचिकाकर्ता यह भी जानना चाहते थे कि विशेष राज्य का दर्जा पाने के लिए कौन-कौन सी शर्ते हैं।
याचिका में कहा गया था कि बिहार का दो बार बंटवारा हो चुका है। पहली बार 1937 में जब बिहार से उड़ीसा अलग हुआ। दूसरी बार 2000 में झारखंड बंट गया। इस तरह से बिहार आर्थिक रूप से कमजोर हुआ। इसके अलावा कई तत्व मौजूद हैं जिसके चलते बिहार को विशेष राज्य का दर्जा मिलना चाहिए। राज्य की ओर से उपस्थित अपर महाधिवक्ता ने याचिकाकर्ता के मांग को सही बताया।

शनिवार, 6 अगस्त 2011

आयकर विभाग के निशाने पर हैं झारखण्ड-बिहार के कई चैनल

ख़बरदार मीडिया डेस्क  से
सब जगह पैसे का ही बोलबाला है. क्योंकि सब कहते हैं कि पैसा बोलता है. अब जब पैसा ज्यादा बोलने लगेगा  तो उसे चुप कराने भी लोग आ ही धमकेंगे.सब को मालूम है कि न्यूज़ चैनलों में पैसा कहां से आता है और किसका लगा होता है. उस पैसों की हकीकत क्या होती हैं. झारखण्ड और बिहार से चलने वाले कुछ रीजनल चैनल भी इसके अपवाद नहीं हैं. इसलिए तो समय समय पर ये न्यूज़ चैनल खुद ही खबर बन जाते हैं. अभी ज्यादा दिन नहीं बीते हैं जब बिहार से चलने वाले एक रीजनल चैनल की पैरेंट्स कंपनी पर इनकम टैक्स वालों ने रेड डाला. इस खबर को जानने के लिए हमें थोडा फ्लैश बैक में जाना होगा। आगे पढ़ें.....

मंगलवार, 2 अगस्त 2011

हरनौत रेल कारखाना का निर्माण अंतिम चरण में

दिलीप कुमार गुप्ता


बिहारशरीफः हरनौत रेल कारखाना का निर्माण अंतिम चरण में है। वहां व्हिल टर्निग का ट्रायल शुरू हो चुका है और बोगी का ट्रायल तीन माह में प्रारंभ हो जाएगा। ट्रायल के लिए पूर्व मध्य रेलवे ने वहां करीब दो दजर्न बोगियां भेजी है. 
रेलकर्मियों को कारखाना के संचालन की तकनीक का विशेष प्रशिक्षण पश्चिम बंगाल के लिलुआ (कोलकाता) के निकट चल रहा है। कर्मियों की एक टीम प्रशिक्षण पाकर वापस भी आ चुकी है। इस समय पूर्व मध्य रेलवे के पास तकरीबन 3000 बोगियां हैं और इनमें से 15 फीसदी से अधिक को हर वर्ष मेन्टेनेंस की जरूरत पड़ती है। इन्हें जरूरत के हिसाब से मेन्टेनेंस के लिए पश्चिम बंगाल के लिलुआ और उत्तर प्रदेश के गोरखपुर भेजा जाता है। हालांकि पैसेन्जर ट्रेनों की बोगियों का मेन्टेनेंस डिविजन में ही हो जाता है। मेल-एक्सप्रेस बोगियों को राज्य से बाहर भेजना पड़ता है।
    137 एकड़ में निर्मित बिहार के इस पहले कोच मेन्टेनेंस फैक्ट्री का शिलान्यास तत्कालीन रेलमंत्री नीतीश कुमार की पहल पर तत्कालीन राष्ट्रपति ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने 30 जून 2003 को किया था। हालांकि इसके निर्माण की गति बेहद धीमी रही। हरनौत वर्कशाप पूरी तरह कम्प्यूटराइज्ड होगा और यहां विश्व की अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल होगा। सिर्फ वर्कशाप पर ही पांच करोड़ रुपए से अधिक की धनराशि खर्च हो रही है। 
रेल डिब्बों का मेन्टेनेंस दो स्तरों पर:
पहला: नौ माह पर
दूसरा:18 माह पर
क्या होगा:
हर साल 600 डिब्बों का मेन्टेनेंस
कोचों का बॉडी, व्हिल, बोगी वर्कशाप
इस समय मेन्टेनेंस होता है:
लिलुआ (कोलकाता, प. बंगाल) में
दानापुर, मुगलराय व धनबाद रेल मंडल के डिब्बों का
गोरखपुर (यूपी) में
सोनपुर व समस्तीपुर मंडल के डिब्बों का
हरनौत रेल कारखाना की खास बातें-
वर्ष 2003 में शिलान्यास
2006 में बनकर होना था तैयार
निर्धारित समय से पांच वर्ष पीछे
98 करोड़ का प्रारंभिक बजट
225 करोड़ रुपए का वर्तमान बजट
300 करोड़ रुपए से अधिक खर्च का अनुमान
137 एकड़ में होगी फैक्ट्री
33 एकड़ में स्टाफ क्वार्टर
इसमें होंगे लगभग 600 स्टाफ 
लगभग 10 हजार अप्रत्यक्ष रोजगार
 "फैक्ट्री निर्माण की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। शीघ्र ही इसका ट्रायल शुरू होगा। इसके बन जाने से पूर्व मध्य रेलवे को बड़ी सुविधा होगी"   -ए.के. चन्द्रा, चीफ इंजीनियर (यांत्रिक), पूर्व मध्य रेलवे

