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मंगलवार, 23 अगस्त 2011

कौन है रांची के इस चैनल का मालिक! कौन चला रहा है इसे!

सावधान ! कहीं अगले शिकार आप तो नहीं? 
झारखण्ड ( रांची) से एक चैनल का प्रसारण किया जाता है.  नाम पहचाने के लिए कोई खास जद्दोजहद की जरूरत नहीं पड़ेगी... अभी केवल दो चैनलों का ही प्रसारण रांची से किया जाता है और संयोगवश दोनों ही चैनल नोएडा से प्रसारित हो रहे एक चैनल के द्वारा प्राप्त किये गए लाइसेन्स पर चल रहे हैं...  इन्हीं दोनों चैनलों में से एक चैनल है जिसमे सन्दर्भ में चर्चा की गयी है.
इस चैनल के तथाकथित मालिक एक पूर्व मीडियाकर्मी रह चुके हैं... तथाकथित इसलिए कि मालिक के सन्दर्भ में कई भ्रांतियां है... कोई कहता है इसका मालिक विनोद सिन्हा है...  कोई कहता है इसका मालिक एक पूर्व मुख्यमंत्री है... कोई कहता है इसका मालिक एक पूर्व संपादक है,  जो एक प्रतिष्ठित दैनिक अखबार से इस्तीफा देकर आये हैं.
खैर मालिक जो भी हो... पर इस तथाकथित मालिक के मानव संसाधन प्रबंधन कला की दाद देनी होगी... हर एक व्यक्ति/पद का रिप्लेसमेंट तैयार कर के रखता है यह तथाकथित मालिक... वो चाहे चैनल हेड का पद हो अथवा इनपुट हेड, आउट पुट हेड, सेल्स हेड, ईएनजी हेड, या फिर सामान्य रिपोर्टर, कैमरामैन, एकाउंटटेंट या ड्राईवर... होना भी चाहिए... क्यों न हो भला... अगर किसी ने अचानक से नौकरी छोड़ दी तो चैनल बंद नहीं हो जाएगा? दिखने में तो यह एक सामान्य घटना नज़र आती है... लेकिन इसके पीछे का मानव संसाधन प्रबंधन कुछ और ही है... जब जब ऐसे विकल्प तैयार किये हैं इस तथाकथित मालिक ने तो उस समय शामत आई है उस व्यक्ति की...  जिसका विकल्प तैयार किया गया है.
हरिनारायण सिंह आये तो छुट्टी हुयी सुशील भारती एवं मनोज श्रीवास्तव की... वेद प्रकाश तैयार हुए तो छुट्टी हुयी अफरोज आलम एवं विशाल कौशिक की... राकेश सिन्हा तैयार हुए तो छुट्टी हुयी मधुरशील की... रविन्द्र सहाय तैयार हुए तो छुट्टी हुयी कुंदन कृतज्ञ की... प्रशांत भगत तैयार हुए तो छुट्टी हुयी राजेश की... अब एक नया गुल खिला है... एक और शख्‍स की छुट्टी करने की तयारी की जा रही है... उनको रिप्लेस करने के लिए एक मैडम को ज्वाइन कराया गया है...  जिनकी तनख्वाह है 11लाख 70हज़ार वार्षिक... उनकी कई विशेषताएं हैं... उनमें से एक यह है कि वो इस तथाकथित मालिक के उपनाम की ही हैं.
वाह रे दुनिया... 5लाख 40 हज़ार को रिप्लेस करेंगे 11 लाख 70 हज़ार से... सुरखाब के पर लगे हैं मैडम को... यह हँसने की नहीं चिंता करने का विषय है... कहीं अगला नंबर आपका तो नहीं... चैन से काम करना है तो जाग जाओ... देखो कहीं अगली कहानी आपकी तो नहीं... 
कुछ पुराने प्रचलित मुहावरे हुआ करते हैं..." जाके पैर न फटे बेवाई, वो क्या जाने पीर पराई".... "बाँझ क्या जाने परसौत की पीड़ा"... बोलचाल की भाषा की यदि बात करें तो कह सकते हैं कि इन दोनों मुहावरों के भावार्थ सामान हैं... सामान्य मानव मनोविज्ञान भी यही कहता है कि आप तब तक किसी परेशानी का हल नहीं ढूँढते हैं जब तक वो आपके घर में दस्तक नहीं दे देती है...  ( http://www.khabardarmedia.com/ से साभार)

शनिवार, 20 अगस्त 2011

टीआरपी की होड़ में मर गई मीडिया की नैतिकता!

 टीआरपी की होड़ में आजकल के अखबार और चैनल्स कुछ भी करने को तैयार दिख रहे हैं. कुछ कर दिखाने का ऐसा जुनून की संसाधनों के अभाव में भी हर पांच मिनट बाद फायर होता है ब्रेकिंग न्यूज. भले ही स्पॉट पर अपने रिपोर्टर हो न हों, अपनी ओवी हो न हो लेकिन इन्हें तो दूसरे चैनल से लाइव काटने में महारत हासिल है. लगभग सभी रिजनल चैनल और कई नेशनल चैनलों के पास चलने वाले ज्यादातर फूटेज चोरी के होते हैं. मगर फिर भी सब करेंगे नंबर 1 होने का दावा. आखिर कहां गई पत्रकारों की नैतिकता? क्यों खोखली होती जा रही है लोकतंत्र के इस महत्वपूर्ण स्तंभ की नींव? मुंबई विस्फोट से लेके संसद पर हमले के लिए सरकार और प्रशासनिक तंत्र को जिम्मेवार ठहराने वाली मीडिया कितनी दूध की धुली हुई है ये हम और आप जानते हैं. पत्रकारिता का स्तर इतना क्यों गिर गया है? सिस्टम में खराबी और सरकार को नैतिकता और जिम्मेवारी की सीख देने वाली मीडिया को क्या अपने गिरेबान में झांकने की जरुरत नहीं है? मीडिया छोटी-बड़ी गलती के लिए सरकार को घेरने की कोशिश में रहती है? लेकिन कभी ये सोंचा है कि अगर सरकार और सिस्टम मीडिया को इसकी जिम्मेवारी सिखाने की जिद ठान ले तो क्या होगा ? अमर्यादित ढ़ंग से पत्रकारिता करने, बेहूदी खबरें चलाने, बड़ी खबरों को देर से दिखाने जैसे कई मुद्दे पर अगर लोकतंत्र के तीन अन्न स्तंभ मीडिया को घेरे में लेने लगे तो शायद मीडिया को अपनी औकात पता चल जाएगी. ध्यान दिलाना चाहूंगा कि मुंबई विस्फोट के दिन एक केंद्रीय मंत्री फैशन शो का लुत्फ उठाते नजर आये तो न्यूज चैनलों ने मंत्रीजी जी को जमकर धो डाला. मुंबई हमले की खबर से भी बड़ी खबर बन गयी मंत्री जी के फैशन शो में उपस्थिति. क्या सिर्फ मंत्रीजी देश के जिम्मेवार नागरिक हैं? ये ठीक है कि केन्द्रीय मंत्री होने के नाते राष्ट्र के प्रति उनकी जिम्मेवारी सबसे ज्यादा है. और दुख की इस घड़ी में उन्हें जनता के साथ होना चाहिए था. लेकिन क्या जिन पत्रकारों ने मंत्री जी की उस वक्त की बहुमूल्य तस्वीर अपने कैमरे में कैद की उन्होंने भी अपनी नैतिकता दिखाई? जब मुंबई में विस्फोट हुआ देश के सभी मीडियाकर्मीयों का ये दायित्व था कि कम से कम एक दिन तो सिर्फ और सिर्फ विस्फोट से संबंधित खबरों को दिखाते और उसका ही कवरेज करते. अगर मीडिया अपनी नैतिक जिम्मेवारी बखूबी समझता है तो फिर विस्फोट की खबरों की प्रतिक्रिया लेने के बजाए हमारे पत्रकार बंधु वहां फैशन शो का लुत्फ क्यों उठा रहे थे? अपने दायरे में रहकर लोगों को सच्ची खबरें दिखाने का दायित्व मीडिया को है, मगर सवाल ये है कि क्या आज मीडिया अपने दायरे में है?

सोमवार, 15 अगस्त 2011

सन्मार्ग से बैजनाथ मिश्र की छुट्टी! रजत गुप्ता की वापसी!

रांची से प्रकाशित हिंदी दैनिक सन्मार्ग से वरिष्ठ पत्रकार श्री बैजनाथ मिश्र (हाल ही में राज्य सूचना आयुक्त के पद से सेवानिवृत हुए) की विदाई हो गई है। वे पिछले पखवारे ही इस अखबार के पीआरबी अधिनियम के तहत समाचारों के लिए जिम्मेवार(!) प्रधान संपादक बनाये गए थे। श्री मिश्र के सन्मार्ग जैसै छोटे अखबार से इतनी जल्दी विदाई की किसी ने कल्पना भी न की होगी। अखबार के आज 15 अगस्त के प्रिंट लाइन के अनुसार रजत कुमार गुप्ता संपादक पद पर वापस लौट आए हैं और अखबार के मुद्रक-प्रकाशक प्रेम ने भी संपादक पद छोड़ दिया है।
हिंदी दैनिक सन्मार्ग में अचानक हुए इस फेरबदल से झारखंड की पत्रकारिता में सनसनी फैल गई है। लोग तरह-तरह की अटकलें लगा रहे हैं।हालांकि अखबार से कुछ लोग इसे प्रिंटिंग मिस्टेक बता रहे हैं,लेकिन संपादकीय पेज पर प्रिंट लाइन में ऐसी गलतियां संभव नहीं है।

मंगलवार, 9 अगस्त 2011

झारखंडी पत्रकारिता के बाबा की निगरानी के बाद भी दैनिक सन्मार्ग की ये हालत!

हाल ही में राज्य सूचना आयुक्त के पद से सेवा निवृत हुए वरिष्ठ पत्रकार बैजनाथ मिश्र झारखंड की पत्रकारिता के बाबा कहे जाते हैं।उनकी मांग का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने अपनी सेवानिवृति के दूसरे दिन ही रांची से प्रकाशित दैनिक सन्मार्ग के प्रधान संपादक बन गए।लोगों को उनसे काफी उम्मीदें थी,लेकिन अखबार की हालत सुधरने के बजाय और बिगड़ती जा रही है।इसका एक ताजा बानगी आप देख सकते हैं कि संपादकीय पेज पर प्रसुन्न वाजपेयी जी के शीर्ष आलेख का शीर्षक क्या है।ऐसी गलतियां अखबार के सभी पृष्ठों पर नित्य दिन बहुतयात देखने को मिल रहे हैं।
इस अखबार के संपादक हैं..पत्रकारिता से कोसों दूर प्रेम उर्फ प्रेमशंकरण,जो पेशे से बिल्डर व्यवसायी हैं।इस अखबार में एक बात और काबिलेगौर दिख रही है कि प्रिंट लाइन में संपादक के बजाय प्रधान संपादक महोदय पीआरबी अधिनियम के तहत खबरों के चयन के जिम्मेवार बताये गए हैं।

शनिवार, 6 अगस्त 2011

आयकर विभाग के निशाने पर हैं झारखण्ड-बिहार के कई चैनल

ख़बरदार मीडिया डेस्क  से
सब जगह पैसे का ही बोलबाला है. क्योंकि सब कहते हैं कि पैसा बोलता है. अब जब पैसा ज्यादा बोलने लगेगा  तो उसे चुप कराने भी लोग आ ही धमकेंगे.सब को मालूम है कि न्यूज़ चैनलों में पैसा कहां से आता है और किसका लगा होता है. उस पैसों की हकीकत क्या होती हैं. झारखण्ड और बिहार से चलने वाले कुछ रीजनल चैनल भी इसके अपवाद नहीं हैं. इसलिए तो समय समय पर ये न्यूज़ चैनल खुद ही खबर बन जाते हैं. अभी ज्यादा दिन नहीं बीते हैं जब बिहार से चलने वाले एक रीजनल चैनल की पैरेंट्स कंपनी पर इनकम टैक्स वालों ने रेड डाला. इस खबर को जानने के लिए हमें थोडा फ्लैश बैक में जाना होगा। आगे पढ़ें.....

ईटीवी उर्दू के पत्रकार की दिनदहाड़े गोली मार कर दिल्ली में हत्या

उत्तरी पूर्वी दिल्ली के वेलकम इलाके में ईटीवी उर्दू के एक पत्रकार अकरम लतीफ को कुछ बदमाशों ने गोली मार दी। जामिया मिलिया से सन 2003-04 बैच में पत्रकारिता की शिक्षा प्राप्‍त करने वाले अकरम पहले ईटीवी, हैदराबाद मे कार्यरत  थे और कुछ दिनों पहले ही उनका तबादला अमरोहा कर दिया गया था। बताया जा रहा है कि अकरम अमरोहा से सांसद राशिद अल्वी के यहां दिल्ली में होने वाली को इफ्तार पार्टी की कवरेज़ के लिए आए थे, लेकिन जफराबाद रोड पर उन्हें गोली मार दी गई।
हालांकि पुलिस सूत्रों ने कहा है कि शुरुआती जानकारी के अनुसार लूटपाट का विरोध करने पर अकरम को गोली मारी गई है, लेकिन उनके घरवालों ने दावा है कि यह एक साजिश का नतीज़ा है। अकरम के भाई आलम ने मीडिया दरबार को बताया कि उन्हें कई दिनों से धमकी मिल रही थी। आलम के मुताबिक अकरम अमरोहा की बस से उतरने के बाद किसी की  मोटरसाइकिल पर सांसद के यहां जा रहे थे, लेकिन अब न मोटरसाइकिल है न मोटरसाइकिल का मालिक।

अमिताभ बच्चन और पटना के अधकचरे पत्रकार

सदी के महानायक का दर्ज़ा पा चुके अमिताभ बच्चन अपनी आने वाली फिल्म आरक्षण के प्रचार के लिए जब बिहार की राजधानी पटना पहुंचे तो दो दिनों के अपने प्रवास के दौरान उन्होंने कई खट्टे-मीठे अनुभव लिए भी और दिए भी। वे बिहार आए तो थे प्रकाश झा के अनुरोध पर लेकिन मीडिया से ऐसे दो-चार हुए कि उन्हें यह अनुभव याद रहे ना रहे, वहां के पत्रकारों पर उनके अनोखे कलात्मक व्यक्तित्व की छाप शायद वर्षों तक रहे।
अमिताभ से जो भी मिला, उनके अत्यंत विनम्र अंदाज और सहज आत्मीय भाव का फैन बन गया। यहाँ तक कि प्रकाश झा के शॉपिंग मॉल और मल्टीप्लेक्स परिसर में मेले जैसी भीड़ के बीच आयोजित ‘प्रेस कॉन्फ्रेंस’ में हास्यास्पद सवालों से भी उनका संयम नहीं टूटा। अपने करीयर की शुरुआत में मीडिया को नो-एंट्री कह कर विवादों में रह चुके अमिताभ ने प्रेस कांफ्रेंस मे घुस आए कुछ अति उत्साही युवा मीडियाकर्मियों के बार-बार पूछे गए अटपटे और मूर्खतापूर्ण सवालों पर भी अमिताभ ने ख़ुद को असहज नहीं होने दिया।
सवालों की बानगी देखिए। एक नौजवान पत्रकार ने बड़ी ही संजीदगी से पूछा, ”आप को नहीं लगता कि जब भगवान को एक्टिंग करने का मन किया तो वो आप के रूप में अवतरित हुए?” इस पर जहां इक तरफ हॉल में मौजूद पत्रकार बगलें झांकने लगे वहीं अमिताभ क्या बोलूँ का भाव लिए हुए चुप ही रहे।
एक अन्य पत्रकार ने पूछा, ”कल आप बंगलौर में थे, तो क्या उसी शहर में कभी शूटिंग के दौरान अपने साथ हुए हादसे को आपने याद नहीं किया?”
अमिताभ बच्चन इस सवाल पर क्षण भर के लिए सोच में पड़ गए, फिर थोड़ा सोच कर कहा, ”किसी शहर को मैं किसी दुर्घटना के साथ जोड़ कर याद नहीं करता।
अभी सवाल-जवाब चल ही रहा था कि किसी मीडियाकर्मी ने अमिताभ से फ़रमाइश कर दी कि वे अपनी किसी भोजपुरी फ़िल्म का डायलॉग सुनाएं। अमिताभ थोड़े सकपकाए, फिर विनम्रता से कहा कि अभी याद नहीं है। फ़ौरन किसी ने अनुरोध मारा कि चलिए अपनी फ़िल्म का कोई गाना ही सुना दीजिए। बिल्कुल अपमान जनक सी लग रही स्थिति को ख़ुद अमिताभ बच्चन ने ही बहुत शालीनता के साथ संभाला। उन्होंने साथ में बैठे प्रकाश झा और मनोज बाजपेयी समेत तमाम पत्रकारों को हो रही शर्मिंदगी का ख़्याल करते हुए इस फरमाइश को हंस कर टाल दिया।
इतने में किसी ने सवाल उछाला, ”मुंबई फ़िल्म उद्योग के सबसे स्मार्ट और अभी भी जवान जैसी आपकी शक्ल-सूरत का राज़ क्या है? इस पर उनके अभिनय-कुशल मन से रहा नहीं गया और झट गंवई अंदाज में बोले, ”अरे ई सब आप ने कहाँ से देख लिया? यहाँ तो बाल-वाल सब सफ़ेद पड़े हैं।”
लेकिन बात यहीं रुकी नहीं और ज़ोर से किसी ने सवाल दागा- अच्छा ये तो बताइए कि आप अपने घर में पोती का इंतज़ार कर रहे हैं या पोता का। अमिताभ ने सहज भाव से जवाब दिया कि वे बेटा या बेटी में भेदभाव नहीं करते। सवाल पूछने वाले बुद्धिमान मीडियाकर्मी (पत्रकार नहीं लिखा जा सकता) को इस जवाब से संतोष नहीं हुआ और उसने पहले से भी अधिक ज़ोर डालकर पूछा, ”फिर ये तो बता दीजिए कि ये ख़ुशख़बरी हमलोगों को कब तक मिलेगी?”
इस बार अमिताभ ने नहले पर दहला मारा और हास्यपूर्ण शरारती मुद्रा में हाथ जोड़कर तपाक से कहा, ”भाई साहब, मैं गर्भवती नहीं हूँ।” इतना सुनना था कि पूरा हॉल ज़ोरदार ठहाके से देर तक गूंजता रहा। (मीडिया खबर)

सोमवार, 1 अगस्त 2011

कम से कम कॉल तो कर लो पत्रकारिता के निकम्मों !!

हर जगह रिज्यूम  देकर आ गया, लेकिन कहीं से कोई सुगबुगाहट नहीं है। रिज्यूम में साफ-साफ लिखा है कि मैं न्यूज़ रूम साफ्टवेयर पर काम करना अच्छी तरह से जानता हूँ। स्क्रिप्टिंग भी काफी अच्छी कर लेता हूँ।  साथ-साथ हर वो काम करना जानता हूँ,जो कि एक न्यूज़ चैनल की प्रोडक्शन टीम में होता है। फिर भी किसी अंधे को दिखता क्यों नहीं कि जिसने भी अपना रिज्यूम दिया है और उसमें लिखा क्या है। किसी के अन्दर ईमानदारी नाम की कोई चीज़ नहीं है। सब जानते है कि किस को कब और कैसे काम पर रखना है। मेरे पास लगभग हर चीज़ है पर फिर भी किसी जगह से कॉल क्यों नहीं आती है ! कारण है कि मेरे पास मीडिया में काम करने के लिए सबसे जरूरी क्वालिटी सिफारिश नही है।
कई ऐसे लोग हैं, जिनको ढंग से हिंदी टाइपिंग भी नहीं आती है और वह शहर के नामी गिरामी चैनलों में काफी अच्छी जगहों पर काम कर रहे हैं। उनमें से कुछ  नाम तो ऐसे है जिन्हें कुछ भी नहीं आता और जब भी मुझसे मिलते है तो कुछ ना  कुछ पूछते ही हैं। अब ऐसे लोग कैसे बहाल हो गये, किसी के पास है इस बात का जवाब ! जवाब हर वो इंसान जानता है जो इस क्षेत्र से जुड़ा हुआ है।
अगर मेरे पास किसी की सिफारिश नहीं है, किसी की पैरवी नहीं है तो इसमे मेरा क्या दोष है! मैं जानता हूं कि मै किस काम को ज्यादा अच्छे से कर सकता हूँ। मेरा कहने का सिर्फ इतना ही मकसद है कि जो अपना रिज्यूम कहीं जमा करते हैं तो उनलोगों को चाहिये कि जो उसने लिखा है वो सही है या नहीं,उसकी जाँच तो कर लें। पर कोई ये ज़हमत उठाना नहीं चाहता,क्योंकि उनके रिज्यूम पर किसी का रेफरेंस नहीं लिखा होता है।
इस बात का उदाहरण है पटना का एक बहुत बड़ा अख़बार, जोकि अपने आप को सबसे बड़ा अख़बार बताता है। उसमें परीक्षा आयोजित कि गई थी। मैं और मेरे कुछ मित्र परीक्षा देने के लिए बड़े मन से तैयारी कर के गये थे। परीक्षा शुरू हुई। अचानक हमने सुना कि जो लोग वहाँ बैठे थे। निरीक्षण करने के लिए उनमें वो महोदया भी बैठी थी, जो कि वहाँ की एचआर थीं और उनकी देखरेख में हीं चयन की सारी प्रक्रिया सम्पन्न होनी थी। ख़ुद वह बोल रही थी कि “क्या बेकार में परीक्षा का आयोजन किया है जबकि पहले से ही सारी सीटें बुक हो चुकी हैं”।
इस बात से क्या पता चलता है यही कि जहां भी जाओ वहां प्रत्यक्ष रूप से तो नहीं, पर परोक्ष रूप से नो वैकेंसी  की तख्ती अन्दर से लगी रहती है। यदि किसी बाहर के आदमी को रखना हीं नहीं है तो साफ-साफ क्यों नहीं एक तख्ती पर लिख कर टांग देते कि यहां केवल सिफारिश वालों को ही रखा जाता है।
शिकायत है कि अगर आप के यहाँ कोई अपना रिज्यूम जमा करता है तो कम से कम उसको बुलाकर यह तो जांच कर लो कि वह जो दावे कर रहा है,उसमें कितनी सच्चाई है। यदि उसके बाद लगे कि वह किसी काम का नहीं है तो उसे बाहर का रास्ता दिखा दो । कम से कम कॉल तो करो।

रविवार, 31 जुलाई 2011

क्यों लगता है ऐसा हो गया अंधा भारत का अपना कानून !!