बिहारशरीफ में गंदगी से लोगों को जीना मुश्किल,प्रशासन लापरवाह

दिलीप कुमार गुप्ता 
बिहारशरीफ :कचरे की ढेर व नाले की बजबजाती गंदगी के बीच लोगों को रहना नियति बन गयी है। सफाई के नाम पर नगर निगम प्रशासन सिर्फ खानापूरी कर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं। शहर के सालूगंज, पुलपर सब्जी बाजार, कटरा पर, महलपर, बिचली खंदक आदि स्थानों पर कचरे का ढेर इस कदर लगा है कि वहां पर रहने वाले लोग किसी संक्रमण बीमारी की चिंता से सहमें हैं। वहीं वहां से गुजरने वाले लोगों को नाक व मुंह पर रूमाल रखने के सिवा दूसरा कोई विकल्प नहीं है।
 हैरानी इस बात की है कि आये दिन अखबारों के माध्यम से नगर निगम प्रशासन को सफाई के प्रति ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की जा रही है लेकिन पदाधिकारी मैन पावर व संसाधनों की कमी बता कर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं। खैर मानें की श्रावण मास की आधी माह समाप्ति के बावजूद बरसात ने अभी तक पूरी तरह से दस्तक नहीं दी है। यदि नियमित रूप से तीन-चार दिन बारिश हो गयी तो शहर की स्थिति क्या होगी इसकी कल्पना करना मुश्किल है। बहरहाल यदि सफाई व्यवस्था के प्रति नगर निगम गंभीर नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में यहां के लोग गंभीर बीमारी की चपेट में होगी जिसकी सारी जवाबदेही नगर प्रशासन पर होगी।
  एक दिन के बारिश ने नगर निगम की सफाई व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी है। शहर के अधिकांश सड़कें व मोहल्लों में नाले का पानी सड़कों पर पसर गया है। सुंदरगढ़ मोहल्ला में जल-जमाव से लोगों का आना-जाना मुश्किल हो गया है। वहीं कटरा पर के मैन सड़क पर बजबजाते नाले के भरने के बाद सड़कों पर कचरा पसर गया है जिसके कारण वहां रहने वाले लोगों का जीवन नरक बन गया है। लोग सड़क पर जमे कचरे व जल-जमाव के कारण किसी संक्रमण बीमारी से भयभीत है। इधर नगर निगम प्रशासन को बरसात से पूर्व नाले की सफाई कराने को लेकर कई बार गुहार लगायी गयी लेकिन निगम की ओर से सफाई का काम नहीं कराया गया। परिणाम स्वरूप गंदगी व जल-जमाव के बीच जीवन बसर करना लोगों की नियति बन गयी है। पिछले दिनों हुई घंटे भर की बारिश के बाद पुलपर का मेन चौराहा, महलपर, रामचन्द्रपुर का बस अड्डा का स्थिति नरक में तब्दील हो गया है। स्थिति ऐसी की कीचड़ के सडांस से लोगों का जीना दुश्वार हो गया है।

बुधवार, 27 जुलाई 2011

मौन व्रत खत्म हुआ,अब गांवों में जाकर नीतिश की खोलेंगे पोलः लालू

राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद ने  कहा है कि नीतीश कुमार सरकार का छह महीने तक विरोध न करने का उनका व्रत समाप्त हो गया है और अब वे बिहार के गांवों का दौराकर वर्तमान सरकार की पोल खोलेंगे।
पटना में पार्टी कार्यकर्ता सम्मेलन के बाद लालू ने कहा कि  नीतीश कुमार के विधानसभा चुनाव में जीतने के बाद मैंने कहा था कि छह माह तक मैं उनका कोई विरोध नहीं करूंगा। यही कारण है कि मैं दिल्ली में रह रहा था। अब छह महीने से ज्यादा का समय बीत गया है।
उन्होंने कहा कि इस दौरान यह भ्रम भी फैलाया गया कि वह मंत्री पद पाने के लिए दिल्ली में बैठे हुए हैं। उन्होंने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) पर आरोप लगाया कि वह षडयंत्र कर अन्य पार्टियों के नेताओं पर डोरे डाल रहा है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि किसी के जाने से किसी पार्टी का वजूद समाप्त नहीं होता।
उन्होंने नीतीश पर बिहार राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (बियाडा) की जमीन को औने-पौने दाम में अपने प्रसाद ने कहा कि बिहार की जनता में आक्रोश है और अब वह गांवों की ओर जाएंगे। उन्होंने कहा कि राजद अक्टूबर में 'पटना मार्च' निकालेगी।