त्रासदी ही है कि एक लड़की के बलात्कार और हत्या के आरोपी की सजा इस बिना पर कम कर दी जाए कि वह शादीशुदा है और एक लड़की का बाप भी। अभी कुछ साल पहले की दलील कुछ ऐसी थी कि युवक एक आईपीएस अफसर का बेटा है और साथ ही भावी वकील भी।
यह युवक संतोष कुमार सिंह है जिस पर 14 साल पहले कानून की विद्यार्थी प्रियदर्शिनी मट्टू के बलात्कार और हत्या का आरोप है। सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले को सुनते हुए 3 दिसंबर, 1999 की दोपहर याद आ गई जब एडिशनल सेशन जज जी पी थरेजा ने 499 पेज के अपने फैसले में कहा था- हालांकि मैं जानता हूं कि संतोष ने ही इस अपराध को अंजाम दिया है लेकिन मैं उसे संदेह का लाभ देते हुए बरी करता हूं। ऐसा लगता है कि कानून उन लोगों के बच्चों पर लागू नहीं होते जिन पर खुद कानून को लागू करने की जिम्मेदारी होती है। अपने फैसले में थरेजा ने माना था कि दिल्ली पुलिस ने जांच के दौरान संतोष को मदद दी। मामले में इंस्पेक्टर ललित मोहन ने झूठे सबूत गढ़ने और अभियुक्त के बचाव का माहौल तैयार करने में भूमिका निभाई। बाद में सीबीआई के हाथों जांच की कमान आने पर भी डीएनए के साथ छेड़छाड़ दिखाई दी। इसलिए यह जांच भारतीय साक्ष्य
अधिनियम की धारा 45 मददगार साबित नहीं हो सकी। यहां तक कि प्रियदर्शिनी के नौकर और महत्वपूर्ण गवाह को ढूंढा नहीं जा सका। (यह बात अलग है कि प्रिंट का एक जुझारू पत्रकार इस नौकर को बिहार के एक गांव में ढूंढ निकालता है और उसका पक्ष छाप भी देता है) कुल मिलाकर यह मामला पुलिस और जांच एजेंसियों की सांठगांठ और लापरवाही का नमूना साबित हुआ। उंगलियों के निशान, हेलमेट के रखाव और अंदरूनी कपड़ों तक के मामले में जो उदासीनता बरती गई, उसने इस मामले को कमजोर बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। पूर्व राष्ट्रपति के आर नारायण ने इस मामले की दुर्भाग्यपूर्ण हालत देखते हुए कहा था कि न्याय के रक्षा मंदिर अब केसिनो में तब्दील हो गए हैं।
थरेजा की टिप्पणियों ने दिल्ली पुलिस के बेहद पक्षपातपूर्ण रवैये की धज्जियां उड़ा दी थीं। शरीर पर 19 जख्मों के निशान लिए प्रियदर्शिनी की जांच करने में पुलिस ने न सिर्फ कोताही बरती थी बल्कि पूरी लीपापोती भी थी की क्योंकि उस समय संतोष के पिता पुलिस महानिरीक्षक थे।
खैर, 1999 की उस दोपहर संतोष तकरीबन हंसते हुए पटियाला हाउस कोर्ट से बाहर निकला था। उसकी खुशी और फुर्ती देखने लायक थी। उस दिन मीडिया के लिए उसकी एक तस्वीर को कैद करना बड़ा मुश्किल साबित हुआ था और उसकी हंसी देख कर किसी भी कैमरामैन के लिए विश्वास करना आसान नहीं था कि यही वह अभियुक्त है जिस पर धारा 302 और 376 कोई असर नहीं छोड़ सकी। वैसी ही हंसी जिसने रूचिका ममाले में आला पुलिस अधिकारी राठौर को जेल भिजवा दिया था।
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। केस आगे बढ़ता गया। प्रियदर्शिनी का परिवार हमेशा के लिए दिल्ली छोड़ कर जम्मू जा बसा था लेकिन वे न्याय पाने के लिए सक्रिय रहे। प्रियदर्शिनी के दोस्तों ने जस्टिस फार प्रियदर्शिनी की मुहिम चलाई और इंडिया गेट पर जाने कितनी मोमबत्तियां जलाकर सोते हुए समाज और न्यायिक व्यवस्था को झकझोरने की कोशिश की। जेसिका लाल और नीतिश कटारा मामले की तरह प्रियदर्शिनी की हत्या को भी जनता और मीडिया ने बराबर जिंदा रखा। इन दोनों ने ही न्यायालिका को कुछ भी भूलने नहीं दिया।
लेकिन जनता और मीडिया की एक आदत थोड़े से न्याय के बाद थक जाने की भी होती है। ताजा फैसले के तहत संतोष के बीवी-बेटी की दुहाई दी गई है। लगता है अब एक बार फिर जनता और मीडिया का काम शुरू होता है। क्या परिवार नामक संस्था से जुड़ जाने से अपराध कम हो जाता है और अपराधी अतिरिक्त संवेदना का पात्र बन जाता है, वह भी ऐसी स्थिति में जब कि अपराधी अब भी अपने अपराध को कबूल करने को राजी नहीं।.....@अनुभव भारतीय

जी हां,ये हैं भारतीय मीडिया के खेवनहार या खिचड़ी परिवार

मीडिया दो तबके के ही लोगों के लिए है। एक तो आर्थिक रुप से बहुत कमजोर…और दूसरा जो आर्थिक तौर पर मजबूत है और तीसरा तबका जो मध्यवर्गीय है, जो मीडिया में तो आ जाता है, लेकिन अपने को भंवर में फंसा महसूस करता है
इसका राज है...
अरुंधती रॉय, प्रणय रॉय (नेहरु डायनेस्टी टीवी- NDTV) की भांजी हैं।
-प्रणय रॉय “काउंसिल ऑन फ़ॉरेन रिलेशन्स” के इंटरनेशनल सलाहकार बोर्ड के सदस्य हैं।
-इसी बोर्ड के एक अन्य सदस्य हैं मुकेश अम्बानी।
-प्रणय रॉय की पत्नी हैं राधिका रॉय।
-राधिका रॉय, वृन्दा करात की बहन हैं।
-वृन्दा करात, प्रकाश करात (CPI) की पत्नी हैं।
-प्रकाश करात चेन्नै के “डिबेटिंग क्लब” के सदस्य थे।
-एन राम, पी चिदम्बरम और मैथिली शिवरामन भी इस ग्रुप के सदस्य थे।
-इस ग्रुप ने एक पत्रिका शुरु की थी “रैडिकल रीव्यू”।
-CPI(M) के एक वरिष्ठ नेता सीताराम येचुरी की पत्नी हैं सीमा चिश्ती।
-सीमा चिश्ती इंडियन एक्सप्रेस की “रेजिडेण्ट एडीटर” हैं।
-बरखा दत्त NDTV में काम करती हैं।
-बरखा दत्त की माँ हैं श्रीमती प्रभा दत्त।
-प्रभा दत्त हिन्दुस्तान टाइम्स की मुख्य रिपोर्टर थीं।
-राजदीप सरदेसाई पहले NDTV में थे, अब CNN-IBN के हैं
-राजदीप सरदेसाई की पत्नी हैं सागरिका घोष।
-सागरिका घोष के पिता हैं दूरदर्शन के पूर्व महानिदेशक भास्कर घोष।
-सागरिका घोष की आंटी रूमा पॉल हैं।
-रूमा पॉल उच्चतम न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश हैं।
-सागरिका घोष की दूसरी आंटी अरुंधती घोष हैं।
-अरुंधती घोष संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थाई प्रतिनिधि हैं।
-CNN-IBN का “ग्लोबल बिजनेस नेटवर्क” (GBN) से व्यावसायिक समझौता है।
-GBN टर्नर इंटरनेशनल और नेटवर्क-18 की एक कम्पनी है।
-NDTV भारत का एकमात्र चैनल है को “अधिकृत रूप से” पाकिस्तान में दिखाया जाता है।
-दिलीप डिसूज़ा PIPFD (Pakistan-India Peoples’ Forum for Peace and Democracy) के सदस्य हैं।
-दिलीप डिसूज़ा के पिता हैं जोसेफ़ बेन डिसूज़ा।
-जोसेफ़ बेन डिसूज़ा महाराष्ट्र सरकार के पूर्व सचिव रह चुके हैं।
-तीस्ता सीतलवाड़ भी PIPFD की सदस्य हैं।
-तीस्ता सीतलवाड़ के पति हैं जावेद आनन्द।
-जावेद आनन्द एक कम्पनी सबरंग कम्युनिकेशन और एक संस्था “मुस्लिम फ़ॉर सेकुलर डेमोक्रेसी” चलाते हैं।
-इस संस्था के प्रवक्ता हैं जावेद अख्तर।
-जावेद अख्तर की पत्नी हैं शबाना आज़मी।
-करण थापर ITV के मालिक हैं।
-ITV बीबीसी के लिये कार्यक्रमों का भी निर्माण करती है।
-करण थापर के पिता थे जनरल प्राणनाथ थापर (1962 का चीन युद्ध इन्हीं के नेतृत्व में हारा गया था)।
-करण थापर मरहूम बेनज़ीर भुट्टो और ज़रदारी के बहुत अच्छे मित्र रहे हैं।
-करण थापर के मामा की शादी नयनतारा सहगल से हुई है।
-नयनतारा सहगल, विजयलक्ष्मी पंडित की बेटी हैं।
-विजयलक्ष्मी पंडित, जवाहरलाल नेहरू की बहन हैं।
-मेधा पाटकर नर्मदा बचाओ आन्दोलन की मुख्य प्रवक्ता और कार्यकर्ता हैं।
-नबाआं को मदद मिलती है पैट्रिक मेकुल्ली से जो कि “इंटरनेशनल रिवर्स नेटवर्क (IRN)” संगठन में हैं।
-अंगना चटर्जी IRN की बोर्ड सदस्या हैं।
-अंगना चटर्जी PROXSA (Progressive South Asian Exchange Network) की भी सदस्या हैं।
-PROXSA संस्था, FOIL (Friends of Indian Leftist) से पैसा पाती है।
-अंगना चटर्जी के पति हैं रिचर्ड शेपायरो।
-FOIL के सह-संस्थापक हैं अमेरिकी वामपंथी बिजू मैथ्यू।
-राहुल बोस (अभिनेता) खालिद अंसारी के रिश्ते में हैं।
-खालिद अंसारी “मिड-डे” पब्लिकेशन के अध्यक्ष हैं।
-खालिद अंसारी एमसी मीडिया लिमिटेड के भी अध्यक्ष हैं।
-खालिद अंसारी, अब्दुल हमीद अंसारी के पिता हैं।
-अब्दुल हमीद अंसारी कांग्रेसी हैं।
-एवेंजेलिस्ट ईसाई और हिन्दुओं के खास आलोचक जॉन दयाल मिड-डे के दिल्ली संस्करण के प्रभारी हैं।
-नरसिम्हन राम (एन राम) दक्षिण के प्रसिद्ध अखबार “द हिन्दू” के मुख्य सम्पादक हैं।
-एन राम की पहली पत्नी का नाम है सूसन।
-सूसन एक आयरिश हैं जो भारत में ऑक्सफ़ोर्ड पब्लिकेशन की इंचार्ज हैं।
-विद्या राम, एन राम की पुत्री हैं, वे भी एक पत्रकार हैं।
-एन राम की हालिया पत्नी मरियम हैं।
-त्रिचूर में आयोजित कैथोलिक बिशपों की एक मीटिंग में एन राम, जेनिफ़र अरुल और केएम रॉय ने भाग लिया है।
-जेनिफ़र अरुल, NDTV की दक्षिण भारत की प्रभारी हैं।
-जबकि केएम रॉय “द हिन्दू” के संवाददाता हैं।
-केएम रॉय “मंगलम” पब्लिकेशन के सम्पादक मंडल सदस्य भी हैं।
-मंगलम ग्रुप पब्लिकेशन एमसी वर्गीज़ ने शुरु किया है।
-केएम रॉय को “ऑल इंडिया कैथोलिक यूनियन लाइफ़टाइम अवार्ड” से सम्मानित किया गया है।
-“ऑल इंडिया कैथोलिक यूनियन” के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं जॉन दयाल।
-जॉन दयाल “ऑल इंडिया क्रिश्चियन काउंसिल”(AICC) के सचिव भी हैं।
-AICC के अध्यक्ष हैं डॉ जोसेफ़ डिसूज़ा।
-जोसेफ़ डिसूज़ा ने “दलित फ़्रीडम नेटवर्क” की स्थापना की है।
-दलित फ़्रीडम नेटवर्क की सहयोगी संस्था है “ऑपरेशन मोबिलाइज़ेशन इंडिया” (OM India)।
-OM India के दक्षिण भारत प्रभारी हैं कुमार स्वामी।
-कुमार स्वामी कर्नाटक राज्य के मानवाधिकार आयोग के सदस्य भी हैं।
-OM India के उत्तर भारत प्रभारी हैं मोजेस परमार।
-OM India का लक्ष्य दुनिया के उन हिस्सों में चर्च को मजबूत करना है, जहाँ वे अब तक नहीं पहुँचे हैं।
-OMCC दलित फ़्रीडम नेटवर्क (DFN) के साथ काम करती है।
-DFN के सलाहकार मण्डल में विलियम आर्मस्ट्रांग शामिल हैं।
-विलियम आर्मस्ट्रांग, कोलोरेडो (अमेरिका) के पूर्व सीनेटर हैं और वर्तमान में कोलोरेडो क्रिश्चियन यूनिवर्सिटी के प्रेसीडेण्ट हैं। यह यूनिवर्सिटी विश्व भर में ईसा के प्रचार हेतु मुख्य रणनीतिकारों में शुमार की जाती है।
-DFN के सलाहकार मंडल में उदित राज भी शामिल हैं।
-उदित राज के जोसेफ़ पिट्स के अच्छे मित्र भी हैं।
-जोसेफ़ पिट्स ने ही नरेन्द्र मोदी को वीज़ा न देने के लिये कोंडोलीज़ा राइस से कहा था।
-जोसेफ़ पिट्स “कश्मीर फ़ोरम” के संस्थापक भी हैं।
-उदित राज भारत सरकार के नेशनल इंटीग्रेशन काउंसिल (राष्ट्रीय एकता परिषद) के सदस्य भी हैं।
-उदित राज कश्मीर पर बनी एक अन्तर्राष्ट्रीय समिति के सदस्य भी हैं।
-सुहासिनी हैदर, सुब्रह्मण्यम स्वामी की पुत्री हैं।
-सुहासिनी हैदर, सलमान हैदर की पुत्रवधू हैं।
-सलमान हैदर, भारत के पूर्व विदेश सचिव रह चुके हैं, चीन में राजदूत भी रह चुके हैं।
-रामोजी ग्रुप के मुखिया हैं रामोजी राव।
-रामोजी राव “ईनाडु” (सर्वाधिक खपत वाला तेलुगू अखबार) के संस्थापक हैं।
-रामोजी राव ईटीवी के भी मालिक हैं।
-रामोजी राव चन्द्रबाबू नायडू के परम मित्रों में से हैं।
-डेक्कन क्रॉनिकल के चेयरमैन हैं टी वेंकटरमन रेड्डी।
-रेड्डी साहब कांग्रेस के पूर्व राज्यसभा सदस्य हैं।
-एमजे अकबर डेक्कन क्रॉनिकल और एशियन एज के सम्पादक हैं।
-एमजे अकबर कांग्रेस सांसद भी रह चुके हैं।
-एमजे अकबर की पत्नी हैं मल्लिका जोसेफ़।
-मल्लिका जोसेफ़, टाइम्स ऑफ़ इंडिया में कार्यरत हैं।
-वाय सेमुअल राजशेखर रेड्डी आंध्र-प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं।
-सेमुअल रेड्डी के पिता राजा रेड्डी ने पुलिवेन्दुला में एक डिग्री कालेज व एक पोलीटेक्नीक कालेज की स्थापना की।
-सेमुअल रेड्डी ने कहा है कि आंध्रा लोयोला कॉलेज में पढ़ाई के दौरान वे इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने उक्त दोनों कॉलेज लोयोला समूह को दान में दे दिये।
-सेमुअल रेड्डी की बेटी हैं शर्मिला।
-शर्मिला की शादी हुई है “अनिल कुमार” से। अनिल कुमार भी एक धर्म-परिवर्तित ईसाई हैं जिन्होंने “अनिल वर्ल्ड एवेंजेलिज़्म” नामक संस्था शुरु की और वे एक सक्रिय एवेंजेलिस्ट (कट्टर ईसाई धर्म प्रचारक) हैं।
-सेमुअल रेड्डी के पुत्र जगन रेड्डी युवा कांग्रेस नेता हैं।
-जगन रेड्डी “जगति पब्लिकेशन प्रा. लि.” के चेयरमैन हैं।
-भूमना करुणाकरा रेड्डी, सेमुअल रेड्डी की करीबी हैं।
-करुणाकरा रेड्डी, तिरुमला तिरुपति देवस्थानम की चेयरमैन हैं।
-चन्द्रबाबू नायडू ने आरोप लगाया था कि “लैंको समूह” को जगति पब्लिकेशन्स में निवेश करने हेतु दबाव डाला गया था।
-लैंको कम्पनी समूह, एल श्रीधर का है।
-एल श्रीधर, एल राजगोपाल के भाई हैं।
-एल राजगोपाल, पी उपेन्द्र के दामाद हैं।
-पी उपेन्द्र केन्द्र में कांग्रेस के मंत्री रह चुके हैं।
-सन टीवी चैनल समूह के मालिक हैं कलानिधि मारन
-कलानिधि मारन एक तमिल दैनिक “दिनाकरन” के भी मालिक हैं।
-कलानिधि के भाई हैं दयानिधि मारन।
-दयानिधि मारन केन्द्र में संचार मंत्री थे।
-पत्रकार एन राम की भतीजी की शादी दयानिधि मारन से हुई है।
-दयानिधि और कलानिधि मारन के पिता थे मुरासोली मारन।
-मुरासोली मारन के चाचा हैं एम करुणानिधि (तमिलनाडु के मुख्यमंत्री)।
-करुणानिधि ने “कैलाग्नार टीवी” का उदघाटन किया।
-कैलाग्नार टीवी के मालिक हैं एम के अझागिरी।
-एम के अझागिरी, करुणानिधि के पुत्र हैं।
-करुणानिधि के एक और पुत्र हैं एम के स्टालिन।
-स्टालिन का नामकरण रूस के नेता के नाम पर किया गया।
-कनिमोझि, करुणानिधि की पुत्री हैं, और केन्द्र में राज्यमंत्री हैं।
-कनिमोझी, “द हिन्दू” अखबार में सह-सम्पादक भी हैं।
-कनिमोझी के दूसरे पति जी अरविन्दन सिंगापुर के एक जाने-माने व्यक्ति हैं।
-स्टार विजय एक तमिल चैनल है।
-विजय टीवी को स्टार टीवी ने खरीद लिया है।
-स्टार टीवी के मालिक हैं रूपर्ट मर्डोक।
-Act Now for Harmony and Democracy (अनहद) की संस्थापक और ट्रस्टी हैं शबनम हाशमी।
-शबनम हाशमी, गौहर रज़ा की पत्नी हैं।
-“अनहद” के एक और संस्थापक हैं के एम पणिक्कर।
-के एम पणिक्कर एक मार्क्सवादी इतिहासकार हैं, जो कई साल तक ICHR में काबिज रहे।
-पणिक्कर को पद्मभूषण भी मिला।
-हर्ष मन्दर भी “अनहद” के संस्थापक हैं।
-हर्ष मन्दर एक मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं।
-हर्ष मन्दर, अजीत जोगी के खास मित्र हैं।
-अजीत जोगी, सोनिया गाँधी के खास हैं क्योंकि वे ईसाई हैं और इन्हीं की अगुआई में छत्तीसगढ़ में जोर-शोर से धर्म-परिवर्तन करवाया गया और बाद में दिलीपसिंह जूदेव ने परिवर्तित आदिवासियों की हिन्दू धर्म में वापसी करवाई।
-कमला भसीन भी “अनहद” की संस्थापक सदस्य हैं।
-फ़िल्मकार सईद अख्तर मिर्ज़ा “अनहद” के ट्रस्टी हैं।
-मलयालम दैनिक “मातृभूमि” के मालिक हैं एमपी वीरेन्द्रकुमार
-वीरेन्द्रकुमार जद(से) के सांसद हैं (केरल से)
-केरल में देवेगौड़ा की पार्टी लेफ़्ट फ़्रण्ट की साझीदार है।
-शशि थरूर पूर्व राजनैयिक हैं।
-चन्द्रन थरूर, शशि थरूर के पिता हैं, जो कोलकाता की आनन्दबाज़ार पत्रिका में संवाददाता थे।
-चन्द्रन थरूर ने 1959 में द स्टेट्समैन की अध्यक्षता की।
-शशि थरूर के दो जुड़वाँ लड़के ईशान और कनिष्क हैं, ईशान हांगकांग में “टाइम्स” पत्रिका के लिये काम करते हैं।
-कनिष्क लन्दन में “ओपन डेमोक्रेसी” नामक संस्था के लिये काम करते हैं।
-शशि थरूर की बहन शोभा थरूर की बेटी रागिनी (अमेरिकी पत्रिका) “इंडिया करंट्स” की सम्पादक हैं।
-परमेश्वर थरूर, शशि थरूर के चाचा हैं और वे “रीडर्स डाइजेस्ट” के भारत संस्करण के संस्थापक सदस्य हैं।
-शोभना भरतिया हिन्दुस्तान टाइम्स समूह की अध्यक्ष हैं।
-शोभना भरतिया केके बिरला की पुत्री और जीड़ी बिरला की पोती हैं
-शोभना राज्यसभा की सदस्या भी हैं जिन्हें सोनिया ने नामांकित किया था।
-शोभना को 2005 में पद्मश्री भी मिल चुकी है।
-शोभना भरतिया सिंधिया परिवार की भी नज़दीकी मित्र हैं।
-करण थापर भी हिन्दुस्तान टाइम्स में कालम लिखते हैं।
-न्यूज़ 24 की चेयरमेन है अनुराधा प्रसाद
-अनुराधा प्रसाद कांग्रेस नेता (और अब मंत्री बने) राजीव शुक्ला की पत्नी है
-राजीव शुक्ला राजनीति में आने से पहले  हिंदी में झोला छाप पत्रकार थे
-राजीव शुक्ला ने राहुल गाँधी और सोनिया गाँधी को मीडिया में किसी भी तरह लाने के लिए पत्रकारिता के सारे मूल्यों और सिद्धान्तों को ताक पर रख दिया था
-उसके इनाम में राहुल गाँधी ने उन्हें राज्य सभा का सदस्य और BCCI का वाइस प्रेसिडेंट ऐर मंत्री बना दिया
-कुछ दिन पहले राहुल गाँधी के काफिले से एक आदमी घायल हो गया था
-राहुल गाँधी ने 100 नंबर पर कॉल करके अम्बुलेंस बुला लिया
-न्यूज़ 24 ने इसे “राहुल गाँधी की महानता ” के तौर पर दो दिन तक दिखाया
-प्रभु चावला पहले इंडिया टुडे ग्रुप में थे
-प्रभु चावला के बेटे के नाम है अंकुर चावला
-अंकुर चावला दिल्ली में सत्ता न जाना माना दलाल है
-नीरा राडिया टेप में प्रभु चावला का भी नाम आया
-प्रभु चावला के कारण सोनिया गांधी इंडिया टुडे से नाराज़ थी
-नाराजगी की वजह थी जैन कमीशन की रिपोर्ट लीक होना, जिसके कारण कांग्रेस समर्थित सरकार गिर गई थी
-प्रभु चावला के कार्यक्रम सीधी-बात में यूपीए सरकार का एक भी कांग्रेसी मंत्री नहीं आया
-टुडे ग्रुप को कांग्रेस और सरकार के विज्ञापन मिलने भी बंद हो गए थे
-इंडिया टुडे ने प्रभु चावला की जगह एमजे अकबर को रख लिया है
-अभी प्रभु चावला ETV में है