रविवार, 24 जुलाई 2011

नीतीश के साथ पटना में "आरक्षण" देखेंगे अमिताभ


बिग बी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को बिहार के विकास के लिए काम करते हुए देखा  है,लेकिन उन्हें इस बात की वेहद खुशी है कि नीतीश फिल्मों के भी शौकिन हैं।
दरअसल नीतीश कुमार अमिताभ बच्चन के बहुत बड़े फैन हैं। इस बात का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने अमिताभ बच्चन को आरक्षण फिल्म साथ देखने का न्यौता भेजा है। वह अमिताभ के साथ बैठकर आरक्षण फिल्म देखना चाहते हैं। कहतें हैं कि अमिताभ ने नीतीश का यह न्योता  स्वीकार कर लिया हैं ।

गुरुवार, 18 मार्च 2010

नीतीश जी के सुशासन की सरेआम पोल खोल रहा है नालंदा का डी.एम.संजय कुमार अग्रवाल

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के घर-जिले नालंदा में आज एक चौंकाने वाली बात उभरकर सामने आई है. यहाँ पदास्थापित डी.एम. संजय कुमार अग्रवाल जो श्री कुमार के अत्यंत विश्वासपात्र प्रशासनिक आला अधिकारी माने जाते है.उनकी भी सारी गतिविधियाँ महज मीडीया की चौखट तक ही सीमित नज़र आती है और इस सन्दर्भ में विश्लेषक उन्हें “मीडीया मैनेजमेंट” के माहिर अधिकारी बताते है.
वहारहाल, आज नालंदा में डी.एम. श्री अग्रवाल ने “जनता दरबार” लगाई थी.यह दरबार जनसमस्याओं को लेकर कम और स्थानीय अखबारों में सुर्खियाँ पाने को लेकर अधिक चर्चित रहा है.यहाँ सबसे दुर्भाग्यजनक पहलू है कि अखबारों से जुड़े लोगों के लिए भी पत्रकारिता कोई व्यवसाय नहीं अपितु धंधा बन गया है.
कहते हैं कि जिले के हिलसा अनुमंडल के नगरनौसा प्रखंड-अंचल के रामपुर पंचायत अंतर्गत लोदीपुर गांव निवासी एक व्यक्ति ने जनता दरबार में डी.एम. संजय कुमार अग्रवाल से शिकायत करते हुये बताया कि एन.एच.३०(ए) अवस्थित बोधीबिघहा रामघाट से रामपुर पंचायत भवन तक प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क निर्माण योजना के तहत मार्ग-निर्माण में ठेकेदार ने रात्रिकाल में अपनी दवंगता दिखाते हुये उनकी रैयती जमीन के एक हिस्से को गढ्ढा कर दूसरे हिस्से को भर दिया.जबकि सरकारी तौर पर उसे इस सन्दर्भ में कोई आदेश-निर्देश नहीं दिया गया था.जिला प्रशासन के अधिकारिओं ने तब उक्त ठेकेदार की दबंगई को सही करार देते हुये शिकायतकर्ता के कुल १४ डीसमील जमीन पर जबरन कार्य करने की पुष्टि की थी और न्यायोचित कार्रवाई करने का भरोसा दिया था.लेकिन आज जब जनता दरबार में जिले के डी.एम. का लिखित ध्यान इस ओर दिलाया गया तो इस श्रीमानजी का जबाब समूचे शासन व्यवस्था को झकझोर कर रख देता है.शिकायतकर्ता को डी.एम.साहेब का कहना था कि कार्रवाई करना या जमीन का मुआबजा देना सरकार का काम है और वे सरकार नहीं हैं. इसके आगे डी.एम.अग्रवाल साहेब ने जो जबाब दिया उसे सुनने पर किसी का भी माथा ठनक जाएगा. इस साहब का कहना था कि वे अधिक से अधिक शिकायतकर्ता की जमीन वापस कर सकते हैं.
सच पूछिए तो नालंदा के डी.एम.संजय कुमार अग्रवाल ने जिस लहजे में शिकायतकर्ता की समस्या को सुलझाने/टरकाने का प्रयास किया.,उस तरह का अंदाज किसी आईपीएस अधिकारी से उम्मीद नहीं की जा सकती और न हीं शोभा ही देता है.यह तो एक चपरासी को भी मालूम होता है कि एक जिले में डी.एम. का पद तथा उसकी जबाबदेही किस तरह की होती है.