!!!!क्यों बिक रहा है इंदौर के दैनिक नवभारत अखबार !!!

नवभारत इन्‍दौर नीलाम होगा 17 .50 करोड मे ? प्रदेश मे पिछले दिनो कई अखबार वालो के यहॉ छापे पड चुके है ?देश के कई नामचीन अखबार वालो पर 2जी स्‍पेक्‍ट्रम मे उगॅली उठ रही है ?अभी कुछ दिनो पहले दुनिया के सबसे बडे टेबलाइड अखबार के बन्‍द होने की खबर सूर्खियो मे रही , देश के कई अखबार वाले 2 जी स्‍पेक्‍टृम घोटाले मे लिप्‍तता के चलते अपनी साख गवौ बैठे वही मध्‍यप्रदेश मे कई अखबार वालो के यहॉ किसी ना किसी ''आरोप'' मे छापे पडे ,और अब इन्‍दौर मे देश के सबसे पुराने मे से एक और आजादी के आन्‍दोलन मे भी महती भुमिका निभाने वाले अखबार ''नवभारत'' की जमीन की नीलामी की जाने वाली है ।वैसे तो आम आदमी के मन में भी कई अखबार वालो की छवि अब एक बिजनेसमेन की सी ही बनने लगी है और कभी -कभी तो इन्‍हे भी सत्‍ता के दलालो जैसे अलंकरणो से नवाजा जाता है ,पेड न्‍यूज पर राष्‍टृव्‍यापी बहस हो चुकी है और अब नीलाम होती अखबार वालो की सम्‍पत्ति से आम आदमी  को अखबार वालो के बारे मे सोचने का नया न‍जरिया मिल जावेगा ।ज्ञात हो की नवभारत ग्रुप एक वक्‍त देश के नम्‍बर एक अखबार की श्रेणी का ग्रुप रह चुका है और आज भी उसके अन्‍य संस्‍करण काफी अच्‍छी'' इमेज ''बनाए हुए है ।वजह चाहे कुछ भी रही हो पर बैक आफ महाराष्‍ट्र का तकरीबन सोलह करोड रूपये का लोन ना चुकाने के कारण बैंक द्वारा दिनॉंक 2 सितम्‍बर 2011 को नवभारत इन्‍दौर की जमीन को बोली लगवाकर नीलाम कर दिया जावेगा ।और दुख के साथ कहना पड रहा है कि देश के आम ना‍गरिक को एक और नया नजरिया अखबार वालो को देखने को मिल जावेगा ।

!!! भारतीय बाबाओं का उद्योगपति घराना’!!!

@अनुभव भारतीय
साईं जैसे संत का प्रादुर्भाव एक गरीब परिवार में हुआ था। साईं के सादे जीवन को लोगों ने अपने जीवन में कितना उतारा कहना मुश्किल है। लेकिन, तब के शिरडी के सांई बाबा जितना गरीब थे, आज के साईबाबा उतने ही अमीर है। जिस साईं ने जीवन भर एक कुटिया में, लकड़ी का पीढ़ा और जमीन पर सोकर कर बिता दिया, आज उन्हीं साई के बैठने के लिए हीरों से जड़ा चॉदी और सोने का सिंहासन और मुकूट है। चढ़ावा भी करोड़ो में चढ़ता है। उनके भक्त दुनिया के विभिन्न देशों में है। भारत में भी लोगों का भक्ति भाव साई की तरफ झुकता देखकर ,अन्य शहरों के पंडितों और पुजारियों ने अपने-अपने मंदिरों में, साईं जैसे गरीब संत को आरक्षण देकर उनकी मुर्ती स्थापित करने लगे हैं। ताकि, भक्तों के जेब से निकलने वाला दान और चढ़ावा किसी अन्य साई मंदिर में जाकर न चढ़ जाय और मंदिर के पुजारी भक्तों का मुंह देखता रह जाय। यह मंदिर के पुजारियों और मठों के मठाधीशों का ही खेल है कि, साई जैसे गरीब संत, विलासिता की वस्तुओं से नवाजे जा रहे हैं। उनके संत स्वभाव को नकार कर उन्हें विलासी बना दिया गया। भगवान, संत और साई की भक्ति और आदर सत्कार कैसे की जाती है , कहना मुश्किल है? लेकिन, आज पंडितो ने इसके लिए अपना अलग-अलग मापदंड तय कर लिया है। यहाँ तक कि केदारनाथ, बद्रीनाथ, तिरूपति, और जग्गनाथपुरी जैसे मंदिरों में भगवान के दर्शन करने के लिए पंडितों को फीस दी जाती है। भगवान प्रसन्न हो या न हो, लेकिन पंडित जरूर प्रसन्न हो जाते है। भक्तों की आस्था को ठेस न पहुंचे और पुजारी नाराज न हो, इसलिए टीवी चैनल का कैमरा इस ओर कभी नहीं घुमा और इन चीजों को कभी दिखाने की जहमत नहीं उठाई। इस ओर कैमरा जब भी घूमा आस्था की भावना लेकर । ताकि चैनल की टीआरपी बरकरार रहे।
शनि का साढ़े साती, राहू-केतु, सूर्य-चंद्रमा और ग्रहों के दोष, दशा और दिशाओं को बताने वाले बाबाओं को कैमरे के सामने बैठा देख, समाज बड़े आदर और सम्मान के साथ देखता है। अपनी समस्यों के समाधान के लिए इनके कॉरपोरेट फोन पर संपंर्क साधता है और बदले में मोटी रकम अपने बैंक अकॉन्ट में डलवाने के लिए कहता है। लाईव या रिर्कोडेड प्रोग्राम के समय न केवल टेलीविजन की टीआरपी बढ़ रही होती है, बल्कि, बाबा का भी प्रमोशन और विज्ञापन हो रहा होता है। प्रायोजित या रेकॉर्डेड कार्यक्रम में बाबा से आधा घंटा या 20 मिनट के स्लॉट के हिसाब से चैनल वालों को फीस दी जाती है।
मार्च 2010 में, उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ में कृपालू जी महराज के आश्रम में भगदड़ से 63 लोगों की मौत हो गई थी। आयोजन था, कृपालू जी महराज की पत्नी की बरसी पर एक थाली, एक रुमाल, 20 रुपया नकद और प्रसाद में एक लड्डू बांटने का। कृपालू जी की सस्ती लोकप्रियता हासिल करने की चाहत में बेचारे 63 गरीब भक्तों को अपनी जान गंवानी पड़ी। कृपालू महराज के उपर कार्रवाई करने का नतीजा तो सिफ़र रहा। उल्टे उनकी और टीवी चैनलो की टीआरपी उस दिन जरुर हाई हो गई, जिस दिन गरीब,मासूम 63 भक्तों ने अपनी जान गंवाई थी।
सड़क के फुटपाथ से उठकर चैनल के स्टूडियों से लाइव टेलिकास्ट करने वाला बाबाओं का आज एक घराना बन गया है,- ‘बाबाओं का उद्योगपति घराना’।

गुरुवार, 28 जुलाई 2011

हिंदू संगठनों का नाम कभी नहीं लिया:दिग्विजय

दिया मीडिया को चुनौती

कांग्रेस के महासचिव दिग्विजय सिंह ने स्पष्ट किया है कि उन्होंने मुंबई धमाकों के बाद सिर्फ इतना कहा था कि इस मामले में हर संगठन की जांच की जानी चाहिए, उन्होंने यह कभी नहीं कहा कि इस सिलसिले में हिंदू संगठनों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।
दिग्विजय ने कहा कि उन्होंने सिर्फ इतना कहा था कि धमाकों के मामले में हर संगठन की जांच की जानी चाहिए। सिंह ने कहा कि ऎसा कह कर उन्होंने मुंबई धमाकों पर सिर्फ वही दोहराया था जो केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने कहा था। उन्होंने चुनौती दी कि किसी भी न्यूज चैनल के पास ऎसी कोई भी बाइट नहीं है जिस से यह सिद्ध हो सके कि उन्होंने मुंबई धमाकों को लेकर हिंदू संगठनों का नाम लिया था। सिंह ने कहा कि मीडिया में आई ऎसी खबरें सही नहीं हैं कि उन्होंने मुंबई धमाकों को लेकर हिंदू संगठनों का नाम लिया था।  

बुधवार, 27 जुलाई 2011

पत्रकार वनाम झारखंड सरकार की रेवड़ियां

झारखंड सरकार की मीडिया फेलोशिप समिति द्वारा अनुसंशित जिन 30 में 26 उम्मीदवारों (पत्रकारों) को सरकार ने 50-50 हजार रुपए की फेलोशिप प्रदान करने की घोषणा की है, उनका गहन अवलोकन करने पर यह साफ जाहिर होता है कि मुंडा सरकार ने झारखंड की पत्रकारिता के एक खास वर्ग के चहेतों के बीच मात्र रेवड़ियां बांटने का कार्य की है। जिन पत्रकारों को इसका लाभ मिलनी चाहिए, उसे नहीं मिलने की परंपरा कायम रखते हुये इसमें पारदर्शिता नहीं बरती गई है और यदि इसकी न्यायपूर्ण जांच की जाए तो सबकी कलई खुलनी तय है। चयन समिति में कई ऐसे लोग हैं,जिनसे पारदर्शिता की उम्मीद कदापि नहीं की जा सकती और इनके चयन के आधार सार्वजनिक होनी चाहिए।

मंगलवार, 26 जुलाई 2011

मुंडा सरकार ने झारखंड के पत्रकारों के बीच बांटी रेवड़ियां

30 में 26 चहेतों को दिया 50-50 हजार रु. के मीडिया फेलोशिप 

झारखंड सरकार ने 26 पत्रकारों को 50-50 हजार रुपये की मीडिया फेलोशिप की घोषणा कर दी है। मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने संवाददाता सम्मेलन में चयनित पत्रकारों की सूची जारी की। जनहित के मुद्दों पर शोध आधारित प्रकाशनों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से विभाग के द्वारा शोध एवं अन्वेषण की योजना प्रारम्भ की गयी है। इसके लिए विभागीय समिति गठित कर अखबारों में विज्ञापन देकर प्रविष्टियाँ आमंत्रित की गई थी। गठित विभागीय समिति ने कुल 26 आवेदकों का चयन फेलोशिप प्रदान करने हेतु किया है। प्रत्येक फेलोशिप हेतु पचास हजार रुपये की राशि प्रदान की जानी है। बकौल चयन समिति के सदस्य डॉ.विष्णु राजगढिया,चयन समिति के पास कुल 30 आवेदन ही प्राप्त हुए थे।

चयन समिति में डा॰ रमेश शरण (स्नातकोत्तर अर्थशास्त्र विभाग, रांची विश्वविद्यालय), श्री चंदन मिश्र (ब्यूरो प्रमुख, दैनिक हिन्दुस्तान), डा॰ विष्णु राजगढि़या (ब्यूरो चीफ, नई दुनिया), श्री विजय पाठक (स्थानीय सम्पादक, प्रभात खबर), श्री सुमन श्रीवास्तव (ब्यूरो प्रमुख, दी टेलीग्राफ), श्री अरविन्द मनोज कुमार सिंह (सहायक क्षेत्रीय निदेशक, इग्नू), श्री राजीव लोचन बख्शी (संयुक्त सचिव, सूचना एवं जन-सम्पर्क विभाग) तथा श्रीमती स्नेहलता एक्का (उप निदेशक, सूचना एवं जन-सम्पर्क विभाग) शामिल है।
मीडिया फेलोशिप हेतु चयनित पत्रकार एवं उनका शोध-विषय-
1. अनुपमा कुमारी- पंचायती राज और महिला सशक्तिकरण
2. आलोका- झारखण्ड में मनरेगा का महत्व
3. अनंत - हजारीबाग में लतिका का सामाजिक संघर्ष
4. योगेश्वर राम - पंचायत व्यवस्था में ग्राम सभा की भूमिका
5. आशिषी कुमार सिन्हा - बिरहोर समुदाय की पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली
6. ओमप्रकाश पाठक - ग्रामीण क्षेत्रों की स्वास्थ्य अधिसंरचना
7. रूपक कुमार - झारखंड में जैव-विविधता और जीविकापार्जन
8. सुरेन्द्र लाल सोरेन - कचड़ा चुननेवाले बच्चों के बेहत्तर भविष्य की संभावन
9. सर्वजीत - झारखंड में सूचना का अधिकार
10. प्रशांत जयवर्द्धन - वन प्रबंधन और पारंपरिक नियम
11. नदीम अख्तर - झारखण्ड राज्य में कृषि में तकनीक का इस्तेमाल
12. महेश्वर सिंह छोटु - आदिम जनजाति पहाडि़या कल आज और काल
13. नौशाद आलम - झारखण्ड में समुदायिक वन प्रबंधन की प्रासंगिकता
14. संजय श्रीवास्तव - झारखण्ड के विकास में संसदीय राजनीति का योगदान
15. शैली खत्री - राँची में बच्चों के विकास की स्थिति ।
16. प्रशांत झा - तसर सिल्क उद्योग और इससे जुड़े लोगों की स्थिति
17. कुमार संजय - बच्चों के भोजन और पोषण का अधिकार
18. विकास कुमार सिन्हा - झारखण्ड के पर्यटन स्थलों की स्थिति व विकास।
19. तनवी झा - झारखंड में समुदाय आधरित स्वास्थ्य सेवा
20. अमित कुमार झा - नेशनल गेम्स आयोजन से झारखण्ड में खेल प्रतिभाओं का उदय।
21. चन्दो श्री ठाकुर - राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना का सामुदायिक परिदृश्य
22. संजय कृष्ण - ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर महिला पलायन का असर
23. सलाउद्दीन- हजारीबाग में एड्स का विस्तार एवं नियंत्रण
24. शैलेश कुमार सिंह - स्वर्णिम झारखंड में नक्सलवाद का अंत
25. पंकज त्रिपाठी - राज्य में बिजली की स्थिति, समस्या और समाधान।
26. शक्तिधर पांडेय - लोक स्वास्थ्य और आंगनबाड़ी सेवाओं के सुदृढ़ीकरण में समुदाय की भूमिका।
बहरहाल, समिति द्वारा अनुसंशित जिन उम्मीदवारों को सरकार ने फेलोशिप प्रदान करने की घोषणा की है,उनका गहन अवलोकन करने पर यह साफ जाहिर होता है कि मुंडा सरकार ने झारखंड की पत्रकारिता के एक खास वर्ग के चहेतों के बीच मात्र रेवड़ियां बांटने का कार्य की है। वाकई में जिन पत्रकारों को इसका लाभ मिलनी चाहिए,उसे नहीं मिलने की परंपरा कायम रखते हुये पारदर्शिता नहीं बरती गई है। और यदि इसकी न्यायपूर्ण जांच की जाए तो सबकी कलई खुलनी तय है। चयन समिति में कई ऐसे लोग हैं,जिनसे पारदर्शिता की उम्मीद कदापि नहीं की जा सकती। वरिष्ठ पत्रकार रजत कुमार गुप्ता का कहना है कि इनके चयन का आधार सार्वजनिक होना चाहिए।

सोमवार, 25 जुलाई 2011

सीएम अर्जुन मुंडा के प्रेस कॉन्फ्रेस में हावी रहे झारखंड के चिरकुट पत्रकार

आज झारखंड के सीएम अर्जुन मुंडा की प्रेस कॉन्फ्रेंस था। उसे देखकर यह दावे के साथ कहा जा सकता है कि यहां के पत्रकारों में जनमुद्दों पर सवाल खड़े करने की इच्छाशक्ति ही नहीं बची है ।
वेशक यह एक सरकारी आयोजन था, जिसे हर मोर्चे पर विफल सीएम ने अपनी कामयाबी का ढिंढोरा पीटने के लिए आयोजित किया गया था। इस प्रेस कॉन्फ्रेस में पत्रकारों एक बड़ा समुह लीक से हटकर सवाल कर रहे थे। उससे साफ जाहिर होता है कि यहां के पत्रकार कितने बड़े चिरकुट हैं।
बात यही खत्म नही होती। सत्ता पक्ष से जुड़े़ एक खास वर्ग के पत्रकार सरकारी भोजन-पानी पर झपट रहे थे। मुख्यमंत्री को जमीन से जुड़े सबालों का सामना करना न पड़े, इसलिए वे माइक की छीना-झपटी की रेस में भी हावी रहे।
निःसंदेह कल के सारे अखबारों में खाउ-पकाऊ की नीति के बल घिसट-घिसट कर चल रही इस निकम्मी मुंडा सरकार के गुणगाण देखने को मिलेंगें। सबसे बड़ी बात यह है कि सीएम ने यह प्रेस कॉन्फ्रेस कल से बोकारो में होने बाली भाजपा कार्यकारिणी की महत्ती बैठक के मद्देनजर की गई थी, ताकि विक्षुब्धों के सामने मीडिया के मार्फत गुणगान किया जा सके।

शनिवार, 23 जुलाई 2011

ये हैं भारत के प्रमुख मीडिया हाउस और उसके मालिक


एनडीटीवीः एक बहुत लोकप्रिय टीवी समाचार मीडिया चैरिटी की Gospels में स्पेन साम्यवाद का समर्थन करता है के द्वारा वित्त पोषित है. हाल ही में यह पाकिस्तान के प्रति नरम रुख पर विकसित किया गया है क्योंकि पाकिस्तान के राष्ट्रपति द्वारा केवल इसी चैनल को प्रसारण की अनुमति दी गई है. भारतीय सीईओ प्रणय रॉय, भारत की कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव प्रकाश करात के सह भाई है. उनकी पत्नी और वृंदा करात बहनें हैं.
इंडिया टुडेः देश की एकमात्र राष्ट्रीय साप्ताहिक जो केवल भाजपा को समर्पित थी  अब एनडीटीवी द्वारा खरीदे जाने के बाद से इसका टोन काफी बदल गया है और अब इसे केवल हिन्दुओं को कोसने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है .
सीएनएन-आईबीएनः यह 100 प्रतिशत अमेरिका के दक्षिण में स्थित बैप्टिस्ट चर्च द्वारा वित्त पोषित है जिसकी शाखाएं तमाम दुनियां में मौजूद हैं.चर्च सालाना अपने चैनल को बढ़ावा देने के के लिए 800 मिलियन डॉलर का आवंटन करती है. इसका भारतीय राजदीप सरदेसाई और उनकी पत्नी सागरिका घोष के सिर है.
 टाइम्स समूहः टाइम्स ऑफ इंडिया, मिड - डे, नव - Bharth टाइम्स, फेमिना, फिल्मफेयर, विजया कर्नाटक, अब टाइम्स (24 - घंटे के समाचार चैनल) और कई और अधिक ... टाइम्स समूह बेनेट एंड कोलमैन द्वारा स्वामित्व में है. ये विश्व ईसाई परिषद के 80 प्रतिशत अनुदान, एक अंग्रेज और एक इतालवी के समान रूप से 20 प्रतिशत शेयर संतुलन करता है. इतालवी Robertio Mindo सोनिया गांधी के एक करीबी रिश्तेदार है.
स्टार टीवी:  यह एक ऑस्ट्रेलियाई, जो सेंट पीटर्स बिशप का चर्च मेलबोर्न द्वारा समर्थित है द्वारा चलाया जाता है.
 हिंदुस्तान टाइम्स: बिड़ला समूह के स्वामित्व है, लेकिन शोभना भारतीय के पदभार सँभालने के बाद इसका चेहरा ही बदल गया है. वर्तमान में यह टाइम्स समूह के साथ सहयोग में काम कर रहा है. और शुरु से ही यह ग्रुप कांग्रेस की नीतियों का समर्थक रहा है.
हिंदू: अंग्रेजी दैनिक, जो 125 साल से भी पुराना है  हाल ही में यहोशू सोसायटी, बर्न, स्विट्जरलैंड द्वारा पर ले लिया. एन राम की पत्नी एक स्विस नागरिक है.
इंडियन एक्सप्रेस: विभाजित दो समूहों में. इंडियन एक्सप्रेस और न्यू इंडियन एक्सप्रेस (दक्षिणी संस्करण) अधिनियमों ईसाई मंत्रालयों इंडियन एक्सप्रेस में प्रमुख हिस्सेदारी है और बाद भारतीय समकक्ष के साथ अभी भी है.  
स्टेट्समैन:  यह भारत की कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा नियंत्रित किया जाता है.  
एशियन एज और डेक्कन क्रॉनिकल: अपने मुख्य संपादक एम.जे. अकबर के साथ सऊदी अरब कंपनी द्वारा स्वामित्व में है. गुजरात दंगों जो 2002 में जहां हिंदुओं को जिंदा जला दिया गया, राजदीप सरदेसाई और Bharkha दत्त उस समय एनडीटीवी के लिए काम कर रहे थे सऊदी अरब से लगभग 5 मिलियन डॉलर केवल एक समुदाय पीड़ितों को कवर करने के लिए दिया गया, जिसे इन्होने बहुत ही ईमानदारी से निभाया. एक भी ऐसे दूसरे समुदाय के परिवार का साक्षात्कार तक नहीं किया गया और न ही दिखया गया जिनके परिजनों को जिंदा जला दिया गया था .
Tehelka.com के तरुण तेजपाल को नियमित रूप से अरब देशों से खाली चेक मिलते हें.

भारतीय मीडिया का सबसे बड़ा गैंग

जानिये भारतीय मीडिया की हकीकत
- अरुंधती रॉय, प्रणव रॉय (नेहरु डायनेस्टी टीवी- NDTV) की भांजी हैं। -प्रणव रॉय “काउंसिल ऑन फ़ॉरेन रिलेशन्स” के इंटरनेशनल सलाहकार बोर्ड के सदस्य हैं। -इसी बोर्ड के एक अन्य सदस्य हैं मुकेश अम्बानी। -प्रणव रॉय की पत्नी हैं राधिका रॉय। -राधिका रॉय, बृन्दा करात की बहन हैं। -बृन्दा करात, प्रकाश करात (CPI) की पत्नी हैं। -प्रकाश करात चेन्नै के “डिबेटिंग क्लब” के सदस्य थे। -एन राम, पी चिदम्बरम और मैथिली शिवरामन भी इस ग्रुप के सदस्य थे। -इस ग्रुप ने एक पत्रिका शुरु की थी “रैडिकल रीव्यू”। -CPI(M) के एक वरिष्ठ नेता सीताराम येचुरी की पत्नी हैं सीमा चिश्ती। -सीमा चिश्ती इंडियन एक्सप्रेस की “रेजिडेण्ट एडीटर” हैं। -बरखा दत्त NDTV में काम करती हैं। -बरखा दत्त की माँ हैं श्रीमती प्रभा दत्त। -प्रभा दत्त हिन्दुस्तान टाइम्स की मुख्य रिपोर्टर थीं। -राजदीप सरदेसाई पहले NDTV में थे, अब CNN-IBN के हैं (दोनों ही मुस्लिम चैनल हैं)। -राजदीप सरदेसाई की पत्नी हैं सागरिका घोष।-सागरिका घोष के पिता हैं दूरदर्शन के पूर्व महानिदेशक भास्कर घोष। -सागरिका घोष की आंटी रूमा पॉल हैं। -रूमा पॉल उच्चतम न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश हैं। -सागरिका घोष की दूसरी आंटी अरुंधती घोष हैं -अरुंधती घोष संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थाई प्रतिनिधि हैं-CNN-IBN का “ग्लोबल बिजनेस नेटवर्क” (GBN) से व्यावसायिक समझौता है। -GBN टर्नर इंटरनेशनल और नेटवर्क-18 की एक कम्पनी है। -NDTV भारत का एकमात्र चैनल है को “अधिकृत रूप से” पाकिस्तान में दिखाया जाता है -दिलीप डिसूज़ा PIPFD (Pakistan-India Peoples’ Forum for Peace and Democracy) के सदस्य हैं। -दिलीप डिसूज़ा के पिता हैं जोसेफ़ बेन डिसूज़ा। -जोसेफ़ बेन डिसूज़ा महाराष्ट्र सरकार के पूर्व सचिव रह चुके हैं। -तीस्ता सीतलवाड भी PIPFD की सदस्य हैं। -तीस्ता सीतलवाड के पति हैं जावेद आनन्द। -जावेद आनन्द एक कम्पनी सबरंग कम्युनिकेशन और एक संस्था “मुस्लिम फ़ॉर सेकुलर डेमोक्रेसी” चलाते हैं। -इस संस्था के प्रवक्ता हैं जावेद अख्तर। -जावेद अख्तर की पत्नी हैं शबाना आज़मी। -करण थापर ITV के मालिक हैं। -ITV बीबीसी के लिये कार्यक्रमों का भी निर्माण करती है। -करण थापर के पिता थे जनरल प्राणनाथ थापर (1962 का चीन युद्ध इन्हीं के नेतृत्व में हारा गया था)। -करण थापर बेनज़ीर भुट्टो और ज़रदारी के बहुत अच्छे मित्रों में शुमार हैं। -करण थापर के मामा की शादी नयनतारा सहगल से हुई है। -नयनतारा सहगल, विजयलक्ष्मी पंडित की बेटी हैं। -विजयलक्ष्मी पंडित, जवाहरलाल नेहरू की बहन हैं। -मेधा पाटकर नर्मदा बचाओ आन्दोलन की मुख्य प्रवक्ता और कार्यकर्ता हैं।-नबाआं को मदद मिलती है पैट्रिक मेकुल्ली से जो कि “इंटरनेशनल रिवर्स नेटवर्क (IRN)” संगठन में हैं। -अंगना चटर्जी IRN की बोर्ड सदस्या हैं। -अंगना चटर्जी PROXSA (Progressive South Asian Exchange Network) की भी सदस्या हैं। -PROXSA संस्था, FOIL (Friends of Indian Leftist) से पैसा पाती है। -अंगना चटर्जी के पति हैं रिचर्ड शेपायरो। -FOIL के सह-संस्थापक हैं अमेरिकी वामपंथी बिजू मैथ्यू। -राहुल बोस (अभिनेता) खालिद अंसारी के रिश्ते में हैं। -खालिद अंसारी “मिड-डे” पब्लिकेशन के अध्यक्ष हैं। -खालिद अंसारी एमसी मीडिया लिमिटेड के भी अध्यक्ष हैं। -खालिद अंसारी, अब्दुल हमीद अंसारी के पिता हैं। -अब्दुल हमीद अंसारी कांग्रेसी हैं। -एवेंजेलिस्ट ईसाई और हिन्दुओं के खास आलोचक जॉन दयाल मिड-डे के दिल्ली संस्करण के प्रभारी हैं। -नरसिम्हन राम (यानी एन राम) दक्षिण के प्रसिद्ध अखबार “द हिन्दू” के मुख्य सम्पादक हैं। -एन राम की पहली पत्नी का नाम है सूसन। -सूसन एक आयरिश हैं जो भारत में ऑक्सफ़ोर्ड पब्लिकेशन की इंचार्ज हैं। -विद्या राम, एन राम की पुत्री हैं, वे भी एक पत्रकार हैं। -एन राम की हालिया पत्नी मरियम हैं। -त्रिचूर में आयोजित कैथोलिक बिशपों की एक मीटिंग में एन राम, जेनिफ़र अरुल और केएम रॉय ने भाग लिया है। -जेनिफ़र अरुल, NDTV की दक्षिण भारत की प्रभारी हैं। -जबकि केएम रॉय “द हिन्दू” के संवाददाता हैं। -केएम रॉय “मंगलम” पब्लिकेशन के सम्पादक मंडल सदस्य भी हैं। -मंगलम ग्रुप पब्लिकेशन एमसी वर्गीज़ ने शुरु किया है। -केएम रॉय को “ऑल इंडिया कैथोलिक यूनियन लाइफ़टाइम अवार्ड” से सम्मानित किया गया है। -“ऑल इंडिया कैथोलिक यूनियन” के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं जॉन दयाल। -जॉन दयाल “ऑल इंडिया क्रिश्चियन काउंसिल”(AICC) के सचिव भी हैं। -AICC के अध्यक्ष हैं डॉ जोसेफ़ डिसूज़ा। -जोसेफ़ डिसूज़ा ने “दलित फ़्रीडम नेटवर्क” की स्थापना की है। -दलित फ़्रीडम नेटवर्क की सहयोगी संस्था है “ऑपरेशन मोबिलाइज़ेशन इंडिया” (OM India)। -OM India के दक्षिण भारत प्रभारी हैं कुमार स्वामी। -कुमार स्वामी कर्नाटक राज्य के मानवाधिकार आयोग के सदस्य भी हैं। -OM India के उत्तर भारत प्रभारी हैं मोजेस परमार। -OM India का लक्ष्य दुनिया के उन हिस्सों में चर्च को मजबूत करना है, जहाँ वे अब तक नहीं पहुँचे हैं। -OMCC दलित फ़्रीडम नेटवर्क (DFN) के साथ काम करती है। -DFN के सलाहकार मण्डल में विलियम आर्मस्ट्रांग शामिल हैं। -विलियम आर्मस्ट्रांग, कोलोरेडो (अमेरिका) के पूर्व सीनेटर हैं और वर्तमान में कोलोरेडो क्रिश्चियन यूनिवर्सिटी के प्रेसीडेण्ट हैं। यह यूनिवर्सिटी विश्व भर में ईसा के प्रचार हेतु मुख्य रणनीतिकारों में शुमार की जाती है। -DFN के सलाहकार मंडल में उदित राज भी शामिल हैं। -उदित राज के जोसेफ़ पिट्स के अच्छे मित्र भी हैं। -जोसेफ़ पिट्स ने ही नरेन्द्र मोदी को वीज़ा न देने के लिये कोंडोलीज़ा राइस से कहा था। -जोसेफ़ पिट्स “कश्मीर फ़ोरम” के संस्थापक भी हैं। -उदित राज भारत सरकार के नेशनल इंटीग्रेशन काउंसिल (राष्ट्रीय एकता परिषद) के सदस्य भी हैं। -उदित राज कश्मीर पर बनी एक अन्तर्राष्ट्रीय समिति के सदस्य भी हैं। -सुहासिनी हैदर, सुब्रह्मण्यम स्वामी की पुत्री हैं। -सुहासिनी हैदर, सलमान हैदर की पुत्रवधू हैं। -सलमान हैदर, भारत के पूर्व विदेश सचिव रह चुके हैं, चीन में राजदूत भी रह चुके हैं। -रामोजी ग्रुप के मुखिया हैं रामोजी राव। -रामोजी राव “ईनाडु” (सर्वाधिक खपत वाला तेलुगू अखबार) के संस्थापक हैं। -रामोजी राव ईटीवी के भी मालिक हैं। -रामोजी राव चन्द्रबाबू नायडू के परम मित्रों में से हैं। -डेक्कन क्रॉनिकल के चेयरमैन हैं टी वेंकटरमन रेड्डी। -रेड्डी साहब कांग्रेस के पूर्व राज्यसभा सदस्य हैं। -एमजे अकबर डेक्कन क्रॉनिकल और एशियन एज के सम्पादक हैं। -एमजे अकबर कांग्रेस विधायक भी रह चुके हैं। -एमजे अकबर की पत्नी हैं मल्लिका जोसेफ़। -मल्लिका जोसेफ़, टाइम्स ऑफ़ इंडिया में कार्यरत हैं। -वाय सेमुअल राजशेखर रेड्डी आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री हैं। -सेमुअल रेड्डी के पिता राजा रेड्डी ने पुलिवेन्दुला में एक डिग्री कालेज व एक पोलीटेक्नीक कालेज की स्थापना की।सेमुअल रेड्डी ने कहा है कि आंध्रा लोयोला कॉलेज में पढ़ाई के दौरान वे इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने उक्त दोनों कॉलेज लोयोला समूह को दान में दे दिये। -सेमुअल रेड्डी की बेटी हैं शर्मिला। -शर्मिला की शादी हुई है “अनिल कुमार” से। अनिल कुमार भी एक धर्म-परिवर्तित ईसाई हैं जिन्होंने “अनिल वर्ल्ड एवेंजेलिज़्म” नामक संस्था शुरु की और वे एक सक्रिय एवेंजेलिस्ट (कट्टर ईसाई धर्म प्रचारक) हैं। -सेमुअल रेड्डी के पुत्र जगन रेड्डी युवा कांग्रेस नेता हैं। -जगन रेड्डी “जगति पब्लिकेशन प्रा. लि.” के चेयरमैन हैं। -भूमना करुणाकरा रेड्डी, सेमुअल रेड्डी की करीबी हैं। -करुणाकरा रेड्डी, तिरुमला तिरुपति देवस्थानम की चेयरमैन हैं। -चन्द्रबाबू नायडू ने आरोप लगाया था कि “लैंको समूह” को जगति पब्लिकेशन्स में निवेश करने हेतु दबाव डाला गया था। -लैंको कम्पनी समूह, एल श्रीधर का है। -एल श्रीधर, एल राजगोपाल के भाई हैं। -एल राजगोपाल, पी उपेन्द्र के दामाद हैं। -पी उपेन्द्र केन्द्र में कांग्रेस के मंत्री रह चुके हैं। -सन टीवी चैनल समूह के मालिक हैं कलानिधि मारन -कलानिधि मारन एक तमिल दैनिक “दिनाकरन” के भी मालिक हैं। -कलानिधि के भाई हैं दयानिधि मारन। -दयानिधि मारन केन्द्र में संचार मंत्री थे। -कलानिधि मारन के पिता थे मुरासोली मारन। -मुरासोली मारन के चाचा हैं एम करुणानिधि (तमिलनाडु के मुख्यमंत्री)। -करुणानिधि ने ‘कैलाग्नार टीवी” का उदघाटन किया। -कैलाग्नार टीवी के मालिक हैं एम के अझागिरी। -एम के अझागिरी, करुणानिधि के पुत्र हैं। -करुणानिधि के एक और पुत्र हैं एम के स्टालिन। -स्टालिन का नामकरण रूस के नेता के नाम पर किया गया। -कनिमोझि, करुणानिधि की पुत्री हैं, और केन्द्र में राज्यमंत्री हैं। -कनिमोझी, “द हिन्दू” अखबार में सह-सम्पादक भी हैं। -कनिमोझी के दूसरे पति जी अरविन्दन सिंगापुर के एक जाने-माने व्यक्ति हैं। -स्टार विजय एक तमिल चैनल है। -विजय टीवी को स्टार टीवी ने खरीद लिया है। -स्टार टीवी के मालिक हैं रूपर्ट मर्डोक।   -Act Now for Harmony and Democracy (अनहद) की संस्थापक और ट्रस्टी हैं शबनम हाशमी। -शबनम हाशमी, गौहर रज़ा की पत्नी हैं। -“अनहद” के एक और संस्थापक हैं के एम पणिक्कर। -के एम पणिक्कर एक मार्क्सवादी इतिहासकार हैं, जो कई साल तक ICHR में काबिज रहे। -पणिक्कर को पद्मभूषण भी मिला। -हर्ष मन्दर भी “अनहद” के संस्थापक हैं। -हर्ष मन्दर एक मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं। -हर्ष मन्दर, अजीत जोगी के खास मित्र हैं। -अजीत जोगी, सोनिया गाँधी के खास हैं क्योंकि वे ईसाई हैं और इन्हीं की अगुआई में छत्तीसगढ़ में जोरशोर से धर्म-परिवर्तन करवाया गया और बाद में दिलीपसिंह जूदेव ने परिवर्तित आदिवासियों की हिन्दू धर्म में वापसी करवाई। -कमला भसीन भी “अनहद” की संस्थापक सदस्य हैं। -फ़िल्मकार सईद अख्तर मिर्ज़ा “अनहद” के ट्रस्टी हैं।   -मलयालम दैनिक “मातृभूमि” के मालिक हैं एमपी वीरेन्द्रकुमार -वीरेन्द्रकुमार जद(से) के सांसद हैं (केरल से) -केरल में देवेगौड़ा की पार्टी लेफ़्ट फ़्रण्ट की साझीदार है। -शशि थरूर पूर्व राजनैयिक हैं। -चन्द्रन थरूर, शशि थरूर के पिता हैं, जो कोलकाता की आनन्दबाज़ार पत्रिका में संवाददाता थे। -चन्द्रन थरूर ने 1959 में द स्टेट्समैन” की अध्यक्षता की। -शशि थरूर के दो जुड़वाँ लड़के ईशान और कनिष्क हैं, ईशान हांगकांग में “टाइम्स” पत्रिका के लिये काम करते हैं। -कनिष्क लन्दन में “ओपन डेमोक्रेसी” नामक संस्था के लिये काम करते हैं। -शशि थरूर की बहन शोभा थरूर की बेटी रागिनी (अमेरिकी पत्रिका) “इंडिया करंट्स” की सम्पादक हैं। -परमेश्वर थरूर, शशि थरूर के चाचा हैं और वे “रीडर्स डाइजेस्ट” के भारत संस्करण के संस्थापक सदस्य हैं। -शोभना भरतिया हिन्दुस्तान टाइम्स समूह की अध्यक्षा हैं। -शोभना भरतिया केके बिरला की पुत्री और जीड़ी बिरला की पोती हैं -शोभना राज्यसभा की सदस्या भी हैं जिन्हें सोनिया ने नामांकित किया था। -शोभना को 2005 में पद्मश्री भी मिल चुकी है। -शोभना भरतिया सिंधिया परिवार की भी नज़दीकी मित्र हैं। -करण थापर भी हिन्दुस्तान टाइम्स में कालम लिखते हैं। -पत्रकार एन राम की भतीजी की शादी दयानिधि मारन से हुई है।